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युद्धग्रस्त देशों के तेल का खेल, इंडियन कोस्टगार्ड ने किया इंटरनेशनल रैकेट का भंडाफोड़

भारतीय समुद्री-सीमा में गैर-कानूनी तरीके से तेल की तस्करी करने वाले तीन (03) संदिग्ध जहाजों को इंडियन कोस्टगार्ड ने हिरासत में लिया है. इस अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, मुंबई से करीब 100 नॉटिकल मील की दूरी पर हुआ है.

भारतीय तटरक्षक बल के मुताबिक, हिरासत में लिए तीनों जहाजों को मुंबई लाया जा रहा है ताकि उचित कानूनी कार्रवाई के लिए भारतीय सीमा शुल्क और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया जाए.

रैकेट में विदेशी दलाल शामिल, समंदर में जहाजों के बीच माल की होती थी बिक्री

कोस्टगार्ड के मुताबिक, तस्करी करने वाले गिरोह ने एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाई थी जिसमें सस्ते तेल को समुद्री जहाजों द्वारा ले जाया जाता था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मोटर टैंकरों में स्थानांतरित किया जाता था. प्रारंभिक जांच से पता चला कि गिरोह में कई देशों में काम करने वाले दलाल शामिल थे, जो समुद्र में जहाजों के बीच माल की बिक्री और हस्तांतरण कार्य का समन्वय करते थे.

जानकारी के मुताबिक, भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 5-6 फरवरी को एक सुनियोजित समुद्री-हवाई समन्वित अभियान के जरिए इस अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया. रैकेट में मौजूद जहाज, युद्धग्रस्त देशों से भारी मात्रा में तेल और तेल-आधारित कार्गो की तस्करी करते थे.

भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों ने तीनों संदिग्ध जहाजों को रोका और विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमों ने जहाजों की लगातार तलाशी के अलावा जहाज पर बरामद इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पुष्टि की. दस्तावेजों का सत्यापन और चालक दल के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ के द्वारा घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाने और आपराधिक कार्यप्रणाली की पुष्टि हो पाई.

भारत के ईईजेड से जब्त किए गए 03 जहाज

आईसीजी की तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों द्वारा पता चलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया, जिसमें स्पेशल इकोनोमिक जोन (ईईजेड) के भीतर संदिग्ध गतिविधि में लिप्त एक मोटर टैंकर की पहचान की गई थी. इसके बाद, जहाजों की आवाजाही की डिजिटल जांच और डेटा पैटर्न विश्लेषण से टैंकर की ओर आ रहे दो अतिरिक्त जहाजों की पहचान हुई, जिन पर अवैध रूप से तेल के जहाज-से-जहाज पर हस्तांतरण में शामिल होने का संदेह था, जिससे भारत सहित तटीय राज्यों को देय भारी शुल्क की चोरी हो रही थी.

प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ये जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलते रहते थे. शुरुआती जांच से यह भी पता चलता है कि जहाजों के मालिक विदेश में रहते हैं.

कोस्टगार्ड के मुताबिक, उन्नत डिजिटल निगरानी के माध्यम से शुरू किया गया और भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ती समुद्री उपस्थिति द्वारा लागू किया गया यह अभियान, समुद्री क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में और समुद्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था के एक दृढ़ प्रवर्तक के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है.

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