अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पूरा अमेरिकी प्रशासन जब इस असमंजस में है कि ईरान पर फिर से हमला किया जाए या नहीं. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ऐसा फैसला लिया है जिससे मिडिल-ईस्ट में फिर से जंग के हालात बन सकते हैं. क्योंकि ईरान का ये फैसला, अमेरिका को तिलमिलाकर रख देगा.
ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक नया नक्शा जारी कर अपना अधिकार क्षेत्र, फारस की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी के मुहाने तक करने का ऐलान कर दिया है. ओमान की खाड़ी में यूएस नेवी की बड़ी तैनाती है. अमेरिकी नौसेना के 02-02 एयरक्राफ्ट कैरियर और उनके सपोर्ट-युद्धपोत यहां तैनात हैं. यही वजह है कि अमेरिका को होर्मुज में ईरान का ये एक्शन नागवार गुजर रहा है.
फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक निगरानी क्षेत्र: ईरान
ईरान ने फारस की खाड़ी के मुहाने से लेकर ओमान की खाड़ी तक निगरानी-क्षेत्र बताकर अमेरिका के होश उड़ा दिए हैं. क्योंकि होर्मुज को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बड़ी धमकी दे चुके हैं, तो वहीं किसी भी वक्त सैन्य एक्शन लिया जा सकता है.
ऐसे में पीजीएसए के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट सीधे तौर से ईरान के अधिकार-क्षेत्र में पहले से है. लेकिन अब ईरान की नौसेना, ओमान की खाड़ी से लेकर फारस की खाड़ी के एक बड़े हिस्से को अपने निगरानी-क्षेत्र में लेने जा रहा है. ऐसे में इस बड़े हिस्से में मौजूद सभी कमर्शियल जहाज और ऑयल टैंकर से लेकर जंगी जहाजों को ईरान की नौसेना की इजाजत के बाद ही आवागमन करने दिया जाएगा.
ईरान ने जो ये नया निगरानी-क्षेत्र जारी किया है, इसमें ओमान की खाड़ी के दक्षिण में यूएई के फुजैराह बंदरगाह से लेकर ईरान के कोह-ए-मुबारक तक नई लाइन खींच दी गई है. फारस की खाड़ी में ईरान के केशम द्वीप से लेकर यूएई के उम्म-अल-कुवैन तक नई लाइन खींची गई है. इन दोनों लाइनों के बीच का पूरा इलाका, ईरानी नौसेना का नया निगरानी-क्षेत्र है.
पर्शियल गल्फ अथॉरिटी के इजाजत के बिना नहीं निकलेगा कोई जहाज
पीजीएसए के मुताबिक, इस क्षेत्र से गुजरने वाली सभी जहाजों को पहले पर्शियन गल्फ अथॉरिटी से परमिशन लेनी होगी, जिसके लिए पहले से एक ईमेल आईडी जारी की गई थी. परमिशन मिलने के बाद ही यहां से जहाजों को गुजरने दिया जाएगा.
28 फरवरी यानी जब से अमेरिका-ईरान जंग शुरू हुई थी, तब से होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान और अमेरिका ने नेवल ब्लॉकेड यानी नाकेबंदी कर रखी है. जंग शुरू होने के बाद से लेकर अब तक ईरानी नौसेना और ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी-नेवी) ने अलग-अलग देशों के 40 से भी ज्यादा ऑयल टैंकर और कॉमर्शियल जहाजों पर हमला किया है. इन हमलों में कई देशों के नाविकों की मौत भी हुई है. कुछ जहाज तो हमले के बाद समंदर में डूब गए हैं.
ठीक उसी तरह से युद्धविराम शुरु होने के बाद से यानी 8 अप्रैल के बाद से यूएस नेवी ने ओमान की खाड़ी में नाकेबंदी कर रखी है और अब तक आधा दर्जन से ज्यादा ईरानी जहाजों पर हमला कर चुकी है. ऐसे में फारस की खाड़ी से लेकर होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी तक दुनियाभर के जहाजों का आवागमन मुश्किल हो गया है.
हाल ही में ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली आए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने हालांकि, कहा था कि सभी देशों के कमर्शियल जहाजों को होर्मुज से निकलने की अनुमति है, बर्शते वे सभी ईरानी नौसेना के साथ सहयोग और समन्वय बनाकर रखें.

