रूस ने एक ब्रिटिश राजनयिक पर जासूसी का आरोप लगाते हुए फौरन मॉस्को छोड़ देने का आदेश दिया है. रूस की सुरक्षा एजेंसी एफएसबी का दावा है कि डिप्लोमैटिक गतिविधियों की आड़ में राजनयिक ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एआई 6 के लिए काम कर रहा था. जासूसी और राजनयिक को देश से बाहर निकाले जाने पर ब्रिटेन और रूस में तनातनी शुरु हो गई है.
मॉस्को नहीं बर्दाश्त करेगा जासूसी, राजनयिक छोड़े देश: रूस
एफएसबी के खुलासे के बाद रूस के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है. एफएसबी ने ब्रिटिश राजनयिक की पहचान गैरेथ सैमुअल डेविस के रूप में की, जो मॉस्को दूतावास में एक द्वितीय सचिव थे. एफएसबी ने कहा है कि गैरेथ सैमुअल ब्रिटेन की खुफिया सेवा के लिए गुप्त रूप से काम कर रहे थे.
रूसी विदेश मंत्रालय ने राजनयिक की मान्यता रद्द कर दी गई है और उन्हें दो सप्ताह के अंदर रूस छोड़कर जाने को कहा है.
मंत्रालय ने ब्रिटिश दूतावास की प्रभारी डानाए डोलाकिया को तलब कर विरोध दर्ज कराया है.
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, “रूस में ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों के अघोषित कार्यों को मॉस्को बर्दाश्त नहीं करेगा. इस मुद्दे पर लंदन द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई का रूस मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.”
सीआईए, एमआई 6, फ्रेंच जासूस रच रहे साजिश, रुस ने ब्रिटेन को विश्वासघाती अल्बियन बताया
रूस का कहना है कि वेस्ट देश नहीं चाहते कि उनके यहां शांति हो. इसलिए अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए), ब्रिटेन की सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (एमआई6) और फ्रांस की डीजीएसई ने गुप्त जानकारी चुराने, रूसियों की भर्ती करने और रूस के भीतर फूट डालने के प्रयास तेज कर दिए हैं.
वहीं पश्चिमी खुफिया एजेंसी प्रमुखों का कहना है कि एफएसबी, रूस की एसवीआर विदेशी खुफिया सेवा और जीआरयू सैन्य खुफिया सेवा ने पश्चिमी दुनिया भर में बड़े साइबर हमले और तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ साजिश रच रहा है.
रूस, ब्रिटेन को अपना बड़ा दुश्मन मानता है. रूसी सरकारी टेलीविजन पर, ब्रिटेन को “विश्वासघाती अल्बियन” बताया जा रहा है. दरअसल अल्बियन एक फ्रेंच वाक्य है, जो ब्रिटेन के लिए अपमानजनक है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उसकी कथित बेवफाई, धोखे और कपटपूर्ण नीतियों को दर्शाता है.
रूस, एमआई 06 को एक शातिर वैश्विक खुफिया शक्ति के रूप में दिखा रहा है, जो वाशिंगटन से लेकर ईरान तक पर्दे के पीछे से हस्तक्षेप कर रही है और दुनिया भर में रूसी हितों को कमजोर करने का दोहरा प्रयास कर रही है.
रूस हताश है, इसलिए राजनयिक पर दुर्भावना से लगाए आरोप: ब्रिटेन
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने रूस की कार्रवाई पर पलटवार किया है. ब्रिटेन की ओर से कहा गया है कि ये पहली बार नहीं है जब क्रेमलिन ने ब्रिटिश कर्मचारियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और निराधार आरोप लगाए हों. ब्रिटिश राजनयिक पर ये कार्रवाई रूस की हताशा दिखा रही है.
यूक्रेन में ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती के बाद से दोनों देशों मे संबंध बिगड़े
फरवरी 2022 में जब यूक्रेन के साथ रूस का युद्ध शुरु हुआ तो ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती से क्रेमलिन भड़क गया था. साल 2022 से दोनों देशों के बीच संबंध और खराब हो गए. तब से रूस और नाटो सहयोगियों के बीच राजनयिकों के पारस्परिक निष्कासन अक्सर होता रहा है.
पिछले साल मार्च 2025 में मॉस्को ने जासूसी के आरोपों को लेकर मॉस्को में तैनात दो ब्रिटिश राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था. जिनमें 32 वर्षीय एक ब्रिटिश महिला राजनयिक का पति भी शामिल था. जबकि एक दूतावास में तैनात सेकेंड सेक्रेटरी था. दोनों पर एमआई 6 के लिए जासूसी का आरोप था.
सितंबर 2024 में भी रशिया ने मॉस्को स्थित ब्रिटिश दूतावास के पॉलिटिकल डिपार्टमेंट में तैनात छह कर्मचारियों को जासूसी के आरोप में मान्यता रद्द करते हुए देश से निकाल दिया था. इसके बाद नवम्बर 2024 में एक ब्रिटिश दूतावास के एक सेकेंड सेक्रेटरी को पर्सोना नॉन ग्रेटा घोषित करते हुए रूस छोड़ने का आदेश सुनाया था.
ब्रिटेन ने किया था रूसी जासूसों का भंडाफोड़, ‘किलर सेक्सी ब्रूनेट्स’ को किया था गिरफ्तार
साल 2025 ब्रिटेन ने भी रूसी जासूसों के गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जिसमें 6 बल्गेरियाई नागरिक भी थे जो रूस के लिए जासूसी कर रहे थे. इस गिरोह में सबसे मशहूर 2 महिला जासूस थीं, जो हनीट्रैप को हथियार की तरह इस्तेमाल करती थीं. “किलर सेक्सी ब्रुनेट्स” के नाम से जानी जाने वाली 2 लड़कियों में एक लैब असिस्टेंट कैट्रिन इवानोवा थी और दूसरी वान्या गाबोरोवा नाम की एक ब्यूटीशियन थी. सीक्रेट निकालने के लिए ये दोनों हनीट्रैप के जरिए यूरोपीय देशों की सीक्रेट निकालती थीं और रूस को देती थीं. दोनों ही महिला जासूसों को लंदन की ओल्ड बेली कोर्ट ने जासूसी के आरोप में दोषी करार दिया है.
साल 2026 की शुरुआत में रूस से ब्रिटिश राजनयिक के निकाले जाने के बाद ब्रिटेन भी रूसी राजनयिक पर एक्शन लेने की तैयारी कर रहा है.

