Breaking News Conflict Indian-Subcontinent

अमेरिका ने POK-अक्साई चिन भारत का बताया, INDIA के मैप से हलचल बढ़ी

By Nalini Tewari

अमेरिका द्वारा जारी किए गए भारत के मानचित्र (मैप) ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है. भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत का नक्शा जारी किया है, जिससे पाकिस्तान की बोलती बंद हो गई है. वहीं चीन का भड़कना तय माना जा रहा है,

अमेरिका द्वारा जारी किए गए नक्शे में जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया है.

भारत हमेशा से जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता रहा है. ऐसे में अमेरिका की ओर से जारी मैप से पाकिस्तान को रणनीतिक संदेश मिल चुका है. हालांकि भारत, दो देशों के संबंधों में तीसरे देश की मध्यस्थता कभी स्वीकार नहीं करता है, लेकिन अमेरिका का ये मानना कि पीओके भारत का हिस्सा है, वो भारत के दावे को और मजबूत करता है.

भारत के मैप ने बढ़ाई पाकिस्तान की धड़कन, अमेरिका की चापलूसी नहीं आई काम

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का ऐलान हुआ है. इसके साथ ही अमेरिका ने भारत का आधिकारिक नक्शा जारी किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इस नक्शे में पूरा जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) समेत, भारत का हिस्सा दिखाया गया. 

अमेरिकी विदेश विभाग या अन्य आधिकारिक एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में पीओके को लेकर स्पष्ट सीमांकन दिखाया जाता रहा था, ताकि अमेरिका, पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को संतुलित कर सके. लेकिन इस बार जो मैप जारी किया गया है, उसे पाकिस्तान के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि पीओके को भारत का हिस्सा बताया गया है. 

अमेरिका ने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का किया पर्दाफाश

इस मैप के जरिए अमेरिका ने पाकिस्तान को सीधे-सीधे संदेश दे दिया है कि फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर का बार-बार वॉशिंगटन भागना और भारत के खिलाफ लॉबिंग करना सब बेकार हो गया है. अमेरिका ने पाकिस्तान की सच्चाई दुनिया के सामने रख दी है. 

पाकिस्तान हमेशा से अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का रोना लेकर बैठ जाता है. भारत के खिलाफ कश्मीर को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाता रहता है. लेकिन अमेरिका का जारी मैप पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. 

कश्मीर सॉलिडैरिटी डे के नाम पर भी शहबाज ने रोया था कश्मीर का रोना

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने 5 फरवरी को कथित ‘कश्मीर सॉलिडैरिटी डे’ पर पीओके असेंबली में भाषण के दौरान कश्मीर का राग अलापा था. पीएम शहबाज शरीफ ने कहा था कि ‘कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है.’ 

लेकिन इस भाषण के 02 दिन के अंदर ही अमेरिका से आए नक्शे ने अंतराष्ट्रीय तौर पर कश्मीर को गले की नस नहीं बल्कि भारत का अभिन्न अंग बता दिया है. जो हमेशा से भारत कहता रहा है. 

मैप में पीओके के साथ अक्साई चिन भी भारत का हिस्सा 

अमेरिका ने जो नक्शा जारी किया है, उसमें अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है. यह वही इलाका है, जिस पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है. चीन वर्षों से इस इलाके पर दावा करता रहा है, जबकि भारत इसे अवैध कब्जा बताता है. 

इस नक्शे में अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाना चीन के लिए बड़ा झटका है. अमेरिका ने पहली बार भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता को स्वीकार किया है.

हालांकि एक्सपर्ट बता रहे हैं कि भारत और चीन के सुधरते संबंधों को लिए ये मैप नुकसानदेह भी साबित हो सकता है. क्योंकि इस मैप पर चीन का भड़कना तय है, लेकिन हमेशा अक्साई चिन के नाम पर अमेरिका फूट डालने की कोशिश करता रहा है. 

अक्साई चिन का जिक्र, भारत-चीन के सुधरते रिश्तों को डीरेल करने की साजिश तो नहीं? 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने पिछले साल पीएम मोदी के चीन के दौरे को लेकर कटाक्ष किया था और भारत-चीन के बन रहे संबंधों में दरार डालने की कोशिश की थी.  

नवारो ने कहा था, “भारत आप तानाशाही के साथ मिल रहे हो. चीन के साथ आप दशकों तक जंग में रहे. उन्होंने आपके अक्साई चिन और सारे इलाके पर कब्जा कर लिया है, वे तुम्हारे दोस्त नहीं हैं और रूस.. कम ऑन!” 

दरअसल साल 2024 से भारत और चीन के बीच संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है, जो साल 2020 में गलवान में हुई झड़प के बाद और बिगड़ गए थे. साल 2024 में जब पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस में मुलाकात हुई, तब से लेकर अब तक यानि करीब डेढ़ साल में नई दिल्ली और शी जिनपिंग के संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है, चाहे वो एलएसी पर हुई समझौता हो, या फिर मानसरोवर यात्रा शुरु करना और दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट की शुरुआत करना हो.

चीन से हुई समझौते को लेकर कितनी ‘पारदर्शिता’ बरती गई है. अक्टूबर 2024 में भारत ने चीन के साथ डिसएंगेजमेंट समझौता किया गया था जिसके तहत पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर पिछले चार साल से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है. समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गई हैं.

पिछले साल अमेरिका के साथ टैरिफ तनाव के बीच भारत-चीन के संबंधों में उस वक्त और मजबूती आ गई जब चीन जाकर पीएम मोदी ने शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना था कि “उन्होंने भारत से संबंध बिगाड़कर गलती की, क्योंकि भारत प्रतिद्वंदी चीन के साथ करीब हो रहा है.”

ऐसे में अक्साई चिन जो एक संवेदनशील मुद्दा है जो भारत-चीन के संबंधों में दरार डाल सकता है. इसलिए ऐसा भी माना जा रहा है कि अमेरिका ने जानबूझकर अक्साई चिन के मुद्दे का जिक्र करके भारत-चीन के संबंधों में दरार डालने का काम किया है. 

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave feedback about this

  • Rating

Choose Your Premium Plan

Unlock exclusive defence reports, geopolitical analysis and premium articles.