रूस और यूक्रेन में शांति की कोशिशों के बीच बाल्टिक देश एस्टोनिया और मॉस्को के बीच तनाव शुरु हो गया है. एस्टोनिया ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रूस ने नारवा नदी में लगाए गए सीमा चिह्नों (नेवीगेशन मार्कर) को जबरन हटा दिया है.
एस्टोनियाई विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके रूस के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है. एस्टोनिया ने कहा, “हमारी संप्रभुता अटूट है. हमारे जलक्षेत्र से बॉयज़ हटाना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” एस्टोनिया हमेशा रूस के खिलाफ राजनीतिक विरोध दर्ज कराता रहा है. वहीं जिस नारवा नदी को लेकर विवाद है, उसे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रूस का हिस्सा बता चुके हैं.
हम रूस का विरोध करेंगे, नारवा में बॉयज लगाने से पीछे नहीं हटेंगे: एस्टोनिया
एस्टोनिया के विदेश मंत्रालय ने नया बयान जारी कर कहा है कि, “हम अपने जलक्षेत्र में बॉयज़ लगाने से पीछे नहीं हटेंगे और इसे हल करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेंगे.” एस्टोनिया ने साफ तौर पर कहा है कि रूस के आगे झुकेंगे नहीं. नारवा नदी पर मॉस्को की हरकत का जवाब देंगे. दरअसल नारवा ऐतिहासिक रूप से रूस का हिस्सा रहा है.
एस्टोनिया का तीसरा सबसे बड़ा शहर नारवा, राजधानी टालिन से ज्यादा सेंट पीटर्सबर्ग के करीब है. यहां की करीब 56,000 की आबादी में से 96% लोग रूसी भाषा बोलते हैं, और हर तीसरा व्यक्ति रूसी पासपोर्ट रखता है. यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन, नारवा को रूस का हिस्सा बता चुके हैं. पुतिन के इस बयान के बाद एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री काजा कलास ने कहा था कि वे चाहती हैं कि यूक्रेन युद्ध में रुस हार जाए और छोटे-छोटे देशों में टूट जाए. एस्टोनिया की पीएम, यूक्रेन का समर्थन करती है और चाहती हैं कि युद्ध के दौरान नाटो सैनिक रुस के खिलाफ मोर्चा संभाले.
क्या है पूरा मामला?
नारवा नदी, रूस और एस्टोनिया की सीमा तय करती है. रूस और एस्टोनिया की सीमा तय करने के साथ यूरोपीय संघ और नाटो की पूर्वी सीमा भी मानी जाती है. मई 2024 में, रूस ने एस्टोनिया द्वारा लगाए गए 50 नेवीगेशन मार्कर (बॉयज) में से 24 को बिना किसी सूचना के हटा दिया था. ये मार्कर जलमार्गों को चिह्नित करने के लिए लगाए गए थे, ताकि स्थानीय मछुआरे या आम नागरिक गलती से एक दूसरे देश की सीमा पार न करें.
नारवा नदी पर रूस और एस्टोनिया की सीमा जानिए
नरवा नदी रूस और एस्टोनिया के बीच एक झील से निकलती है और बाल्टिक सागर के हिस्से फिनलैंड की खाड़ी में जाकर मिल जाती है. नरवा नदी एस्टोनिया के लिए शिपिंग का मुख्य मार्ग है. ये इसलिए भी अहम है क्योंकि नदी के तल में प्राकृतिक परिवर्तन के कारण हर साल शिपिंग मार्ग को बनाया जाता है. दरअसल नारवा नदी एस्टोनिया की सबसे बड़ी नदी है. जमीन के समान ही नदी की लंबाई है. एस्टोनिया और रूस के बीच यह नदी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है. नरवा नदी के किनारे रूसी शहर इवांगोरोड है. नारवा नाम का शहर एस्टोनिया और सेंट पीटर्सबर्ग गवर्नरेट की सीमा थी. नार्वा शहर में साल 1920 में हस्ताक्षरित टार्टू की संधि के अनुसार, एस्टोनियाई-रूसी सीमा नदी के थोड़ा पूर्व में 10 किलोमीटर (6 मील) तक चली गई और इवांगोरोड शहर को एस्टोनिया को सौंपा गया था.
फ्लोटिंग बोय के जरिए रूस और एस्टोनिया की सीमाएं अलग अलग मार्क की जाती हैं. रूस हमेशा से इन फ्लोटिंग मार्कर को लेकर का विरोध करता रहा है. एस्टोनिया की सीमा रक्षक सेवा हमेशा से कहता रहा है कि फ्लोटिंग बॉयज हटाना रूस की एक रणनीतिक चाल भी हो सकती ताकि नाटो समर्थित देश परेशान और रूस के डर के साये में रहें.