एक के बाद एक ऑयल रिफाइनरी पर हो रहे अटैक के बाद रुसी सेना ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए यूक्रेन के ड्रोन प्लांट्स को चुन-चुनकर तबाह करना शुरु कर दिया है. रूस ने पिछले कुछ दिनों में यूक्रेन की राजधानी कीव में लंबी दूरी के आत्मघाती ड्रोन बनाने वाली दो (02) फैसिलिटी पर हवाई हमले किए. इसके अलावा, बॉर्डर के करीब वाले उन इलाकों में भी हमले किए गए जिन्हें रूस पर ड्रोन लॉन्च करने की साइट्स के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था.
विवादास्पद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने किया कीव की ड्रोन फैसिलिटी का दौरा
जानकारी के मुताबिक, रूस के यूक्रेन के यूएवी प्लांट्स पर हमले ऐसे समय में हुए हैं जब एक दिन पहले अमेरिका के विवादास्पद सांसद लिंडसे ग्राहम ने कीव के एक ड्रोन प्लांट का दौरा किया था. इस प्लांट में भी लंबी दूरी के आत्मघाती ड्रोन बनाए जाते हैं. इसके अलावा रूस के शहीद-ड्रोन (ईरान वाले) को मार गिराने वाले इंटरसेप्टर भी इस प्लांट में तैयार किए जाते हैं.
वॉर-मोंगर यानी युद्ध-पिपासु माने जाने वाले लिंडसे ने जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान रूस पर अधिक पतिबंध लगाए जाने की मांग की थी.
कीव की 02 बड़ी यूएवी फैसिलिटी तबाह
रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रूस के हमले में कीव स्थित ‘एरोड्रोन कंपनी को निशाना बनाया गया. यह कंपनी भारी पेलोड ले जाने वाले और लंबी दूरी तक उड़ने वाले अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) यानी मानव रहित हवाई वाहन बनाती है, जिनमें ई-300 एंटरप्राइज़ और डी-80 डिस्कवरी मॉडल शामिल हैं.
रूसी सेना ने कीव के ‘फैनप्लिट’ प्लांट पर भी हमला किया, जो ‘फायर पॉइंट 2’ लंबी दूरी के ड्रोन बनाने और उन्हें स्टोर करने की जगह है.
पिछले एक महीने में रूस की 15 तेल रिफाइनरी बनी निशाना
पिछले एक महीने से यूक्रेन ने रूस की 15 से भी ज्यादा ऑयल रिफाइनरी और तेल डिपो पर ड्रोन अटैक कर पूरी दुनिया को हिला दिया था. इन हमलों में रूस की राजधानी मॉस्को के दो बड़े तेल डिपो और सेंट पीटर्सबर्ग का एक ऑयल स्टोरेज प्लांट भी शामिल था. इन हमलों के दौरान मॉस्को के आसमान में यूक्रेन के यूएवी को उड़ते हुए देखा जा सकता था. इन हमलों से रूस की सैन्य साख पर जबरदस्त बट्टा लगा था.
पिछले कुछ हफ्तों में यूक्रेन ने अपने यूएवी के जरिए रूस की राजधानी मॉस्को सहित कई बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इनमें शामिल हैं—
🔴 यूक्रेनी सेना ने दोनेत्सक इलाके में रूसी सैन्य प्रशिक्षण मैदान और बेलगोरोद व जपोरेजिया इलाकों में ड्रोन कंट्रोल पॉइंट पर हमले किए.
🔴 वोल्गोग्राद में टाइटन-बैरीकेडी — 27 जून को इस फ़ैसिलिटी पर हुए हमले में, जहां तोपखाने और मिसाइल उपकरण बनते है, 105 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ.
🔴 सेंट पीटर्सबर्ग में ऑयल टर्मिनल — 4 जुलाई को हुए हमले में आठ अलग-अलग टैंक, एक टेक्नोलॉजिकल पाइपलाइन ट्रेस्टल और अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त हुए.
🔴 यारोस्लाव में स्लावनेफ्ट-यानोस रिफाइनरी — 6 जुलाई को हुए हमले के दौरान, यूक्रेनी सेना ने AVT-6 यूनिट पर हमला किया और दो अन्य यूनिट की पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाया.
🔴 वोरोनिश इलाके में बोरिसोक्लेब्स्क एयरफ़ील्ड — यह हमला 8 जुलाई को हुआ। इसमें एविएशन केरोसिन वाले 28 टैंकों (कुल 1,600 मीट्रिक टन) में आग लग गई.
🔴 निज़नेकामस्क (तातारस्तान) में एक रिफाइनरी — 8 जुलाई को यूक्रेनी सेना ने डिलेड कोकिंग यूनिट पर हमला किया, जिसमें आग लग गई. केबल ट्रेस्टल, पाइपलाइन और तकनीकी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा.
🔴 क्रास्नोडार क्राई में इल्स्की ऑयल रिफाइनरी — इसी हफ्ते हुए हमले के कारण तेल प्रोसेस करने वाली दो यूनिट्स में आग लग गई. पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा.
रूस ने यूक्रेनी बंदरगाहों पर भी किए अटैक
यही वजह है कि रूस ने ग्राउंड अटैक के साथ-साथ यूक्रेन की ड्रोन फैसिलिटी पर हमले किए हैं. रूसी सेना, यूक्रेन के दोनेत्स्क में बचे हुए इलाकों को कब्जा करने में जुटी है. इसके अलावा, सुमी और खारकीव में रूसी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़कर यूक्रेन के गांवों और शहरों पर कब्जा कर रही है. लेकिन यूक्रेन के ड्रोन हमलों को देखते हुए रणनीति में थोड़ा बदलाव किया और दुश्मन के बंदरगाहों को भी निशाना बनाया जा रहा है.
रूसी सेना ने यूक्रेन के ओडेसा इलाके में चेर्नोमोर्स्क, युज़नी और इज़मेल बंदरगाहों पर भी हमले किए गए. रूसी रक्षा मंत्रालय ने इन बंदरगाहों को यूक्रेनी सेना की सप्लाई के लिए अहम लॉजिस्टिक्स केंद्र बताया था.
इज़मेल बंदरगाह पर हुए हमले के कारण फ्यूल डिपो, लोडिंग रैंप, फ्यूल पंपिंग स्टेशन, हथियार और सैन्य साजो-सामान रखने की जगहों के साथ-साथ बंदरगाह के इंफ्रास्ट्रक्चर कंट्रोल पॉइंट भी क्षतिग्रस्त हुए.
रूस के मुताबिक, युज़नी बंदरगाह पर हुए हमले में सैन्य सामान और फ्यूल टैंक रखने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं को नुकसान पहुंचा.
