अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहे यूरोप को टैरिफ की धमकी दें, या नाटो से अलग हो जाने की, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी नीति से बिलकुल टस से मस नहीं हुए हैं. जर्मनी और अमेरिका के बाद फ्रांस के साथ भी अमेरिका का मतभेद सामने आ चुका है.
मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट फ्रीडम में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया. अमेरिका ने यह पहल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए शुरू की है.
होर्मुज को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि यूरोप इस मुद्दे पर अमेरिका से अलग रणनीति अपनाएगा. मैक्रों ने सोमवार को कहा, यूरोप अपना स्वतंत्र सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है और अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी अस्पष्ट सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं बनेगा.
हम अपनी किस्मत अपने हाथ में ले रहे हैं: मैक्रों
पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रेंच प्रेसिडेंट के बीच कुछ खास नहीं बनती. आए दिन ट्रंप, मैक्रों का मजाक उड़ाते हैं और निजी जिंदगी पर भी सरेआम मसखरी करते रहते हैं. वहीं ईरान युद्ध में जिस तरह से यूरोप ने ट्रंप को अलग-थलग छोड़ दिया, उसके लिए भी ट्रंप, फ्रांस और ब्रिटेन को जिम्मेदार मानते हैं. बार-बार यूरोप को ट्रंप धमका रहे हैं.
लेकिन आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में आयोजित यूरोपीय पॉलिटिकल कम्युनिटी की 8वीं बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने एक बार फिर से ईरान के मोर्चे पर ट्रंप को खरी-खरी सुना दी है.
मैक्रों ने कहा, कि “यूरोपीय संघ अपनी सुरक्षा और रक्षा के लिए खुद समाधान बना रहा है. हम अपनी किस्मत अपने हाथ में ले रहे हैं और कॉमन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क विकसित कर रहे हैं.”
अमेरिका-ईरान संवाद के जरिए सुलझाए होर्मुज का मुद्दा: मैक्रों
इमैनुएल मैक्रों बोले, “हम ऐसी किसी पहल में हिस्सा नहीं लेंगे, जिसका ढांचा स्पष्ट न हो. फ्रांस किसी भी सैन्य ऑपरेशन में शामिल नहीं होगा, जबतक ऑपरेशन सहमति आधारित न हो.”
हालांकि फ्रांस ने जलमार्ग को फिर से खोलने के प्रयासों का समर्थन किया.
मैक्रों ने कहा कि “होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का सबसे स्थायी तरीका अमेरिका और ईरान के बीच समन्वित समझौता है. फ्री और बिना टोल के नेविगेशन को सुनिश्चित करने के लिए बातचीत को ही एकमात्र रास्ता है.”
मैक्रों ने लेबनान में सीजफायर का सम्मान करने की अहमियत पर भी जोर दिया और इजरायल से अपने वादे निभाने की अपील की है.
नाटो सदस्यों को अपनी जिम्मेदारियां बढ़ानी होंगी: काजा कल्लास
यूरोपीय संघ (ईयू) ने जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की प्रस्तावित वापसी के समय पर हैरानी जताई है. यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि “करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा अप्रत्याशित थी.”
यूरोपियन पोलिटिकल कम्युनिटी समिट में मीडिया से बातचीत के दौरान कल्लास ने कहा, “यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिक न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका के हितों की भी रक्षा करते हैं. मौजूदा हालात में यूरोप को नाटो सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां और बढ़ानी होंगी.”
होर्मुज पर यूरोप का मास्टर-प्लान, फ्रांस-ब्रिटेन की अगुवाई में नया गठबंधन
यूरोपीय देश अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक योजना तैयार कर रहे हैं. फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी समेत यूरोप होर्मुज की खाड़ी में बिना अमेरिकी दखलंदाजी के शिपिंग को सुरक्षित बनाने के एक मास्टरप्लान पर काम कर रहे हैं. इसके तहत लड़ाई समाप्त होने के बाद समुद्री मार्गों पर भरोसा बहाल करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाएगा.
ये गठबंधन फ्रेंच प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की अगुवाई में बनाया जाएगा. नए गठबंधन की चर्चा ऐसे वक्त में जोरों पर है जब फ्रांस-ब्रिटेन की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ये क्लियर कर दिया गया कि वो ट्रंप के नाकाबंदी वाले प्लान का हिस्सा नहीं होंगे.
यूरोपीय देश यह योजना होर्मुज स्ट्रेट से बिना अमेरिका के सीधे दखल के शिपिंग को सुरक्षित करने के लिए बना रहे हैं. ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को नया रूप दिया है.
आपको बता दें, ट्रांस-अटलांटिक अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच एक रणनीतिक, सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से विश्व व्यवस्था की आधारशिला माना जाता रहा है. लेकिन दुनिया में लगातार बढ़ते सैन्य संघर्ष और बदले वर्ल्ड ऑर्डर के बाद ब्रिटेन और फ्रांस की अगुवाई में एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत लड़ाई समाप्त होने के बाद समुद्री मार्गों पर भरोसा बहाल करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाएगा.
इस पहल में समुद्र में बिछी माइंस को हटाने के अभियान (माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन) और नौसेना की तैनाती जैसे कदम शामिल होंगे. और अमेरिका, इजरायल और ईरान जैसे सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल देशों को इस गठबंधन से बाहर रखा जाएगा.

