स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए शुरु हुए विरोध-प्रदर्शन और दंगों की आग ने पूरे फ्रांस को अपनी चपेट में ले लिया है. पांच लाख से ज्यादा शरणार्थी और घुसपैठिए, फ्रांस की राजधानी पेरिस और मार्शले, लियोन सहित आधा दर्जन से ज्यादा शहरों में हिंसा, आगजनी और लूटपाट कर रहे हैं. हिंसक प्रदर्शनों को रोकने वाले करीब एक हजार (1000) पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक कह दिया है कि फ्रांस ने अगर अपने बॉर्डर बंद नहीं किए और स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया तो बहुत देर हो जाएगी. ट्रंप ने साफ तौर से लिखा कि फ्रांस इज बर्निंग और इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने दूसरे देशों से आए घुसपैठियों और गैर-कानूनी शरणार्थियों को जिम्मेदार ठहराया है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा कि दिलों में नफरत भरकर लाए दूसरी दुनिया के आप्रवासी नागरिकों ने इस महान देश (फ्रांस) को तहस-नहस कर दिया है.
एप्पल और लुइस वियोटन जैसे लग्जरी ब्रांड के स्टोर्स बने लूटपाट का शिकार
पिछले कई दिनों से राजधानी फ्रांस सहित मार्शेल और लियोन सहित आधा दर्जन से ज्यादा शहरों में हिंसा, आगजनी, लूटपाट और पुलिसिया कार्रवाई जारी है. अब तक करीब ढाई हजार (2400) लोगों को गिरफ्तार किया गया है. चेहरों पर नकाब और सिर पर कैप लगाए उपद्रवी, पेरिस के बड़े-बड़े शोरूम और स्टोर्स में लूटपाट कर रहे हैं, जिनमें एप्पल और लुइस वियोटन जैसे महंगे ब्रांड वाले स्टोर भी शामिल हैं.
डियोर जैसे कुछ महंगे स्टोर्स ने फ्रेंच पुलिस पर भरोसा ना जताते हुए प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स को सुरक्षा में लगाया है ताकि लूटपाट और हिंसा से बचा जा सके.
गाज़ा और फिलिस्तीन से जुड़े हैं दंगई, एफिल टॉवर पर किया कब्जा
रिटेल स्टोर में खाने-पीने के सामान तक लूट लिए गए हैं. इन स्टोर्स में महज पोर्क (सूअर के मीट) के अलावा सब कुछ लूट लिया गया है, जिससे साफ है कि उपद्रवी इस्लाम धर्म के अनुयायी हैं. दुनियाभर में अपने बर्गर के लिए प्रसिद्ध मैकडोनल्ड में लूटपाट की गई, लेकिन उससे सटी हलाल मीट की शॉप को जरा भी नहीं छुआ गया. शहरों की सड़कें, फिलिस्तीन और गाज़ा से जुड़े झंडे और नारे से पटी पड़ी हैं.
जानकारी के मुताबिक, अधिकतर उन स्टोर्स को निशाना बनाया गया है जो यहूदी धर्म से जुड़े हैं. उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ियों और स्ट्रीट पर खड़ी कारों को आग के हवाले कर दिया और जमकर तोड़-फोड़ की है. यहां तक की उपद्रवियों ने एफिल टॉवर पर चढ़कर फिलिस्तीन का झंडा लहरा दिया.
पिछले 7-8 सालों से पेरिस सहित फ्रांस के अलग-अलग शहरों में कई बड़े हिंसक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. लेकिन इस बार आग पूरे फ्रांस में फैल चुकी है.
महंगे स्टोर्स के साथ-साथ उपद्रवियों ने फ्रांस की संस्कृति से जुड़ी धरोहरों तक को नहीं बख्शा है और आग के हवाले कर दिया है. इनमें लिमोजेस का 150 साल पुराना टाउन हॉल भी है, जो दो-दो विश्वयुद्ध की मार में भी तबाह होने से बच गया था. लेकिन रविवार को हिंसक भीड़ ने इस टाउन हॉल को आग के हवाले कर दिया.
स्कूलों में टीचर्स की कमी से शुरु हुआ आंदोलन किया कट्टरपंथियों ने हाईजैक
फ्रांस के स्कूलों में अध्यापकों की कमी और मूल-भूत सुविधाओं के अभाव के चलते हालिया विरोध-प्रदर्शन शुरु हुए थे. लेकिन इस आंदोलन को मंहगाई का विरोध कर रहे वामपंथी और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हाईजैक कर लिया है.
पिछले कुछ दशक में यूरोप के दूसरे देशों की तरह फ्रांस में भी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के देशों से आए सैकड़ों शरणार्थी और घुसपैठियों ने अपना घर बना लिया है. इनमें गाज़ा से विस्थापित होने वाले फिलीस्तिनी भी हैं. ऐसे में समय-समय पर फ्रांस में जब भी विरोध-प्रदर्शन होते हैं, सड़कों पर जमकर आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट देखने को मिलती है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश की मीडिया को दिए संबोधन में कहा कि दंगाइयों को उनके अपराधों की सजा जरूर मिलेगी. जानकार, हालांकि मैक्रों की घुसपैठियों के प्रति लचर नीतियों को फ्रांस के जलने का बड़ा कारण मानते हैं.
खबर है कि फ्रांस की तरह इटली के फैशल-कैपिटल माने जाने वाले शहर मिलान में भी शरणार्थियों ने शहरों की सड़कों पर लूटपाट और तोड़फोड़ शुरु कर दी है.


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