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असम राइफल्स का बटालियन हेडक्वार्टर शिफ्ट, जनता की मांग पर 135 वर्ष पुराना मुख्यालय भेजा मिजोरम की राजधानी से बाहर

पिछले 35 साल से चली आ रही मिजोरम की जनता की मांग को देखते हुए गृह मंत्रालय ने राजधानी आइजोल से असम राइफल्स के बटालियन हेडक्वार्टर को हटाकर शहर से बाहर स्थानांतरित कर दिया है. असम राइफल्स और मिजोरम सरकार के बीच इस बावत आइजोल में भूमि का हस्तांतरण और नक्शों का औपचारिक आदान-प्रदान, गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ.  

इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि “यह सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है बल्कि मिजोरम की जनता के प्रति मोदी सरकार की ज़िम्मेदारी का प्रतीक है.” गृह मंत्री ने यह भी कहा कि “यह निर्णय मिजोरम के विकास के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है.”

अमित शाह ने कहा कि 1890 में आइजॉल में सेना का पहला कैंप बनने से लेकर आज तक के इतिहास में यह सबसे बड़ा निर्णय माना जाएगा. असम राइफल्स का बटालियन हेडक्वार्टर अब राजधानी आइजोल से करीब 15 किलोमीटर दूर शिफ्ट कर दिया गया है.

इस अवसर पर मिजोरम के मुख्यमंत्री ललदुओमा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो और महानिदेशक, असम राइफल्स सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. (https://x.com/AmitShah/status/1900912739360666079)

गृह मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम मिजोरम के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण क्षण है. उन्होंने कहा कि लगभग 35 साल से विशिष्ट प्रकार की टोपोग्राफी और जगह की कमी के कारण बहुत समय से यह मांग थी कि आइजॉल सहित पूरे मिजोरम के विकास के लिए असम राइफल्स को इंटीरियर में भेजा जाए.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के दूरदर्शी निर्णय के कारण मिजोरम के प्रमुख एरिया में बड़ी भूमि उपलब्ध होने जा रही है, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी. प्रधानमंत्री मोदी के एक महत्वपूर्ण निर्णय के कारण आज लगभग 30-35 साल पुरानी यह मांग पूरी हो रही है.

पूरे म्यांमार की सीमा की रखवाली की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स की है. साथ ही पूरे उत्तर-पूर्वी राज्यों की आंतरिक सुरक्षा की एक बड़ी जिम्मेदारी भी देश की सबसे पुराने पैरा-मिलिट्री फोर्स के हवाले है. करीब 190 वर्ष पहले यानी 1835 में अंग्रेजों ने असम राइफल्स का गठन किया था. (अमेरिका में मिजोरम CM का बदला सुर, अलग राष्ट्र का बजाया भोंपू)

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