भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अस्थायी सीट पर 2028-29 के कार्यकाल के लिए दावेदारी पेश की है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की दावेदारी की घोषणा करते हुए रणनीति शांति आधारित बताया.
जयशंकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि यूएन में भारत की रणनीति सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स ट्रस्ट एंड इंटीग्रिटी (शांति) के सिद्धांतों पर होगी.
विदेश मंत्री ने शांति कैंपेन के जरिए अधिक प्रतिनिधित्व वाली, प्रभावी और भविष्य के लिए तैयार वैश्विक व्यवस्था को भारत की सोच को समय की जरूरत बताया है.
आपको बता दें कि 2028-29 की अवधि के लिए इन्हीं अस्थाई सीटों के चुनाव अगले साल जून में होंगे. एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा.
दुनिया अस्थिरता का सामना कर रही, यूएन की भूमिका और अहम: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की अस्थाई सदस्यता के लिए अभियान की शुरुआत की है. भारत ने इस चुनाव को जीतने के लिए अपना कैंपेन शुरू किया है, जिसे शांति नाम दिया गया है. इस कैंपेन का पूरा नाम है- ‘शांति : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 2028-29 के लिए भारत-मानदंड, विश्वास और निष्ठा’ है.
जयशंकर ने इस मौके पर भारत की प्राथमिकताओं, शांति स्थापना के रिकॉर्ड और बहुपक्षवाद के प्रति देश की प्रतिबद्धता पर जोर दिया. विदेश मंत्री ने कहा कि “भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया बढ़ते संघर्ष और अस्थिरता का सामना कर रही है. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.”
सोशल मीडिया पोस्ट में जयशंकर ने लिखा, “भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्राथमिकता देगा. भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़नी चाहिए और उसे वैश्विक भविष्य तय करने में बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए.”
“भारत रिफॉर्म को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत है. भारत का दृष्टिकोण संवाद, सहयोग और मतभेदों को दूर करने पर आधारित रहेगा.”
वैश्विक व्यवस्था का सम्मान हो, नियमों का पालन किया जाए: जयशंकर
जयशंकर ने ‘शांति’ दृष्टिकोण को सामने रखा और इसे एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायसंगत दुनिया के लिए भारत के प्रयासों का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया.
जयशंकर ने कहा, “हाल के घटनाक्रमों ने दिखाया है कि शांति, प्रगति और समृद्धि को टुकड़ों में बनाए नहीं रखा जा सकता. दुनिया को समग्र प्रगति पर ध्यान देना चाहिए. यह यात्रा तभी प्रभावी हो सकती है जब वैश्विक व्यवस्था का सम्मान हो और नियमों का पालन किया जाए.
जयशंकर ने एक वीडियो के जरिए समझाने की कोशिश की कि, “दुनिया इस समय गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है. हम हिंसा और अस्थिरता के ऐसे स्तर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं. यह स्वाभाविक है कि सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय शांति में उसके योगदान के रिकॉर्ड का आकलन करेंगे. सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदगी से व्यापक विचार-विमर्श और हितों के तालमेल के माध्यम से इस महत्वपूर्ण संस्था के निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी.”
जयशंकर ने गिनाया शांति मिशन के लिए भारत का काम
जयशंकर ने बताया कि “भारत ने लगभग 50 शांति मिशनों में करीब 3,00,000 सैनिकों को तैनात किया है. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 11 सक्रिय मिशनों में से 10 में भारत के 4,300 सैनिक तैनात हैं. भारत बेहतर उपकरणों, तकनीक से लैस और वास्तविक जनादेश वाले शांति अभियानों की वकालत करना जारी रखेगा. भारत ‘महिलाएं, शांति और सुरक्षा’ के एजेंडे का भी समर्थन करता रहेगा.”
भारत ने अपनी प्राथमिकता गिनाते हुए कहा, आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस भविष्य के लिए तैयार शांति-रक्षा ढांचा बनाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए इंसान-केंद्रित नजरिए को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आजाद, खुले और नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करना और आतंकवाद व टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को तेज करना भारत की प्राथमिकता है.
अस्थाई सदस्य का चुनाव समझिए
अगर इसके लिए भारत चुना जाता है, तो वह सुरक्षा परिषद के 10 अस्थायी सदस्यों में शामिल हो जाएगा. ये सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं. सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं- चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका.
अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य करते हैं, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. भारत इससे पहले आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है.

