अक्टूबर 2023 से गाजा में हमास के साथ जंग और हिजबुल्ला-हूती और सीरियाई विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान के बाद ईरान के साथ पिछले एक महीने से जारी सैन्य संघर्ष से टूट चुके हैं इजरायली सैनिक. ये सच्चाई खुद स्वीकार की है इजरायली सेना प्रमुख ने.
इजरायली आर्मी चीफ एयाल जमीर का मानना है कि सैनिकों की भारी कमी से जूझ रही है इजरायली डिफेंस फोर्स और अगर जल्द से जल्द सुधार नहीं लाया गया तो सैनिकों का मनोबल टूट जाएगा.
जनरल एयाल जमीर का बड़ा बयान ऐसे वक्त में आया है, जब मिडिल ईस्ट में फ्रंट पर आईडीएफ खड़ी हुई है और अगर अमेरिकी सेना इस युद्ध से हाथ खींचती है, तो युद्ध का भार अकेले इजरायल पर पड़ेगा.
सुरक्षा कैबिनेट में इजरायली आर्मी चीफ ने किया खुलासा, बड़ी मांग की
पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाइयों के बीच जनरल एयाल जमीर ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में यह गंभीर चिंता जताई है कि उनके सैनिकों का मनोबल टूट रहा है. जनरल जमीर ने मंत्रियों से कहा, “मैं आपके सामने 10 बड़े खतरों की बात उठा रहा हूं. सेना की तैयारियों पर बहुत गंभीर खतरा मंडरा रहा है और तुरंत कानून बनाने की जरूरत है.”
जनरल जमीर ने चेतावनी दी, “आईडीएफ को अब भर्ती कानून, रिजर्व ड्यूटी कानून और अनिवार्य सेवा बढ़ाने वाले कानून की सख्त जरूरत है. अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो सेना जल्द ही सामान्य कामकाज भी नहीं कर पाएगी और रिजर्व सिस्टम भी टूट जाएगा.”
जनवरी महीने में भी आईडीएफ चीफ ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर वॉर्निंग दी थी कि सैनिकों की कमी जल्द ही सेना की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से यह समस्या और बढ़ गई है. अगर सुधार नहीं हुआ तो सेना कमजोर पड़ जाएगी.”
आईडीएफ पर मंडरा रहा खतरा
आईडीएफ चीफ के मुताबिक “अक्टूबर 2023 में हुए हमलों के बाद से सेना लगातार संसद को बता रही है कि उसके पास करीब 12000 सैनिकों की कमी है. लगातार बढ़ते ऑपरेशन्स के कारण यह दबाव और ज्यादा हो गया है. इस मुद्दे को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को सैनिक सेवा से अभी भी छूट दी जा रही है.”
दअसल इजरायल सेना से जुड़ा ये मुद्दा सैन्य सेवा को लेकर नागरिकों को दी गई छूट को लेकर हो रही राजनीतिक बहसों के कारण और भी जटिल हो गया है. इजरायल के अति-रूढ़िवादी राजनीतिक दल कई समुदायों को दी गई छूट बरकरार रखने के लिए कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “अभी 18 से 24 साल की उम्र के करीब 80,000 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवा सैनिक सेवा के योग्य हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक सेना ज्वाइन नहीं की है. ऐसे में सेना प्रमुख की यह चेतावनी इजरायल के लिए एक बड़े संकट का संकेत मानी जा रही है.”
गाजा, हिजबुल्ला, हूती और अब ईरान के खिलाफ जंग में उतरा इजरायल
इजरायली डिफेंस फोर्स यानि आईडीएफ दुनिया में एक मजबूत और हाईटेक सेना मानी जाती है. लेकिन पिछले तीन वर्षों से इजरायल लगातार एक के बाद एक सैन्य संघर्षों का हिस्सा बन रही है, जिसके कारण आईडीएफ में अस्थिरता का माहौल है. पहले गाजा में हमास के साथ आईडीएफ के सैनिकों ने मोर्चा संभाला, उसी दौरान लेबनान में हिजबुल्ला और यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी ऑपरेशन का हिस्सा बना.
पिछले साल जून में अमेरिका के साथ मिलकर इजरायली सेना ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया. तो अब पिछले एक महीने से अमेरिका-इजरायल की वायुसेना ईरान पर अटैक कर रही है, लेकिन ईरान के पलटवार से इजरायली सेना को भी भारी नुकसान हुआ है.

