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ट्रंप के Air Force One में खराबी, नहीं पहुंच पाया दावोस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्लेन एयरफोर्स वन में कुछ तकनीकी खराबी आने के बाद उसे वापस अमेरिका की तरफ मोड़ दिया गया. ट्रंप अपने प्लेन में सवार होकर दावोस पहुंच रहे थे. लेकिन दुनिया के सबसे सुरक्षित प्लेन, जिस पर परमाणु हमला भी नाकाम रहता है, उसे बीच रास्ते से वापस लौटाना पड़े और फिर ट्रंप को दूसरे विमान से स्विट्जरलैंड पहुंचना पड़े कई तरह की थ्योरी और कहानियों को जन्म दे रहा है. 

एयरफोर्स वन में तकनीकी गड़बड़ी, ट्रंप थे सवार

डोनाल्ड ट्रंप के आधिकारिक विमान एयर फोर्स वन को टेकऑफ के तुरंत बाद मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या के कारण जॉइंट बेस एंड्रयूज़ लौटना पड़ा. बताया जा रहा है कि टेकऑफ के तुरंत बाद ही विमान के प्रेस केबिन की लाइटें कुछ देर के लिए बंद हो गईं.

हालांकि यह कोई गंभीर इमरजेंसी स्थिति नहीं थी, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से विमान को वापस लाने का फैसला किया गया.

दरअसल ट्रंप एयरफोर्स वन में सवार होकर स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंच रहे थे, लेकिन बीच रास्ते से ही उन्हें लौटना पड़ा. हालांकि व्हाइट हाउस ने बताया कि उनके कार्यक्रम पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है.

व्हाइट हाउस ने दिया स्पष्टीकरण, कहा, कोई घबराने की बात नहीं

व्हाइट हाउस ने बताया कि “यह कोई गंभीर स्थिति नहीं थी और विमान सुरक्षित तरीके से वापस पहुंचा. कोई घबराने की बात नहीं है.”

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के मुताबिक “विमान को वापस लाने का फैसला टेकऑफ के बाद लिया गया. विमान में मौजूद क्रू ने एक छोटी सी इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम देखी और वापस लौटने का फैसला किया गया.”

आपको बता दें कि एयर फोर्स वन को विश्व के सबसे सुरक्षित विमानों में गिना जाता है और इसके तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर बहुत कड़ाई से पालन किया जाता है.  

क्या है एयरफोर्स वन, जिसे कहा जाता है उड़ता हुआ किला

अमेरिका के राष्ट्रपति जिस विमान में चलते हैं, उसे एयरफोर्स वन कहा जाता है. ये एक बोइंग 747-200बी सीरीज का विमान होता है, जिसे सैन्य भाषा में वीसी-25ए कहते हैं. इसकी टेक्नोलॉजी और अभेद्य सुरक्षा के चलते इस विमान को उड़ता हुआ किला कहा जाता है. 

एयरफोर्स वन के अंदर ऐसी तकनीकी मौजूद है, जिससे दुनिया के किसी भी देश के साथ हवा से ही संपर्क किया जा सकता है. इतना ही नहीं, हवा में उड़ते हुए ही राष्ट्रपति आपात स्थिति में देश को संबोधित कर सकते हैं. 

जरूरत पड़ने पर अमेरिकी राष्ट्रपति इसे ही वॉर रूम बनाया जा सकता है. विमान में एंटी मिसाइल सिस्टम लगा हुआ है, साथ ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स  से बचने के लिए भी खास कोटिंग होती है, जिससे परमाणु हमले का भी विमान पर असर नहीं होता है. 

ये किसी भी तरह के हमले को सहने में सक्षम है. साथ ही जरूरत पड़ने पर इसमें हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है, जिससे ये विमान कई हफ्तों तक हवा में ही उड़ सकता है. एयरफोर्स वन की सुरक्षा के लिए विमान के दोनों तरफ लड़ाकू विमान भी उड़ते हैं, ताकि दुश्मन एयरफोर्स वन के आसपास भटक न पाए. 

9/11 हमले के दौरान राष्ट्रपति को एयरफोर्स वन में छिपाया गया था

एयरफोर्स वन की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 9/11 हमले के दौरान जब अलकायदा के आतंकियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के अलावा पेंटागन पर अटैक करना शुरु किया तो तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को एयरफोर्स वन में छिपाया गया था. बताया जाता है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की सुरक्षा को लेकर उनके प्लेन एयरफोर्स-वन को 3 घंटे 10 मिनट तक हवा में रखा गया था.

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