नए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी है, जिनमें विजय, आत्मनिर्भरता, युक्ति और सेना के बाकी दो अंगों के साथ समन्वय और संयुक्तता शामिल है.
रविवार को कार्यभार संभालने के बाद, देश के 29वें वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद गार्ड ऑफ ऑनर लिया. इसके बाद मीडिया को दिए अपने संक्षिप्त बयान में एयर चीफ ने भारतीय वायुसेना के लिए अपना दृष्टिकोण और प्राथमिकताएं स्पष्ट की.
एयर चीफ मार्शल ने ‘वायु’ (वीएवाईयू) नाम से एक मार्गदर्शक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसके चार प्रमुख स्तंभ भारतीय वायुसेना की भविष्य की दिशा तय करेंगे.
वी – सतर्कता, विजय एवं तत्परता: सभी वायुसेना इकाइयों में परिचालन तैयारियों का उच्चतम स्तर बनाए रखना और युद्ध क्षमता को निर्धारित मानकों के अनुरूप बहाल करना.
ए – आत्मनिर्भरता: विमान, संवेदक, हथियार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देना। इसका मुख्य उद्देश्य परिचालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना तथा निरंतर युद्ध क्षमता बनाए रखना है.
वाई – युक्ति: युद्ध सिद्धांतों, प्रौद्योगिकी और परिचालन प्रक्रियाओं में दूरदर्शिता व नवाचार को अपनानाइ. समें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कमान एवं नियंत्रण प्रणाली, ड्रोन रोधी क्षमताएं, परिचालन में लचीलापन व उभरते हुए युद्ध क्षेत्र शामिल हैं.
यू – प्रयासों में एकजुटता: राष्ट्रीय दृष्टिकोण ‘जय’ यानी संयुक्तता, आत्मनिर्भरता एवं नवाचार के अनुरूप थलसेना, नौसेना और विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय व संयुक्त कार्यक्षमता को और मजबूत करना.
‘वायु’ दृष्टिकोण के माध्यम से वायुसेना प्रमुख ने ऐसी भारतीय वायुसेना के निर्माण की स्पष्ट दिशा तय की है, जो हर परिस्थिति में परिचालन के लिए तैयार, तकनीकी रूप से उन्नत, आत्मनिर्भर और बेहतर समन्वय से युक्त हो. यह वायुसेना अपनी सशक्त वायु शक्ति के माध्यम से राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और संभावित संघर्षों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है.
खुद 3500 घंटे फ्लाइंग का अनुभव है वायुसेना प्रमुख को
एयर चीफ मार्शल दीक्षित को एक परीक्षण पायलट और योग्य उड़ान प्रशिक्षक के रूप में 3500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है. उन्होंने कई महत्वपूर्ण परिचालन और रणनीतिक पदों पर कार्य किया है. इनमें मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ में प्रमुखों की स्टाफ समिति के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख (सीआईएससी), केंद्रीय वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और वायुसेना के उप प्रमुख जैसे पद शामिल हैं.
घटती स्क्वाड्रन और थिएटर कमांड बनाना है वायुसेना प्रमुख की चुनौतियां
नए वायुसेना प्रमुख के समक्ष अपने कार्यकाल के दौरान जिन चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा उनमे फाइटर जेट्स की घटती स्क्वाड्रन और थिएटर कमांड बनाने शामिल हैं.
भारतीय वायुसेना की फाइटर स्क्वाड्रन आज 30 से भी कम रह गई हैं. जबकि चीन और पाकिस्तान, दोनों से टू-फ्रंट (मोर्चों) निबटने के लिए 40 से ज्यादा की जरुरत है. इसके लिए स्वदेशी एलसीए तेजस प्रोजेक्ट और एमआरएफ (मीडियम रेंज फाइटर एयरक्राफ्ट) को रफ्तार देना के अलावा जल्द से जल्द किसी स्टील्थ फाइटर जेट का वायुसेना के बेड़े में शामिल होना शामिल है.


Leave feedback about this