यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के उनके सहयोगी और युद्ध में लगातार साथ खड़े रहने वाले देश पोलैंड ने ऐसा अपमान किया है, कि दो सहयोगी देशों में फूट पड़ गई है. पोलैंड ने जेलेंस्की से अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान वापस ले लिया है. राष्ट्रपति नवरोत्स्की ने घोषणा की कि जेलेंस्की से ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ सम्मान वापस लेने का फैसला लिया गया है.
पोलैंड के इस कदम से यूक्रेन बुरी तरह से चिढ़ गया है. यूक्रेन की ओर से कहा गया है कि पोलैंड का ये कदम केवल रूस को फायदा पहुंचाएगा, क्योंकि मॉस्को चाहता है कि यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों के बीच मतभेद बढ़ें.
बहरहाल यूक्रेन-पोलैंड के बीच ये विवाद एक सैन्य इकाई का नाम बदलने के बाद हुआ है. जेलेंस्की ने यूक्रेन की एक सैन्य इकाई का नाम ‘यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी’ (यूपीए) रखा है, जिसका पोलैंड ने विरोध किया है.
विवाद बढ़ने के बाद यूक्रेन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले अपने सरकारी सम्मान लौटाने की घोषणा कर दी है
पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान, जेलेंस्की से वापस लेने की घोषणा
पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोत्स्की ने कहा है कि उनका देश जेलेंस्की को दिया गया सम्मान वापस लेगा.
पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोत्स्की ने कहा है कि उनका देश जेलेंस्की को दिया गया सम्मान वापस लेगा. ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल सम्मान पूर्व पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने वर्ष 2023 में जेलेंस्की को यूक्रेन की सुरक्षा, मानवाधिकारों की रक्षा और रूस के खिलाफ संघर्ष में उनके योगदान के लिए दिया था.
हालांकि कैरोल नवरोत्स्की ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को पोलैंड का समर्थन कम हो जाएगा.
लेकिन जिस तरह से पोलैंड-यूक्रेन की बीच मतभेद सामने आए हैं, उसका फायदा रूस जरूर उठाने की कोशिश करेगा, क्योंकि ये फूट ऐसे वक्त में पड़ी है जब रूस अपने रिफाइनरी पर हुए यूक्रेनी हमले का बदला लेने की तैयारी में जुटा है.
क्या है पोलैंड-यूक्रेन के बीच विवाद की जड़
विवाद की जड़ मई में जारी वह आदेश है, जिसमें जेलेंस्की ने यूक्रेन की विशेष सैन्य बलों की एक इकाई का नाम यूपीए के नाम पर रखा था. यूपीए साल 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय संगठन था, जिस पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या के आरोप हैं.
राष्ट्रपति नवरोत्स्की ने कहा कि “पोलैंड के अधिकांश लोगों के लिए यूपीए एक ऐसा संगठन है, जो युद्धकाल में पोलिश नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराधों के लिए जिम्मेदार माना जाता है.सच्चाई पर कोई समझौता नहीं हो सकता. यूपीए द्वारा कम से कम 100,000 पोलिश नागरिकों की हत्या कर दी गई… केवल इसलिए कि वे पोलिश थे, यहूदी थे, या अन्य अल्पसंख्यक समूहों से संबंधित थे.”
पोलैंड का फैसला रूस के लिए गिफ्ट : यूक्रेन
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुडानोव ने पोलैंड के इस कदम को यूक्रेनी जनता के प्रति ‘अमित्र व्यवहार’ बताया है. किरिलो बुडानोव ने कहा, “पोलैंड का फैसला मॉस्को के लिए एक तोहफा है, जिसका इस्तेमाल रूस दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ाने के लिए करेगा.”
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी इसे पोलैंड के राष्ट्रपति की ‘रणनीतिक गलती’ बताया. वहीं पोलैंड में यूक्रेन के राजदूत वासिल बोदनार ने कहा कि “ऐसे समय में यह फैसला बेहद दुखद है, जब यूक्रेन लगातार रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है.”

