ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के लिए 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा गया है. ये इनाम इराकी संगठन ने रखा है, जो युद्ध के दौरान ईरान की मदद कर रहा है. इराकी संगठन ने कहा कि जिसने भी इराकियों का खून बहाया और उन्हें बेघर किया उसे सुकून से जीने नहीं देंगे.
इराक से अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या का इनाम ऐसे वक्त में घोषित किया गया है जब इसी सप्ताह इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने व्हाइट हाउस पहुंचकर ट्रंप से मुलाकात की है. जिसमें अमेरिका और इराक के बीच सैन्य संबंधों और आर्थिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करने पर चर्चा की गई थी.
ये वही अली अल जैदी हैं, जिन्होंने ट्रंप से मुलाकात से पहले दिवंगत ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के जनाजे में शामिल हुए थे और खामेनेई को श्रद्धांजलि दी थी.
अहंकारी ट्रंप को खत्म करो, इनाम लो: इस्लामी रजिस्टेंट संगठन
इराक के एक इस्लामी रजिस्टेंट संगठन ने ट्रंप को मारने के लिए इनाम की घोषणा की है. इराकी इस्लामी संगठन ने ट्रंप को अहंकारी और आक्रामक बताते हुए 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया है. इस्लामी रजिस्टेंट संगठन ने कहा, “ट्रंप ने हमारे नेताओं को निशाना बनाया, हमारे बच्चों को मारा, हमारे विद्वानों को, दुनिया के आजाद लोग उसे सुकून से जीने नहीं देंगे.”
संगठन ने बयान में कहा, “अमेरिकी प्रशासन की नैतिक गिरावट का सबसे बड़ा सबूत ये है कि अपराधी ट्रंप अपने अहंकार और आक्रामकता में शहीद कमांडरों हाजी कासिम सुलेमानी और हाजी अबू महदी अल-मुहंदिस को निशाना बना रहा है. इस नापाक कदम का जवाब प्रतिरोध ने सम्मान और गर्व के साथ दिया है और जीवन भर देता रहेगा.”
“अपराधी ट्रंप को हमसे शर्मिंदगी के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. हमलावरों के सिंहासनों को हिलाकर रख देंगे, जब तक कि अत्याचारी के किले ढह नहीं जाते.”
इराक से अमेरिकी सेना ने बोरिया-बिस्तर समेटा
ट्रंप के सिर पर इनाम की घोषणा के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. अमेरिका ने इराक से अपने सभी सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि “30 सितंबर 2026 तक इराक से अमेरिकी सेना की वापसी पूरी हो जाएगी”
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल जैदी ने ये संयुक्त घोषणा की है.
यह वापसी 2003 में शुरू हुए सैन्य मिशन के तकरीबन 23 वर्ष बाद की जा रही है.
वर्ष 2003 में सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने के लिए अमेरिकी सैनिकों ने इराक में कदम रखा था. बाद में, आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रभाव बढ़ने पर अमेरिकी सेना ने इराकी बलों की सहायता और प्रशिक्षण के लिए अपनी मौजूदगी बनाए रखी थीय इस मिशन के तहत इराक में लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिक तैनात थे. अब इन सैनिकों को अमेरिका वापस बुला रहा है.
ईरान के साथ चल रहे युद्ध के दौरान कई बार इराक में अमेरिकी सैन्य बेस पर भी टारगेट किया गया. ईरान के प्रॉक्सी संगठनों ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था.
लेकिन अब ईरान के साथ-साथ इराकी संगठन ने ट्रंप की हत्या की साजिश रची है, और हत्या के लिए इनाम की घोषणा की है, तो सीआईए हरकत में है. ट्रंप की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है.

