फीफा सेमीफाइनल मैच के दौरान अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के फॉकलैंड द्वीप समूहों के बैनर को लेकर सैन्य गतिविधि को लेकर हड़कंप मच गया है. अर्जेंटीना ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वॉरशिप एचएमएस मेडवे बिना अनुमति उसके समुद्री क्षेत्र में घुस आया.
अर्जेंटीना ने रॉयल नेवी के वॉरशिप को समुद्री क्षेत्र में आने को सैन्य घुसपैठ बताया है. अर्जेंटीना के विदेश मंत्री पाब्लो क्विर्नो के मुताबिक, अर्जेंटीना ने इस मामले में ब्रिटिश दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है.
वहीं ब्रिटेन ने अर्जेंटीना के आरोपों को खारिज कर दिया है. और कहा है कि उनके वॉरशिप की यात्रा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हुई.
दरअसल ये विवाद ऐसे वक्त में सामने आया है जब फुटबॉल के मैदान में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने पोस्टर लहराते हुए, विवादित फॉकलैंड द्वीप को अर्जेंटीना का बता दिया था. जिसे लेकर ब्रिटेन के कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
रॉयल नेवी के जहाज ने बढ़ाया तनाव
दरअसल चिली के एक बंदरगाह तक रूटीन यात्रा पूरी कर रहे रॉयल नेवी के हल्के हथियारों वाले ऑफशोर पेट्रोल जहाज ने ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है. एचएमएस मेडवे फॉकलैंड आइलैंड्स में रॉयल नेवी का स्थायी रूप से तैनात गार्ड जहाज रहा है; इसने कैरिबियन में कुछ समय बिताने के बाद एचएमएस फोर्थ को रिप्लेस किया था. इसका मुख्य काम क्षेत्रों की सुरक्षा, संप्रभुता की निगरानी और द्वीपों के आसपास समुद्री सुरक्षा प्रदान करना है.
चिली की नौसेना ने इस यात्रा को अंटार्कटिक मामलों पर मौजूदा द्विपक्षीय सहयोग के तहत एक लॉजिस्टिकल कॉल बताया है लेकिन अर्जेंटीना ने इसे समुद्री घुसपैठ और दादागीरी करार दिया है.
अर्जेंटीना के विदेश मंत्री पाब्लो क्विरनो ने ब्रिटिश दूतावास में औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराया है. और रॉयल नेवी के जहाज की यात्रा को गैर कानूनी बताते हुए कहा है कि ब्रिटेन ने 1990 के दशक की शुरुआत में आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए तय किए गए उपायों का उल्लंघन किया है.
अर्जेंटीना को युद्धपोत की जानकारी दी गई थी: ब्रिटेन
ब्रिटेन ने अर्जेंटीना पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. ब्रिटिश दूतावास ने अर्जेंटीना के सारे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा, “जहाज के चिली के लिए रवाना होने से पहले ही अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और जॉइंट चीफ्स ऑफ़ स्टाफ़ को इसकी जानकारी दे दी थी. खुद अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय ने शुरू में कहा था कि नौसेना ने समय रहते जहाज पर नजर रखी थी और तय द्विपक्षीय तरीकों से बातचीत हुई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे इस आवाजाही को ऐसा उल्लंघन नहीं मानते थे.”
फॉकलैंड पर अमेरिका ने ब्रिटिश अधिकार पर उठाए सवाल
2026 की शुरुआत में अमेरिकी सरकार का एक मेमो लीक हुआ था, जिसमें द्वीपों पर ब्रिटिश अधिकार पर सवाल उठाया गया था. जिसे लेकर खूब जुबानी जंग हुई थी. पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) का एक लीक आंतरिक मेमो सामने आया था, जिसमें सुझाव दिया गया था कि अमेरिका ईरान नीति पर ब्रिटेन के असहयोग के कारण फॉकलैंड द्वीपों पर ब्रिटेन के दावे की समीक्षा कर सकता है. हालांकि, ब्रिटेन ने तुरंत पलटवार करते हुए स्पष्ट किया कि फॉकलैंड की संप्रभुता ब्रिटेन के पास ही है.
इस मेमो के बाद 1982 के आक्रमण की बरसी पर, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर ने खुले तौर पर द्वीपों पर अपने देश के दावे को फिर से दोहराया. जिसके बाद से ब्रिटेन-अर्जेंटीना के बीच तनाव बढ़ गया था.
इंग्लैंड आक्रमणकारी और समुद्री लुटेरा है: अर्जेंटीना के उपराष्ट्रपति
ताजा विवाद फॉकलैंड के बैनर को लेकर है, जिसे अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने इंग्लैंड के खिलाफ स्टेडियम में लहराया था. मैच से पहले ही गहमागहमी शुरु हो गई थी. अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया वियारुएल ने इंग्लैंड को आक्रमणकारी और कब्जा करने वाले समुद्री लुटेरे तक कहा था.
मैच जीतने के बाद उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा,
“फॉकलैंड अर्जेंटीना का है. हमें स्टेडियम में यह बैनर ले जाने से रोका गया, लेकिन वे भूल गए कि माल्विनास (फॉकलैंड) हमारे खून और हमारे दिल में बसता है.”
हालांकि फुटबॉल टीम के कोच ने अपने खिलाड़ियों का बचाव किया था. अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कैलोनी ने मैच से पहले कहा था कि “यह सिर्फ एक फुटबॉल मैच है, हमें इसे राजनीति से नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि युद्ध का वह दौर इतिहास का एक बहुत दुखद हिस्सा था”

