अमेरिकी-ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ ही मिडिल ईस्ट में युद्ध का एक और नया मोर्चा खुल गया है. यमन के हूतियों और सऊदी अरब के बीच जंग छिड़ गई है. यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइलें और ड्रोन हमले करके भारी नुकसान पहुंचाया है.
इससे पहले यमन की राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सऊदी लड़ाकू विमानों ने हवाई हमले किए थे. यह कार्रवाई हूती प्रतिनिधिमंडल को ले जा रहे ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए की गई.
यमन की सरकार के मुताबिक, हूती विद्रोही सना के हवाईअड्डे पर ईरानी विमान को लैंड कराने पर अड़े थे, इसलिए यह कार्रवाई की गई. हमले रियाद की सेना ने किए. इन हमलों के बाद यमन के सारे एयरपोर्ट्स को बंद कर दिया गया है.
हूती विद्रोहियों ने दागीं सऊदी अरब में मिसाइलें
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. ईरान समर्थित हूतियों ने इसे सना एयरपोर्ट पर हमले के जवाब में की गई कार्रवाई बताया है. हूतियों ने सऊदी एयरस्पेस से उड़ान न भरने की चेतावनी दी है.
हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने सऊदी अरब के खिलाफ हमलों पर बयान जारी किया है. याह्या सरी ने कहा, “सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल पर हवाई हमले के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और मानव रहित हवाई वाहनों (ड्रोन) का इस्तेमाल किया गया.”
सरी ने एक वीडियो बयान में एयरलाइंस को सऊदी हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने के खिलाफ चेतावनी दी. हूती प्रवक्ता ने कहा कि “जब तक सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगी नाकेबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक इन चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. इस आक्रामकता का जवाब दिया जाएगा और इसे बिना सजा के नहीं छोड़ा जाएगा.”
हूती प्रवक्ता ने बताया कि “इस हमले के बाद हूती प्रतिनिधिमंडल के विमान ने अपना रूट बदल लिया और होदेइदा हवाई अड्डे पर उतरा.”
सऊदी अरब सेना ने की थी हूतियों पर कार्रवाई
साल 2022 के बाद यमन की आधिकारिक सरकार और सऊदी अरब गठबंधन की ये पहली कार्रवाई थी. कई साल पहले हूती नियंत्रित इलाकों पर हमले देखे गए थे. हूती विद्रोहियों से लड़ाई के लिए एक गठबंधन बनाया है, जिसका नेतृत्व सऊदी अरब के पास है. सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने आखिरी बार हूती-नियंत्रित इलाकों को तब निशाना बनाया था जब 2022 में लड़ाई रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में समझौता लागू हुआ था.
यमन सरकार के रक्षा मंत्री जनरल ताहेर अल अकीली ने एक्स पर जानकारी दी कि “ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद यमन लौट रहे हूती प्रतिनिधिमंडल के विमान को हवाई अड्डे पर उतरने से रोकने के लिए ये हमले किए गए. ये प्रतिनिधिमंडल ईरानी विमान में सवार था. उसे यमन के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ को लेकर चेतावनी भी दी गई थी.”
यमन में वैधता बहाल करने वाले सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सऊदी वायु रक्षा प्रणालियों ने हूतियों द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को नाकाम कर दिया.
विमान के जरिए हथियारों की अदला-बदली की आशंका
10 दिन पहले ईरान की माहान एयर का विमान हूतियों के नियंत्रण वाले शहर सना पहुंचा था. माहान एयर ईरान की सेना आईआरजीसी से संबंधित है, जिसे अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया हुआ है.
सऊदी अरब हूतियों की ऐसी उड़ानों का विरोध करता आया है. सऊदी अरब को आशंका है कि ऐसी उड़ानों के जरिये ईरान हुतियों तक हथियार पहुंचा सकता है. जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.
ये पूरी दुनिया जानती है कि ईरान, हूतियों को संवेदनशील हथियार पहुंचाता रहा है, जिनके जरिए हूती, इजरायल को निशाना बनाते रहे हैं और अब जब ईरान-अमेरिका के बीच जंग दोबारा शुरु हो चुकी है, तो ईरान के प्रॉक्सी के तौर पर हूती भी अमेरिका और उसके मित्र देशों के खिलाफ मोर्च संभाले हुए है.
एमबीएस ने हूतियों पर हमले से पहले ट्रंप को बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को अपना समर्थन दिया है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति से मदद मांगी थी. ट्रंप ने इसके लिए अपना समर्थन दिया था.
पिछले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सऊदी राजदूत ने भी मुलाकात की थी. सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने भी रुबियो से बात की थी.
माना जा रहा है कि हूती-सऊदी अरब के बीच सैन्य तनाव कई दिनों तक रह सकता है, जिसके लिए अमेरिका के कूटनीतिक कदम की जरूरत पड़ेगी. लिहाजा सऊदी अरब लगातार अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकारियों ने हूतियों और सऊदी अरब के तनाव पर एक आपात बैठक की, जिसमें तनाव के और बढ़ने के जोखिम पर चिंता व्यक्त की गई.

