ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार मनाए जा रहे गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष सेरेमोनियल के बजाए कॉम्बैट परेड देखने को मिलेगी. पहली बार 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर सेना के तीनों अंग यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना के मार्चिंग दस्ते पारंपरिक गियर के बजाए लड़ाकू भूमिका में दर्शाए जाएंगे.
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना की व्यूह-रचना दिखाई पड़ेगी. इसके लिए सेना के खास भैरव बटालियन और अलग-अलग स्कॉउट्स के सैनिकों से लेकर टैंक, तोप, रॉकेट और मिसाइल इस तरह से कर्तव्य पथ पर दिखाई पडेंगे, जैसा किसी जंग के मैदान में इस्तेमाल किया जाता है.
61 कैवलरी भी दिखेगी लड़ाकू रूप में
परेड में शामिल सेना की कैवलरी यानी घुड़सवार टुकड़ी भी पहली बार कॉम्बैट वेशभूषा में दिखाई पड़ेगी. इसके अलावा, सेना के मार्चिंग दस्ते और हथियार भी शामिल किए गए हैं, जिन्होनें ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लिया था. इनमें ड्रोन वॉरफेयर और एयर डिफेंस की मिसाइल शामिल हैं.
शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय सेना के दिल्ली एरिया के चीफ ऑफ स्टाफ, मेजर जनरल नवराज ढिल्लन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परेड के कॉम्बेट फोर्मेट की जानकारी साझा की. इस दौरान परेड में शामिल मार्चिंग दस्तों के कमांडर भी मौजूद थे.
ड्रोन-शक्ति से लेकर एमआरसैम मिसाइल को प्रदर्शन
मीडिया से खास बातचीत में ड्रोन और एयर डिफेंस से जुड़े मार्चिंग कमांडर्स ने बताया कि किस तरह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी यूनिट्स ने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने बताया कि किस तरह इस वर्ष परेड में बेहद खास ग्लास की एक खास बस को शामिल किया गया है, जो ड्रोन बनाने और रिपयेर करने का चलता-फिरता वर्कशॉप है. जंग की परिस्थिति में इस बस को रणभूमि में ले जाया जाएगा ताकि सैनिकों के ड्रोन की रिपेयर के साथ नए ड्रोन भी तैयार किए जा सकें.
सेना के अधिकारियों ने बताया कि आकाश और एमआरसैम (मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल) को परेड में शामिल किया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश मिसाइल ने पाकिस्तान के ड्रोन को मार गिराया था. एमआरसैम ने सिरसा एयरबेस के करीब पाकिस्तान की फतेह मिसाइल को आसमान में मार गिराया था.
कैप्टन साजिया ने बताया कि किस तरह ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक खास झांकी को परेड का हिस्सा बनाया गया है. साथ में पहली बार, कर्तव्य पथ पर टी-90 और अर्जुन टैंक को प्रदर्शित किया जाएगा.
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड (26 जनवरी) में यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और कमिश्नर उर्सला वेन डेर लेयन मुख्य अतिथि हैं. ऐसे में परेड में यूरोपीय संघ के नौसैनिकों की एक टुकड़ी भी मार्च पास्ट करती आएगी. परेड में कुल 6050 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं.
रणभूमि की व्यूह रचना दिखाई देगी कर्तव्य पथ पर
इस वर्ष परेड को एक नए बैटल-अरे (रणभूमि व्यूह रचना) फॉर्मेट में दर्शाया जाएगा. सेना की ये व्यूह रचना ठीक वैसी होगी जैसाकि जंग के मैदान में दिखाई पड़ती है. सबसे पहले स्कॉउट्स की टुकड़ी होगी और फिर इन्फेंट्री तथा मैकेनाइज्ड और आर्मर्ड. इसके अलावा आर्टलरी यानी स्वदेशी अटैग (अमोघ) तोप भी कर्तव्य पथ पर मार्च करती दिखाई देंगी.
इस वर्ष परेड का मुख्य थीम, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 गौरवशाली वर्ष होने के साथ आत्मनिर्भर भारत भी है, ऐसे में परेड में अधिकांश हथियार और सैन्य उपकरण भी स्वदेशी नजर आएंगे. इनमें ब्रह्मोस, आकाश और एमआरसैम (मीडियम रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल) के अलावा सुखोई,सी-295, लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) इत्यादि शामिल हैं.
परेड में राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के झांकियों में भी वंदे मातरम–स्वतंत्रता का मंत्र और समृद्धि का मंत्र–आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई देगी.
कर्तव्य पथ की परेड में सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी वंदे मातरम मुख्य थीम रहेगा, जिसमें 2500 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं. इस थीम का संगीत मशूहर संगीतकार एम एम कीरवानी ने दिया है. इस थीम की कमेंटरी की जिम्मेदारी बालीवुड अभिनेता अनुपम खेर को दी गई है.

