अनुशासनहीनता और भगोड़े करार दिए जाने वाले चार (04) पूर्व-सैनिकों के साथ राजधानी दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर भारतीय सेना ने आम आदमी पार्टी (आप) और आरजेडी के नेताओं को आड़े हाथों लिया है. भारतीय सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बर्खास्तगी की कहानियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने पर कड़ी आपत्ति जताई है.
भारतीय सेना के मुताबिक, ये चारों सैनिक अपनी सेवा शर्तों के बारे में झूठ फैला रहे हैं. ऐसे में इस तरह के भगोड़े करार दिए गए सैनिकों के झूठ के कारण, सेना के भीतर दरार पैदा करने के कोशिश की जा रही है और अधिकारी-जवानों में विभाजन करने की कोशिश है.
आप पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और आरजेडी के सांसद मनोझ झा ने दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में चार ऐसे सैनिकों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिन्हें तीन पूर्व सैनिकों को सेना से बर्खास्त किया गया था. एक सैनिक को सेना भगोड़ा करार दे चुकी है.
सेना ने इन चारों सैनिकों का चिट्ठा जारी कर कहा कि इन सभी की कोशिश है कि अपने गैर-सैन्य आचरण और इन पर चल रहे मामलों से ध्यान हटाकर अपनी बर्खास्तगी की कहानी को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है. जबकि हकीकत ये है कि इन चारों की बर्खास्तगी और भगोड़ा करार देने के पीछे नशे की हालत में सीनियर अधिकारियों की अवज्ञा आदि है.
सेना ने साफ किया कि इन चारों को किसी भी तरह से भारतीय सेना का प्रतिनिधि करार नहीं दिया जा सकता है. सेना के मुताबिक, इन चारों के बारे में सच्चाई इस प्रकार है:
1. चंदू चव्हाण – अनुशासनहीनता के कारण पांच रेड इंक एंट्री जमा होने के चलते 25 जुलाई 2024 को सेना से डिस्चार्ज किया गया. ये वही चंदू चव्हाण है, जो वर्ष 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान, एलओसी पार कर पाकिस्तान भाग खड़ा हुआ था. बाद में सैन्य और राजनियक प्रयासों से उसे पाकिस्तान से वापस लाया गया था.
2. हरेंद्र यादव – अनुशासनहीनता के कारण 27 जनवरी 2024 को सेना से बर्खास्त किया गया.
3. शंकर सिंह गुर्जर – नवंबर 2024 से सेना से भगोड़ा है.
4. पी नरेंदर – अनुशासनहीनता के कारण सेना से बर्खास्त किया गया.

