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दिल्ली में ईरानी डिप्टी विदेशी मंत्री, जयशंकर से की मुलाकात

मिडिल ईस्ट में इस वक्त हालात बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण बने हुए हैं. अमेरिका-इजरायल की मार झेल रहे ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई है मुलाकात. ये मुलाकात विदेश सचिव विक्रम मिसरी के नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के लिए रखी गई शोकसभा में पहुंचने के एक दिन बाद हुई है. पिछले 48 घंटों में भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक पहल तेज की गई है. इस लिहाज से जयशंकर और खातिबजादेह के बीच हुई मीटिंग के अहम मानी जा रही है.

हिंद महासागर में अमेरिका के हमले में तबाह हुए जहाज को लेकर ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि वह जहाज भारत के न्योते पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने गया था और उसपर कोई हथियार भी नहीं था. 

भारत- ईरान के बीच सभ्यतागत संबंध: ईरानी डिप्टी विदेश मंत्री

नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2026 के मंच पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई है. ये बातचीत ऐसे वक्त में हुई है, जब ईरान में हालात बेहद खराब है. युद्ध की आग खाड़ी देशों नें भड़की हुई है. हिंद महासागर में भी ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया है. पिछले 24 घंटों में भारत और ईरान के शीर्ष राजनयिकों के बीच यह तीसरी बार संपर्क है.

इस मुलाकात से पहले गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की थी. इस बातचीत के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया था. दूतावास में ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आयोजित एक शोक सभा में मिसरी ने शोक संवेदना वाले रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त की थी.

जयशंकर से मुलाकात को लेकर ईरानी उप विदेश मंत्री ने कहा, कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर कूटनीतिक बातचीत हुई है और भारत और ईरान के बीच “सभ्यतागत संबंध” हैं. खतीबजादेह ने कहा, “मेरी भारत के विदेश मंत्री से थोड़ी बातचीत हुई और यहां कुछ अन्य लोगों से भी मुलाकात हुई. ईरान और भारत के बीच बहुत पुराने सभ्यतागत संबंध हैं. हम इंडो-फारसी संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हुए हैं. इसी सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के अनुसार हम ईरान-भारत संबंधों को बहुत महत्व देते हैं.”

ईरान के युद्धपोत में नहीं था हथियार, भारत के न्योते पर आया था युद्धपोत: ईरानी उप विदेश मंत्री

हिंद महासागर में अमेरिका के हमले में तबाह हुए ईरानी जहाज डेना को लेकर ईरानी उप विदेश मंत्री ने नाराजगी जाहिर की है. अमेरिकी कार्रवाई की तुलना नाजी जर्मनी से करते हुए कहा, कहा कि वह जहाज भारत के न्योते पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने गया था और उसपर कोई हथियार भी नहीं था. 

खतीबजादेह ने कहा, “जहाज हमारे भारतीय दोस्तों के न्योतो पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने गया था. वह केवल औपचारिक तौर पर वहां था. उस पर कोई सामान नहीं था और वह बिना हथियार के था. इतिहास में ऐसा पहले केवल नाजी दौर में हुआ था, जब बिना हथियार वाले जहाजों पर युद्ध क्षेत्र से दूर हमला किया गया था. इसलिए जब अमेरिकियों ने एक सेरेमोनियल, बिना हथियार और खाली जहाज पर हमला किया, तो यह नाजी जर्मनी जैसी कार्रवाई है. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस अभ्यास में शामिल कई युवा ईरानी नाविकों की मौत हो गई. जिन्होंने यह किया है, उन्हें बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता.”

मैं ओवल ऑफिस में नहीं बैठा हूं, हम आखिरी गोली तक लड़ेंगे: खतीबजादेह

उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा है कि ईरान के पास अभी अमेरिका और इजरायल की घुसपैठ के खिलाफ वीरता से अपनी रक्षा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. ईरान आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक लड़ाई करेगा. खतीबजादेह बोले, “मैं ओवल ऑफिस (अमेरिकी राष्ट्रपति के ऑफिस) में नहीं बैठा हूं, इसलिए मुझे नहीं पता कि वे क्या फैसला करेंगे. वे बाजार और दर्शकों के हिसाब से हर बार अपने लक्ष्य और रणनीति बदलते रहते हैं. लेकिन हम वीर राष्ट्रवादी रक्षा कर रहे हैं. हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है, हमें उनकी आक्रामकता को रोकना है और इस क्षेत्र में उनके व्यवहार को बदलना है. वे अपनी सीमा से हजारों मील दूर आकर किसी दूसरे देश की राजनीतिक व्यवस्था बदलने और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराने का औपनिवेशिक मिशन नहीं चला सकते.”

आपको बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर अटैक किया था. हमला खामेनेई के घर पर किया गया था. जिस वक्त हमला हुआ, खामेनेई शीर्ष सैन्य अधिकारियों और रक्षा मंत्री के साथ बैठक कर रहे थे. इस हमले में खामेनेई और उनके परिवार के अलावा सभी ईरानी शीर्ष अधिकारियों की मौत हो गई थी. अमेरिका-इजरायल को लगा था कि खामेनेई के खात्मे से जंग आसान होगी, लेकिन ईरान ने तगड़ा पलटवार किया है, जिसकी चपेट में कुवैत, बहरीन, यूएई समेत लगभग सभी खाड़ी देश आ चुके हैं. युद्ध सातवें दिन में प्रवेश कर गया है. ईरान ऐसी ऐसी मिसाइलें दाग रहा है, जो अबतक दुनिया के लिए रहस्यमयी थीं.

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