मिडिल-ईस्ट जंग के 200 दिन पूरे होने पर अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के लारक आईलैंड पर बड़ा हमला बोला है. 30 जुलाई के बाद, अमेरिका का ईरान पर ये पहला हमला है. हमले में बड़ी संख्या में ईरानी सैनिकों के हताहत होने की खबर है. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिका के दो मिलिट्री बेस पर स्ट्राइक की है.
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने ड्रोन स्ट्राइक के जरिए ईरानी सेना को नुकसान पहुंचाया है. ये हमला रविवार-सोमवार की रात को उस वक्त किया गया, जब ईरानी सेना लारक द्वीप के करीब होर्मुज स्ट्रेट में लैंड माइंस (बारूदी सुरंग) बिछाने का काम कर रही थी. ईरान की अर्ध-सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले में दो (02) सैनिकों की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए हैं. हालांकि, अपुष्ट खबरों के मुताबिक, हताहत होने वाले सैनिकों की संख्या कई ज्यादा है. ईरानी सेना ने हमले को आक्रमण करार दिया है.
हमले के बाद अमेरिका की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बयान जारी कर कहा कि ईरान पर लिमिटेड प्रसेशियन स्ट्राइक की गई है ताकि होर्मुज स्ट्रेट में होने वाले खतरों से बचाया जा सके. सेंटकॉम के मुताबिक, ऐसा कर यूएस मिलिट्री ने होर्मुज स्ट्रेट इस्तेमाल करने वाले सामान्य नाविकों, कॉर्मशियल शिपिंग और फ्री कॉमर्स को ईरान से होने वाले खतरों को खत्म कर दिया है.
ट्रंप ने खर्ग आईलैंड पर एयर-स्ट्राइक का एआई वीडियो किया साझा
हमले के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एआई वीडियो डालकर सनसनी फैला दी. ट्रंप ने ईरान के खर्ग आईलैंड पर हवाई हमले का एक वीडियो साझा किया. खर्ग आईलैंड पर ईरान का सबसे बड़ा ऑयल टर्मिनल है. इसी टर्मिनल से ईरान का 80 प्रतिशत तेल, एक्सपोर्ट किया जाता है, जो मुख्यत चीन को भेजा जाता है.
आईआरजीसी का पलटवार, जॉर्डन और यूएई में शाहेद ड्रोन से हमला
अमेरिका के हमले के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने जॉर्डन में अमेरिका के दो (02) सैन्य ठिकानों, किंग हुसैन और अल-अज़राक पर शाहेद ड्रोन से हमला किया. इसके अलावा, आईआरजीसी ने यूएई में भी ड्रोन स्ट्राइक का दावा किया. आईआरजीसी ने अमेरिकी मिलिट्री बेस पर किए गए हमला का एक प्रोपेगेंडा वीडियो भी जारी किया. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का एक एमक्यू-9 ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया.
28 फरवरी को शुरु हुआ था अमेरिका-ईरान युद्ध, एमओयू को डाला ठंडे बस्ते में
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया था. हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित करीब 30 मिलिट्री कमांडर्स और ईरानी नेताओं की मौत हुई थी. हमले का जवाब देते हुए ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिका के एक दर्जन से भी ज्यादा मिलिट्री बेस पर हमला कर कड़ा जवाब दिया था. युद्ध का पहला चरण 40 दिन तक चला था. पाकिस्तान, कतर और ओमान सहित कई देशों की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए जून के महीने में एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे. लेकिन जुलाई के महीने में अमेरिका ने ईरान पर फिर जोरदार प्रहार किया था. अमेरिका का दावा था कि ईरान ने एमओयू का उल्लंघन करते हुए होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला था और कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था. युद्ध का दूसरा चरण करीब दो हफ्ते चला था.
एससीओ समिट से ठीक पहले हमला
रविवार की देर रात अमेरिका का हमला ऐसे समय में हुआ जब सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए अपना किर्गिस्तान दौरा शुरु किया. सोमवार से किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में तीन दिवसीय (31 अगस्त-2 सितंबर) एससीओ बैठक शुरु होने जा रही है. बैठक में पेजेश्कियान के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित मध्य एशियाई देशों के कई राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंच रहे है.
बिश्केक रवाना होने से पहले ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बयान जारी कर कहा कि “हम युद्ध नहीं चाहते हैं, लेकिन आक्रमणकारी (अमेरिका) को जोरदार जवाब देंगे.”

