अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यूएसएड बंद होने के दौरान ये आरोप लगा था कि विदेश फंडिंग के बल पर न सिर्फ भारत बल्कि बांग्लादेश में भी सत्ता पलट की साजिश रची गई थी. अब ये आरोप साबित होता दिख रहा है. क्योंकि शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले नेताओं ने बिटकॉइन के जरिए बड़ा निवेश किया है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण वो छात्र नेता नाहिद इस्लाम है, जिसने सड़कों पर विद्रोह मचाया, मोहम्मद यूनुस सरकार में सलाहकार का पद संभाला और अब इस्तीफा देकर पॉलिटिकल पार्टी बनाई.
बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले नाहिद इस्लाम ने बिटकॉइन में 147 करोड़ का निवेश किया है. सिर्फ नाहिद ही नहीं बल्कि एक और नेता सरजिस आलम ने भी 65 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया है.
देश बचाने का नारा लगाने वालों के इन्वेस्टमेंट का खुलासा, इन नेताओं ने किया करोड़ों का निवेश
बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे मनीलॉन्ड्रिंग के जरिए विदेशी फंडिंग की भूमिका सामने आई है. शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले नेताओं ने बड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग का शक है.
नाहिद इस्लाम, 147 करोड़ का निवेश
अंतरिम सरकार में आईटी एडवाइजरी और एडीएसएम कोऑर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने 204.64 बिटकॉइन का निवेश किया है, जिसकी कीमत 17.14 मिलियन डॉलर (147 करोड़ रुपये) है.
सरजिस आलम, 65 करोड़ का निवेश
एडीएसएम नेता और ‘जातीय नागरिक कमेटी’ के संस्थापक सरजिस आलम ने 7.65 मिलियन डॉलर (65 करोड़ रुपये) क्रिप्टोकरेंसी टेथर में निवेश किए.
शफीकुल आलम, 86 करोड़ का निवेश
अंतरिम सरकार के प्रेस सचिव और पत्रकार शफीकुल आलम के पास 93.06 बिटकॉइन हैं. इसकी कीमत 10 मिलियन डॉलर यानी 86 करोड़ रुपए है.
खान तलत महमूद रफी, 8.60 करोड़ का निवेश
सीटीजी विश्वविद्यालय से जुड़े एडीएसएम नेता महमूद रफी ने 11.094 बिटकॉइन का निवेश किया जिसकी कीमत 1 मिलियन डॉलर (8.60 करोड़ रुपये) है.
इस निवेश ने पैसों के स्रोत पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, क्योंकि सभी लोग एक बेहद ही साधारण परिवार से आते हैं. इसके अलावा कई और छात्र नेताओं ने भी निवेश किया है, जिसके बाद आरोप लगाए जा रहे हैं कि विदेशी फंडिंग से मिले पैसों को इन नेताओं ने निवेश किया है.
मनी लॉन्ड्रिंग से हुआ शेख हसीना का तख्तापलट, छात्र नेताओं को पैसे मिलने के बाद आंदोलन हुआ शांत
खुलासा हुआ है कि बांग्लादेश में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को विदेशी धन से वित्त पोषित किया गया था, जिसके बाद ही बांग्लादेश में तख्तापलट को अंजाम दिया गया. कहने के लिए आरक्षण के मुद्दे पर शेख हसीना सरकार के खिलाफ बांग्लादेश में आंदोलन शुरु किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से छात्रों के हक में फैसला आने के बावजूद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ. बल्कि आंदोलन जानबूझकर किया जाने वाला लगने लगा.
चुन-चुनकर आवामी पार्टी के लोगों को निशाना बनाया जा रहा था, इसके अलावा हिंदुओं पर भी अटैक किया गया. इमारतों में आग लगाई गई और दुकानों और सड़कों पर तोड़फोड़ की गई. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगा दी थी, बावजूद इसके छात्र शांत नहीं हुए. लेकिन शेख हसीना सरकार के पतन के बाद आंदोलन शांत हो गया और बांग्लादेश का नेतृत्व छात्र नेताओं के पसंदीदा मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं.
शेख हसीना ने पिछले साल शुरुआत में ही जताई थी आशंका
शेख हसीना ने पिछले साल मई (तख्तापलट से पहले) में ही आशंका जताई थी कि “अमेरिका को सेंट मार्टिन द्वीप नहीं सौंपने के कारण उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा. अमेरिका चाहता था कि सेंट मार्टिन द्वीप के जरिए बंगाल की खाड़ी में अपना दबदबा बना सके. पर वो अमेरिका के सामने नहीं झुकी. शेख हसीना ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि व्हाइट-मैन बांग्लादेश में एयरबेस बनाना चाहता है और बदले में व्हाइट-मैन ने उनकी (शेख हसीना) की चुनाव में मदद करने की पेशकश की थी.
शेख हसीना ने बताया था कि “एक गोरा विदेशी शख्स (व्हाइट-मैन) उनके पास एक प्रपोजल लेकर आया था. कि अगर मैं उस देश को बांग्लादेश में एयरबेस बनाने की अनुमति देती, तो मुझे कोई समस्या नहीं होती पर वे एक देश बनाना चाहते हैं, लेकिन उनकी सोच कहीं आगे की है. मैं जानती हूं कि वे कहां जाने का इरादा रखते हैं. मैं जानती हूं कि मैंने ऑफर नहीं माना इसलिए ही हमारी अवामी लीग पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार हमेशा संकट में रहती है. मैं देश का कोई हिस्सा किराए पर लेकर या किसी को सौंपकर सत्ता में नहीं आना चाहती. मुझे कोई अन्य देश और सत्ता की जरूरत नहीं है.”
मई में शेख हसीना की आशंका 3 महीने बाद सच साबित हुई. आवामी लीग पार्टी पर ऐसा संकट मंडराया कि उन्हें बांग्लादेश को आनन फानन में छोड़कर भागना पड़ा.
यूएसएड के जरिए रची गई थी साजिश, ट्रंप प्रशासन में खुला राज
सत्ता में आने के बाद ट्रंप प्रशासन ने यूएसएड पर चाबुक चलाया, उन्होंने भारत, बांग्लादेश, नेपाल, समेत कई देशों को मिलने वाले पैसों पर रोक लगा दी. ट्रंप ने खुद खुलासा किया था कि एड के नाम पर इन पैसों से भारत के चुनावों में दखलअंदाजी की गई थी. साथ ही बांग्लादेश के नाम पर भी खुलासा हुआ था कि वहां डीपस्टेट के कारण ही अस्थिरता पैदा हुई थी. डीप स्टेट के सबसे बड़े खिलाड़ी जॉर्ज सोरोस के बेटे ने भी मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की है. अगर सभी बातों की कड़ियों को जोड़ा जाए तो ये बाद जल्दी हजम नहीं होने वाली है कि आखिर आंदोलन करने वाले छात्र नेताओं ने इतना बड़ा निवेश किसके बल पर किया है?