By Nalini Tewari
सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस बार बहुत अहम होने वाली है, क्योंकि फ्रांस समेत कई यूरोपीय देश स्वतंत्र फिलीस्तीन को लेकर प्रस्ताव लाने वाले हैं. लेकिन उससे पहले अमेरिका ने कर दिया है बड़ा खेल.
अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और 80 अन्य अधिकारियों के वीजा रद्द कर दिए हैं. साथ ही नए वीजा को खारिज कर दिया है.
इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उस कार्यक्रम को भी निलंबित कर दिया है जिसके तहत गाजा के घायल फिलिस्तीनी बच्चों को इलाज के लिए अमेरिका लाया जाता था.
आतंकवाद को बढ़ावा देने की प्रथाएं खत्म करे फिलीस्तीन- मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश सचिव के इस आदेश के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा “यह हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हित में है कि हम पीएलओ और फिलिस्तीनी प्राधिकरण को उनकी प्रतिबद्धताओं का पालन न करने और शांति की संभावनाओं को कमजोर करने के लिए जवाबदेह ठहराएं. शांति के साझेदार माने जाने के लिए इन समूहों को लगातार आतंकवाद का खंडन करना होगा और शिक्षा में आतंकवाद को बढ़ावा देने की प्रथाओं को खत्म करना होगा, जैसा कि अमेरिकी कानून में जरूरी है और जैसा पीएलओ ने वादा किया था.”
फिलिस्तीन ने अमेरिकी फैसले की निंदा की, फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा
फिलीस्तीन ने वीजा वापसी को संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अमेरिकी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन बताया है. विदेश विभाग से अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया.
फिलिस्तीन ने कहा, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति ने वीजा के फैसले पर गहरा खेद और आश्चर्य व्यक्त किया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून और मुख्यालय समझौते का उल्लंघन करता है. फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र का एक पर्यवेक्षक सदस्य है.
22 सितंबर को यूएन सभा में शामिल होने वाले हैं अब्बास
फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास न्यूयॉर्क को होने वाली एक उच्च-स्तरीय बैठक में भी हिस्सा लेने वाले थे, जिसे फ्रांस और सऊदी अरब की सह-अध्यक्षता में आयोजित किया गया है. यह बैठक इजरायल और एक स्वतंत्र फिलिस्तीन के साथ-साथ रहने वाले दो-राज्य समाधान के लिए बुलाई गई थी. संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर ने कहा कि अब्बास इस बार भी महासभा की बैठकों का नेतृत्व करेंगे और वहां भाषण देने की उम्मीद है, जैसा कि वह कई वर्षों से करते आ रहे हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय से यूएन मांगेगा जवाब
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि विश्व निकाय विदेश विभाग से स्पष्टीकरण मांगेगा. दुजारिक ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि यह मामला सुलझ जाएगा. यह जरूरी है कि सभी सदस्य राष्ट्र और स्थायी पर्यवेक्षक प्रतिनिधित्व कर सकें.”
दरअसल इजरायल और हमास की जंग के दौरान फिलिस्तीन पर हमास को संरक्षण देने का आरोप है. वहीं इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्रांस के फ्री फिलिस्तीन के प्रस्ताव का विरोध किया है. चूंकि अमेरिका और इजरायल दोनों घनिष्ट मित्र देश हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने गाजा पट्टी के लोगों को दूसरे देशों में बसाने और क्षेत्र को अमेरिकी संरक्षण में रखने का प्रस्ताव दिया है. फिलिस्तीनी लोगों और वहां के राष्ट्रपति ने इसका विरोध किया है. माना जा रहा है कि वीजा रद्द करके अमेरिका ने संदेश देने की कोशिश की है, कि उन्हें अमेरिका की बात माननी पड़ेगी.