अमेरिका जैसे सुपरपावर के खिलाफ ईरान के शहीद ड्रोन ने मिडिल-ईस्ट की जंग का रूख बदल दिया. ठीक वैसे जैसे पिछले चार साल से ड्रोन की ताकत के जरिए यूक्रेन जैसे देश ने मिलिट्री सुपरपावर माने जाने वाले रूस को बांधकर रखा है. लेकिन इन दोनों युद्ध के बीच एक बड़ा सवाल, ड्रोन वॉरफेयर के लिए क्या और कैसी है भारत की तैयारी.
ये सवाल इसलिए, क्योंकि भारत का जनरल-ड्रोन रिटायर हो गया है. नाम है जनरल उपेंद्र द्विवेदी. मंगलवार को अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का रिटायरमेंट हो गया.
जनरल द्विवेदी का कार्यकाल पिछले साल यानी मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ छेड़े गए ऑपरेशन सिंदूर के लिए जाना जाएगा. साथ में भारतीय सेना यानी थलसेना में एक पूरी ड्रोन फोर्स खड़ी करने के लिए जाना जाएगा. थलसेना प्रमुख के तौर पर अपने समापन संबोधन में भी जनरल द्विवेदी ने इस बात का खास तौर से जिक्र किया.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने खड़ी की ड्रोन-फोर्स
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने सिचायिन ग्लेशियर से लेकर जम्मू कश्मीर और पंजाब से लेकर राजस्थान और गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक 1000 ड्रोन से हमला किया. लेकिन भारतीय सेना की एंटी-एयरक्राफ्ट गन और काउंटर ड्रोन सिस्टम ने इस हमले को नाकाम कर दिया. लेकिन ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने अपनी ड्रोन फोर्स खड़ी करने का संकल्प लिया. शुरूआत हुई अशनी प्लाटून और भैरव बटालियन से. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहले कारगिल विजय दिवस के मौके पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इन ड्रोन फोर्स की घोषणा की थी.
अशनी प्लाटून से हुई शुरूआत
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के ड्रोन अटैक के बाद भारतीय सेना ने सभी इन्फैंट्री बटालियन में एक खास ड्रोन प्लाटून बनाकर खड़ी कर दी. महज कुछ हफ्तों के भीतर भारतीय सेना ने अपनी इस खास ‘अश्नि’ (अशनी) प्लाटून को दुनिया के सामने पेश कर दिया. खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान सीमा के करीब जैसलमेर में इस खास ड्रोन प्लाटून का उद्घाटन किया.
पौराणिक इतिहास में ‘अश्नि’ को देवराज इंद्र का हथियार माना जाता है, जिसे वज्र के नाम से भी जाना जाता है. भारतीय सेना की अश्नि प्लाटून में 20 सैनिक हैं, जिन्हें एफपीवी से लेकर सर्विलांस ड्रोन और स्वार्म ड्रोन सहित लोएटरिंग म्युनिशन में ट्रेनिंग दी गई है. ये सेना की हरेक इन्फ्रेंटी बटालियन का हिस्सा हैं. भारतीय सेना की इस समय में करीब-करीब 380 इन्फेंट्री बटालियन हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान एफपीवी यानी फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन का जमकर इस्तेमाल किया गया है. ये ड्रोन, सर्विलांस के साथ ही हैंड ग्रेनेड तक ले जाने में सक्षम हैं.यूक्रेन ने इन एफपीबी ड्रोन से रूस के सैनिकों को चुन-चुनकर मारा है. ये कम दूरी पर दुश्मन को टारगेट करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. यानी जब दुश्मन के साथ आमने सामने की जंग हो.
लंबी दूरी के कामीकाजी ड्रोन की दरकार
स्वार्म ड्रोन, कई छोटे ड्रोन का एक झुंड है जो दुश्मन के सैनिकों के बड़े दल सहित टैंक या फिर गाड़ियों के काफिले पर हमला बोल सकता है. लोएटरिंग म्युनिशन में ड्रोन को हाई एक्सप्लोसिव बम से लैस किया जाता है. ये कामकाजी ड्रोन की तरह अपने लक्ष्य पर जाकर तबाह हो जाता है और दुश्मन को जबरदस्त नुकसान पहुंचाता है. ये ईरान के शहीद ड्रोन जैसे होते हैं, जो डेढ़ से दो हजार किलोमीटर तक वार करते हैं. इन ड्रोन ने अमेरिका, इजरायल और दूसरे खाड़ी देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और जंग का रूख बदल दिया.
भारतीय सेना के जखीरे में 50 हजार ड्रोन
भारतीय सेना के जखीरे में आज 50 हजार एफपीबी और स्वार्म ड्रोन हैं. लेकिन भारतीय सेना को अभी भी कामकाजी ड्रोन की कमी खल रही है. कुछ स्वदेशी कंपनियों ने ईरान के शहीद ड्रोन जैसे लोएटरिंग म्युनिशन बनाने का दावा जरूर किया है. लेकिन अमेरिका-ईरान जंग को देखते हुए भारत को ऐसे आत्मघाती ड्रोन की बड़ी संख्या में जरूरत है.
शक्तिबाण और शौर्य स्क्वाड्रन भी तैयार
अशनी प्लाटून के साथ भारतीय सेना ने शक्तिबाण यूनिट बनाकर तैयार कर ली हैं. ये ड्रोन यूनिट, भारतीय सेना की आर्टलरी यानी तोपखाने के साथ अटैच हैं. इनकी संख्या 15-20 हैं और इन्हें स्वार्म ड्रोन और लोएटरिंग म्युनिशन और लंबी दूरी के यूएवी ऑपरेट करने के लिए खड़ा किया गया है.
तोपखाने के अलावा आर्मर्ड यानी टैंक रेजीमेंट के लिए भी सेना ने शौर्य स्क्वाड्रन तैयार की हैं. ये इसलिए क्योंकि, रूस यूक्रेन युद्ध में टैंक, आईसीवी और मिलिट्री व्हीक्लस को बड़ी संख्या में ड्रोन से अटैक कर तबाह किया गया. ऐसे में जंग के मैदान में खतरों को भांपकर सेना के टैंक और दूसरे मैकेनाइज्ड कॉलम दुश्मन के सीने पर वार कर सकेंगे.
भैरव कमांडो भी ड्रोन ऑपरेट करने में निपुण
अशनी, शक्तिबाण और शौर्य के अलावा सेना की डिवीजन स्तर पर जो खास भैरव बटालियन तैयार की गई हैं, उसमें तैनात हर कमांडो को ड्रोन ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है.
सबसे नए ड्रोन यूनिट है, बाज
क्योंकि भारतीय सेना के पास इस समय करीब 50 हजार ड्रोन हैं और आने वाले 2-3 साल में ये संख्या लगभग डबल यानी एक लाख हो जाएगी. ऐसे में एफपीबी, लोएटरिंग म्युनिशन, स्वार्म ड्रोन या रिमोटलैस पायलट एयरक्राफ्ट के इंटीग्रेशन के लिए सेना ने एक नई बाज बटालियन खड़ी करना का फैसला किया है. ये सेना की ड्रोन से जुड़ी सबसे नई यूनिट है. ये सभी यूनिट ड्रोन अटैक से जुड़ी हैं यानी जब भारत को दुश्मन देश पर ड्रोन अटैक करना है. इसके अलावा दुश्मन के ड्रोन को काउंटर करने के लिए भी भारतीय सेना, स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर ऐसी तकनीक ईजाद कर रही हैं.

