नाटो से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मदद नहीं मिली, तो मुस्लिम देशों से ईरान युद्ध रोकने की गुहार लगा रहे हैं. तुर्किए, मिस्र और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका इस युद्ध रोकने की कोशिश कर रहा है. ईरान के प्रहार से कांप रहे खाड़ी देश लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बना रहे हैं तो होर्मुज की खाड़ी रोके जाने से अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था चरमरा गई है.
ऐसे में कहा जा रहा है कि आतंकियों को पनाह देने वाले इस्लामाबाद में गुपचुप तरीके से अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की जा सकती है. दरअसल इस्लामाबाद, तुर्किए, और मिस्र की मध्यस्थता में होने वाली इस बातचीत के दावे ने उस वक्त और जोर पकड़ लिया, जब पाकिस्तान के फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर से ट्रंप ने बातचीत की.
हालांकि व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान में युद्धविराम की चर्चा पर चुप्पी साध ली है. व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि बैठकों के बारे में अटकलों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए.
पाकिस्तान में बैठक पर क्या है व्हाइट हाउस का बयान
मिडिल ईस्ट में शांति वापस लाने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं. दावा किया जा रहा है कि इस हफ्ते इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बैठक हो सकती है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से जब पूछा कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, शांति मिशन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर इस हफ्ते इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे तो कैरोलिन ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने कहा, “ये संवेदनशील राजनयिक चर्चाएं हैं, और अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा. यह एक परिवर्तनशील स्थिति है, और बैठकों के बारे में अटकलों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि व्हाइट हाउस औपचारिक रूप से इसका ऐलान नहीं कर देता.”
ट्रंप ने की थी असीम मुनीर से बातचीत
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी तेहरान और वॉशिंगटन के बीच गुप्त रूप से बातचीत करवा रहे हैं. जंग शुरू होने के बाद से पीएम शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से कई बार बात की है. वहीं पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने ट्रंप से बात की है, और इस बातचीत के बाद एक बार फिर से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की है.
इस बातचीत को लेकर तुर्किए और मिस्र भी सक्रिय है. तुर्किए की ओर से जानकारी सामने आई है कि इस सप्ताह बातचीत के लिए एक डेलिगेशन इस्लामाबाद जाएगा. तुर्किए और मिस्र के विदेश मंत्री, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ संपर्क में हैं. माना जा रहा है कि अगर दोनों की शर्तें मान ली जाती हैं तो अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम हो सकता है. जिसके बाद खाड़ी देश भी चैन की सांस ले सकते हैं.
हम प्रभावी हमलों के माध्यम से करते हैं बातचीत: ईरान
ट्रंप ने दावा किया है कि अगले 05 दिनों तक ईरान के किसी ऊर्जा संयंत्रों पर अटैक नहीं करेगा. लेकिन ये ट्रंप का ये बयान सच होता नहीं दिख रहा. ईरान पर ताबड़तोड़ अटैक जारी हैं, तो ईरान भी लगातार पलटवार कर रहा है.
ईरान ने मंगलवार कोऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 78वीं वेव का ऐलान कर दिया है. आईआरजीसी इसमें इजरायल के शहरों और गल्फ में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों निशाना बना रहा है. आईआरजीसी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि “हम दुश्मन पर प्रभावी हमले के माध्यम से बातचीत करते हैं.”

