असम में जो पुलिस पहले केवल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तक सीमित थी, आज वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही है. पहले असम को दंगों की आग में झोंककर अशांति बनाये रखी गयी थी, लेकिन मोदी सरकार में यहां शांति स्थापित हुई और विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ यहां बड़े उद्योग लग रहे हैं. ये कहना है गृह मंत्री अमित शाह का.
शनिवार को गृह मंत्री असम के डेरगांव में में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी का लोकार्पण कर रहे थे. इस दौरान गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में असम अब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.
अगले पांच वर्षों में एकेडमी बनेगी नंबर वन
डेरगांव में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी के लोकार्पण के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि अगले 5 वर्षों में देशभर की पुलिस अकादमियों में लचित बोरफुकन पुलिस अकादमी प्रथम स्थान पर होगी.
शाह ने कहा कि “असम के इस वीर सपूत के बारे में पूरे देश की जनता जाने और उनसे प्रेरणा प्राप्त करे, ऐसा काम असम सरकार ने किया है.” उन्होंने कहा कि लचित बोरफुकन पुलिस एकेडमी के रूप में आज जो बीज बोया गया है एक दिन वह बहुत बड़ा ‘वटवृक्ष’ बन पूरे देश की पुलिसिंग को छाया देगा. गृह मंत्री ने कहा कि यह एकेडमी न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की पुलिसिंग के लिए काशी के समान एक ‘तीर्थ’ बनेगी और यहीं से शांति की एक नई शुरुआत होगी.
अमित शाह ने कहा कि लचित बोरफुकन अकादमी का पहला चरण 167 करोड़ खर्च की लागत से पूरा किया गया है और तीनों चरणों पर कुल 1050 करोड़ रुपए खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि इस अकादमी में कई प्रकार की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और यह अकादमी पूरे भारत की सबसे अच्छी पुलिस अकादमी बनेगी.
गृह मंत्री ने कहा कि “पहले असम की पुलिस अन्य राज्यों में ट्रेनिंग के लिए जाती थी, लेकिन पिछले 8 साल में राज्य के शासन में ऐसा परिवर्तन हुआ कि अब इस पुलिस अकादमी में गोवा और मणिपुर के 2 हज़ार पुलिसकर्मियों ने ट्रेनिंग ली है.”
कौन थे लचित बोरफुकन
गृह मंत्री ने कहा कि असम के वीर सेनानी और सपूत लचित बोरफुकन (1622-1675) ने असम को मुगलों के खिलाफ विजय दिलाई थी. उन्होंने कहा कि महान योद्धा लचित बोरफुकन को सिर्फ असम तक सीमित रखा गया था लेकिन आज उनकी जीवनी 23 भाषाओं में देशभर के पुस्तकालयों में बच्चों के लिए उपलब्ध है.
अमित शाह ने गिनवाए पिछले दस साल के शांति समझौते
गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 10 साल में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में कई शांति समझौते हुए हैं. इनमें वर्ष 2020 में असम-बोड़ोलैंड समझौता, 2021 में कार्बी आंगलोंग समझौता, 2022 में आदिवासी शांति समझौता, 2023 में उल्फा, असम मेघालय और असम-अरुणाचल समझौते हुए.
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा किए गए इन शांति समझौतों के कारण 10 हज़ार से ज़्यादा युवा हथियार डालकर मेनस्ट्रीम में आए हैं. उन्होंने कहा कि जिस असम में एक जमाने में आंदोलन, उग्रवाद और गोलीबारी की चर्चा होती थी वहां आज सबसे आधुनिक 27 हज़ार करोड़ रूपए की लागत वाली सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री लगने का काम हो चुका है.