ईरान की लाइफलाइन पर हुआ है भीषण हमला. इजरायल ने तेहरान और करज में तेल भंडारण केंद्रों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए. पिछले एक सप्ताह के दौरान युद्ध में पहली बार इजरायल ने ईरान के तेल डिपो और ऊर्जा स्त्रोत पर बमबारी की है.
दक्षिण तेहरान और उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित शहरान तेल डिपो पर मिसाइलें गिराई गईं. धमाके की आवाज करज तक सुनाई दी. इस अटैक के बाद तेल पाइप में आग लग गई. आग की लपटों से ईरान की राजधानी तेहरान घिर गई. कई किलोमीटर दूर-दूर तक आग और काला धुआं देखा गया.
इजरायली सेना की इस बमबारी से ईरान का जबर्दस्त नुकसान हुआ है. जो वीडियो सामने आए हैं, वो भयावह हैं. आईडीएऱ ने कहा है कि उन्होंने उन ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया है जिनका उपयोग ईरानी सशस्त्र बल कर रहे थे.
तेहरान की मुख्य रिफाइनरी पर इजरायल का हवाई हमला, धू धू जला शहर
आईडीएफ ने ईरान की ऊर्जा संयत्रों और रिफाइनरियों पर हमला शुरु कर दिया है. हमलों की चपेट में तेहरान के पास स्थित ‘शहर-ए-रे’ जिले की मुख्य रिफाइनरी और अल्बोर्ज प्रांत के कई ऑयल डिपो भी आए हैं. पिछले एक हफ्ते से जारी संघर्ष में यह पहली बार है जब ईरांन की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने के इरादे से इजरायल ने ऊर्जा ठिकानों पर बम गिराए हैं. आईडीएफ ने करज और शहरान तेल डिपो को भी तबाह कर दिया है. बताया जा रहा है कि ये अटैक इतना जोरदार था कि तेहरान के उन जगहों पर भी आग लग गई जहां-जहां तेल पाइप लाइन थी.
इससे पहले इजरायल ने यमन में भी बड़े ऑयल डिपो और रिहायशी इमारतों को टारगेट किया था. ये हमले तब हुए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्रुथ सोशल पोस्ट में चेतावनी दी थी कि और भी ईरानी अधिकारी निशाने पर होंगे, ईरान पर कयामत की रात होने वाली है.
ईरान का पलटवार, हाइफा की रिफाइनरी पर अटैक
तेहरान की तेल रिफाइनरी पर हमलों को एक्ट ऑफ वॉर कहा है, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि तेहरान फैसिलिटी पर हमले के जवाब में इजरायल के हाइफ़ा में एक रिफाइनरी पर हमला किया है. यह हमला हाइफा बे स्थित बाजान ग्रुप की रिफाइनरी पर किया गया. इसे इजरायल की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि यह हमला ‘खैबर शेकन’ सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइलों से किया गया. ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई हाल ही में ईरान के तेल डिपो और ऊर्जा ढांचे पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में की गई है.
ईरान ने जिस रिफाइनरी पर मिसाइल दागी, उससे इजरायल की कुल घरेलू ईंधन की करीब 50 से 60 प्रतिशत आपूर्ति की जाती है. इसलिए इस पर हमला इजरायल की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इससे पहले जून 2025 में भी ईरान के मिसाइल हमले में इस रिफाइनरी को नुकसान हुआ था, जिसमें तीन कर्मचारियों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे.
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रही मौत
एक हफ्ते पहले युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 290 से ज़्यादा और इज़रायल में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं. ईरान के पलटवार में अमेरिकी सैनिकों की भी क्षति हुई है. मिडिल ईस्ट के देशों में ईरान लगातार मिसाइलें बरसा रहा है. ईरान का कहना है कि ये मिसाइलें अमेरिकी सैन्य बेस पर दागी जा रही हैं. वहीं युद्ध समाप्त न होने पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है. कहा है कि ये संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए, नहीं तो अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

