कैलिफोर्निया के एक टेक कंपनी के दिग्गज को ईरान की जासूसी और मदद पहुंचाने के आरोप में अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने गिरफ्तार किया है. टेक कंपनी के सीईओ जमशेद घोमी पर ईरान की सेना और उसके न्यूक्लियर इंस्टीट्यूशंस तक कंप्यूटर नेटवर्किंग उपकरण पहुंचाने का आरोप है.
साल 2011 से लेकर साल 2023 तक सीआईए और एफबीआई की नाक के नीचे जमशेद, ईरान की मदद करता रहा और यहां की एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी.
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) का दावा है कि जमशेद घोमी ने सालों तक अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरान को संवेदनशील तकनीक सप्लाई की और इस कारोबार से करोड़ों डॉलर कमाए.
जमशेद को उसके 35 मिलियन डॉलर (3.5 करोड़ डॉलर) के समंदर किनारे आलीशान बंगले से गिरफ्तार किया गया है. जमशेद का ये बंगला भी अमेरिकी एजेंसियों के जांच के दायरे में है.
टेक सीईओ का ईरानी न्यूक्लियर नेटवर्क, सीआईए-एफबीआई को चकमा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु प्रोग्राम को खत्म करने के लिए अपनी संजीदगी का रोना तो रो रहे हैं लेकिन सच यह है कि उनके देश से आए सामान को ही ईरान ने इसके लिए इस्तेमाल किया है.
कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट कोस्ट से 62 वर्षीय जमशेद घोमी को अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने गिरफ्तार किया है. घोमी के पास अमेरिकी और ईरानी दोनों देशों की नागरिकता है. जमशेद तेहरान स्थित कंप्यूटर नेटवर्किंग कंपनी फराज परदाज रायनेह (एफपीआर) का संस्थापक, मालिक और सीईओ है.
अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उसने 2011 से 2024 (13 साल)तक ईरान को बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित न्यूक्लियर इक्विपमेंट्स मुहैया कराए हैं, जिससे परमाणु हथियार बनाने में मदद मिली है.
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए कमाई गई रकम में से कम से कम 125 करोड़ रुपये से अधिक है, जो अमेरिकी बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए. एजेंसियों का मानना है यह पैसा उन्हीं अवैध सौदों से कमाया गया था जो ईरान के साथ किए गए थे.
यूएई का माध्यम से ईरान के न्यूक्लियर एजेंसी को पहुंचाता था संवेदनशील सामान
अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, घोमी सीधे ईरान को सामान नहीं भेजता था. इसके बजाय वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में मौजूद बिचौलियों और कंपनियों का इस्तेमाल करता था.
घोमी ने अपने ईबे और पेपॉल खातों का उपयोग करके 400 से ज्यादा बार कंप्यूटर नेटवर्किंग उपकरण खरीदे और उन उपकरणों को यूएई भेजा गया और वहां से अलग-अलग माध्यमों से ईरान पहुंचाया गया.
जमशेद इसलिए ऐसा करता था ताकि अमेरिकी अधिकारियों को ये पता न चल पाए कि सामान को ईरान पहुंचाया जा रहा है.अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत बिना सरकारी इजाजत के ईरान के साथ अधिकांश व्यापारिक लेनदेन, खासकर सैन्य और न्यूक्लिर इंस्टीट्यूशंस से जुड़े सौदे करना गैरकानूनी है.
डीओजे का आरोप है कि साल 2017 से 2023 के बीच घोमी ने ईरान के न्यूक्लिर ऊर्जा संगठन (एईओआई) को अमेरिकी मूल के कंप्यूटर नेटवर्किंग इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराए.
आपको बता दें कि एईओआई ईरान के न्यूक्लिर कार्यक्रम की देखरेख करती है. अमेरिका ने 2020 में इस संगठन पर यूरेनियम एनरिचमेंट और स्टोर से जुड़े विवादों के कारण प्रतिबंध लगाए थे.
साल 2014 से 2022 तक जमशेद घोमी ने ईरानी रक्षा मंत्रालय और 2017 से 2023 के बीच ईरानी न्यूक्लियर एजेंसी को सामान सप्लाई किया.
पैसों की हेराफेरी के बाद एजेंसियों की नजर में आया घोमी
कम्प्यूटर हार्डवेयर बेचकर जमशेद की कंपनी ने सालाना 10 मिलियन डॉलर कमाए. लेकिन कंपनी ने अपने राजस्व में सिर्फ 20 हजार डॉलर की कमाई दिखाई. मई 2011 से अगस्त 2015 के बीच जमशेद को एस्क्रो खाते के माध्यम से विदेशी स्रोतों से 7 मिलियन डॉलर की राशि प्राप्त हुई. कहा जा रहा है कि ये पैसे ईरान ने भेजे थे.
इस अवैध काम से कमाए गए करोड़ों डॉलर को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, हांगकांग, तुर्की और यूएई के जरिए रूट करके अमेरिकी बैंक खातों में भेजा गया. अमेरिकी प्रशासन अब घोमी के $35 मिलियन (3.5 करोड़ डॉलर) के आलीशान न्यूपोर्ट बीच मैंशन को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुका है, जिसे कथित तौर पर इसी अवैध कमाई से बनाया गया था.
संघीय अभियोजक का कहना है कि उसकी सारी संपत्ति को सीज करने की तैयारी है ताकि सख्त सजा दिलाई जा सके.
इस पूरे मामले में अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा, “घोमी हमारे घोषित दुश्मनों की मदद कर रहा था और दुनिया के सबसे बड़े आतंकवाद के सरकारी स्पॉन्सर्स के साथ व्यापार कर रहा था.”

