अगले महीने चीन में दुनिया की तीन सुपर-पावर्स की एक बड़ी बैठक होने जा रही है. मौका होगा चीन के शेन्ज़ेन में एपीईसी बैठक को, जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हिस्सा लेने जा रहे हैं. माना जा रहा है कि तीनों राष्ट्राध्यक्ष, रुस-यूक्रेन युद्ध रोकने पर खास चर्चा करेंगे.
शी-ट्रंप-पुतिन की मीटिंग के लिए शेन्ज़ेन में सुरक्षा को लेकर बड़ी तैयारी शुरु हो गई है. रूसी राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार दिमित्री पेसकोव ने इस संभावित बैठक के पुष्टि की है. पिछले हफ्ते ट्रंप ने शेन्ज़ेन जाने का ऐलान किया था. साथ में एशियाई दौरे के दौरान उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से मुलाकात की भी घोषणा की थी. (ट्रंप की किम जोंग से मुलाकात, जेलेंस्की की लगाई आग बुझाने की कोशिश)
ट्रंप से जब पुतिन और शी जिनपिंग से साझा मुलाकात पर सवाल पूछा गया तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपनी स्वीकृति देते हुए कहा कि यूक्रेन जंग के साथ-साथ ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ पर बात हो सकती है.
हाल में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि दुनिया के साथ अपने संबंधों को अमेरिका नई दिशा देने की तैयारी कर रहा है.
पारंपरिक मित्रों से दूरी, चीन-रुस और उत्तर कोरिया से ट्रंप की नजदीकियां
हाल के महीनों में अमेरिका ने अपने यूरोप, नॉटो, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे पारंपरिक मित्र-देशों के बजाए चीन, रुस और उत्तर कोरिया जैसे देशों से संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है. ईरान जंग के दौरान, अमेरिका का साथ देने के लिए कोई भी यूरोपीय (नॉटो) देश साथ नहीं आया था. जापान और दक्षिण कोरिया ने भी मिडिल-ईस्ट जंग से दूरी बनाना बेहतर समझा था. ऐसे में ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है और अमेरिका की कूटनीति को नई दिशा देना शुरु कर दिया है.
हाल में ट्रंप ने सऊदी अरब को भी हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे तौर से मदद करने से इंकार कर दिया था. ऐसे में सऊदी अरब को पाकिस्तान और टर्की के साथ मक्का पैक्ट करना पड़ा है. यही वजह है कि अगले महीने शेन्ज़ेन में होने वाली एपीईसी बैठक बेहद अहम हो जाती है.
एपीईसी बैठक में हिस्सा लेंगे शी, ट्रंप और पुतिन
अगले महीने यानी 18-19 नवम्बर को शेन्ज़ेन में एशिया पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपीईसी) की अहम बैठक होने जा रही है. एपीईसी में चीन, अमेरिका और रूस सहित कुल 21 देश हैं. चीन के गुआंडोंग प्रांत स्थित शेन्ज़ेन एक अहम पोर्ट-सिटी है, जो हांगकांग के बेहद करीब है. एपीईसी बैठक के जरिए, चीन अपने पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को दुनिया के समक्ष पेश करने जा रहा है.
हांगकांग के बेहद करीब है चीन का शेन्ज़ेन शहर, सुरक्षा हुई कड़ी
शेन्ज़ेन को हॉन्गकॉन्ग से जोड़ने वाले हुआंगांग पोर्ट को खोल दिया गया है और शहर के एयरपोर्ट, रेलवे हब और बॉर्डर क्रॉसिंग को अपग्रेड किया जा रहा है.
शी, ट्रंप और पुतिन की सुरक्षा के लिए शेन्ज़ेन में अभी से तैयारी शुरु हो गई है. पूरे शहर को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित कर दिया गया है. शहर की करीब 600 सड़कों पर चीन की पुलिस एंटी-ड्रोन यूनिट्स से तैनात की जा रही हैं. माना जा रहा है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में चीन के सुरक्षाबलों को महज तीन मिनट का रिस्पांस टाइम दिया गया है.
शी जिनपिंग के आदेश पर चीनी पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शेन्ज़ेन की सड़कों को स्ट्रीट-क्राइम से पूरी तरह मुक्त करा दिया जाए. सब-वे (मेट्रो ट्रेन) में यात्रियों की चेकिंग शुरु कर दी गई है और जगह-जगह स्पेशल पैट्रोल-टीम तैनात की गई हैं. समिट के दौरान (18-19 नवम्बर) शेन्ज़ेन शहर के नागरिकों से वर्क फॉर्म होम का आह्वान किया गया है.

