साल 2025 जाते-जाते मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है, लेकिन इस बाद तनाव दो गहरे मित्र देशों में है. दोस्ताना रिश्ते रखने वाले सऊदी अरब और यूएई के बीच तनातनी का आलम ये है कि सऊदी अरब ने यूएई को दो जहाजों पर हमला कर दिया है. इस घातक हमले का वीडियो भी सामने आया है.
सऊदी अरब ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने यमन के बंदरगाही शहर मुकल्ला पर बमबारी की है, क्योंकि वहां विद्रोहियों के लिए हथियारों की एक खेप संयुक्त अरब अमीरात से आई थी. सऊदी अरब ने कहा है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक “रेड लाइन” है, जिसकी रक्षा की जाएगी.
वहीं यूएई ने सऊदी अरब के सारे आरोपों को खारिज कर दिया है. यूएई ने कहा है, कि जहाज में कोई हथियार नहीं थे. बहरहाल खाड़ी देश यूएई और सऊदी अरब के बीच खटास और बढ़ चुकी है.
विद्रोहियों के लिए उतारे जा रहे थे हथियार, सऊदी ने यूएई के दो जहाजों को उड़ाया
सऊदी अरब ने एक वीडियो फुटेज जारी करके दुनिया में सनसनी फैला दी है. सऊदी अरब ने वीडियो फुटेज जारी कर बताया कि यूएई के जहाज मुकल्ला पोर्ट पर हथियारों की अनलोडिंग कर रहे थे. जब हथियार और बख्तरबंद गाड़ियां पोर्ट पर उतारे जा रहे थे, उसी वक्त ये हमला किया गया.
बयान में कहा गया, सऊदी अरब की वायु सेना ने मंगलवार सुबह एक सीमित सैन्य ऑपरेशन किया, जिसमें मुकल्ला बंदरगाह पर दो जहाजों से उतारे गए हथियारों और युद्धक वाहनों को निशाना बनाया गया.
कौन से विद्रोही गुट के लिए यूएई ने भेजे थे हथियार, सऊदी अरब ने अपने ही मित्र देश को क्यों किया टारगेट?
बताया जा रहा है कि हथियार यमन के अलगाववादी समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के लिए थे. इस समूह को यूएई का समर्थन प्राप्त करता है.
सऊदी अरब की ओर से दावा किया जा रहा है कि “यूएई यमन के विद्रोहियों को हथियार भेज रहा था, इसलिए इन हथियारों से पैदा होने वाले खतरे और वृद्धि को देखते हुए सऊदी अरब ने यमन पर यह हमला किया है. यूएई द्वारा विद्रोहियों को भेजे जा रहे ये हथियार यमन की सुरक्षा और स्थिरता को धमकी देते हैं.”
सऊदी अरब ने यूएई जैसे भाईचारे वाले देश द्वारा सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल की सेनाओं पर सऊदी दक्षिणी सीमा के पास मिलिट्री ऑपरेशन करने का दबाव डालने का आरोप लगाया है और निंदा की है.
यूएई ने आरोपों को किया खारिज, कहा, चौंकाने वाले हैं हथियारों की सप्लाई का आरोप
यूएई ने जहाजों में हथियार होने के दावे से इनकार किया है. साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है.
यूएई ने अपने बयान में कहा, “सऊदी अरब के आरोप हैरान करने वाले हैं. जिन सैन्य वाहनों की बात की जा रही है, वे यमन में तैनात अमीराती सेना के लिए थे. इन्हें सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन से बातचीत के बाद भेजा गया था. यूएई ने इन वाहनों को लेकर किए गए हवाई हमलों पर भी आश्चर्य जताया.”
सऊदी अरब ने यूएई के सैनिकों को दिया अल्टीमेटम
बताया जा रहा है कि सऊदी अरब ने यमन में तैनात यूएई के सैनिकों को अल्टीमेटम देते हुए 24 घंटे का समय दिया है. सऊदी अरब ने कहा है कि “यूएई के सैनिक 24 घंटे के अंदर यमन खाली कर दें.”
वहीं सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “यह सीमित कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे को रोकने के लिए की गई. हमने संपत्ति क्षति न्यूनतम रखी. हमले में कोई हताहत नहीं होने की खबर है, लेकिन मुकल्ला पोर्ट पर भारी क्षति हुई.”
यमन के लिए ये तीन गुट बने आफत, आसानी से समझिए कैसे गृहयुद्ध में फंसा देश
यमन में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं. यमन में तीन विद्रोही, अलगाववादी गुट हैं, जो हूती विद्रोही, सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल हैं.
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है, जो इजरायल का विरोधी है और जब हमास ने इजरायल पर अटैक किया था तो हूतियों ने लाल सागर में आने वाले हर इजरायली और उसके समर्थक देशों के जहाज को निशाना बनाया है. कुछ महीने पहले अमेरिका ने हूती को आतंकवादी संगठन घोषित किया है.
सऊदी अरब और यूएई पिछले 10 साल से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे हैं लेकिन वे वहां अलग-अलग गुटों का समर्थन करते हैं।
वहीं सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल यानि एसटीसी को कथित रूप से यूएई का समर्थन प्राप्त है. जबकि प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के साथ सऊदी अरब खड़ा हुआ है.
सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन करता है और यमन को एकजुट रखना चाहता है. लेकिन यूएई, एसटीसी का समर्थन करता है, जो दक्षिण यमन को अलग राज्य बनाने की मांग करता है.
अलगाववादी समूह एसटीसी ने मांगी यूएई से मदद, यमन सरकार ने रद्द की यूएई के साथ रक्षा डील
समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने इसे “आक्रामकता” करार देते हुए यूएई से सैन्य सहायता मांगी थी.
इसके जवाब में यमन की सऊदी समर्थित राष्ट्रपति परिषद ने यूएई के साथ रक्षा समझौता रद्द कर दिया और 72 घंटे के लिए सीमाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है.
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने घोषणा की कि देश में मौजूद यूएई की सेनाओं को 24 घंटे के भीतर यमन छोड़ना होगा. इसके साथ ही सरकार ने हालात पर नियंत्रण के लिए 72 घंटे की हवाई, थल और समुद्री नाकाबंदी लागू करने और 90 दिनों के लिए आपातकाल घोषित करने का फैसला किया है.
वहीं अल-अलीमी ने अलगाववादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सऊदी अरब के समर्थन की सराहना की और कहा कि “यह कदम यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के हित में है.”

