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विकास यादव Rogue Agent, दस्तावेज से खुलासा !

भारतीय रॉ एजेंट विकास यादव वाकई में एक रौग-एलिमेंट (उदंडी) है इसका सबूत एक कैट ऑर्डर की कॉपी से सामने आया है. हालांकि, ये ऑर्डर की फुल कॉपी नहीं है लेकिन एक बात पक्की है कि विकास यादव ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) यानी कैट का दरवाजा रॉ से वापस सीआरपीएफ भेजे जाने के खिलाफ खटखटाया था. ये वही वक्त था जब दिल्ली पुलिस विकास यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही थी.

कैट की कॉपी से ये भी पता चलता है कि विकास यादव ने वर्ष 2015 में बतौर सीनियर फील्ड ऑफिसर (एसएफओ) के तौर पर देश की सबसे बड़ी इंटेलिजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड डब्लू) यानी रॉ ज्वाइन की थी. रॉ में बहुतायत में अधिकारी दूसरी सुरक्षा एजेंसियों से ही डेप्यूटेशन पर आते हैं. इनमें से बहुत से अधिकारी हमेशा के लिए रॉ में ही अपनी सेवाएं देते हैं और कुछ को वापस पैरेंट कैडर भेज दिया जाता है. जैसा कि विकास यादव के साथ हुआ. टीएफए मीडिया के पास ये कैट की कॉपी है. हालांकि, इस कॉपी की सत्यता साबित नहीं हुई है. 

मूल रूप से रेवाड़ी का रहने वाले विकास यादव का राजधानी दिल्ली का पता भी दिया है जो सरकारी अधिकारी की कॉलोनी है. इस कॉपी से पिता के नाम का भी पता चलता है, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) में कार्यरत थे.

कैट कॉपी को देखकर ये भी पता चलता है कि विकास यादव रॉ की एविएशन रिसर्च सेंटर (एआरसी) में कार्यरत था. अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन) ने विकास की जो आर्मी की यूनिफॉर्म में तस्वीर साझा की है, उसमें पैरा-ट्रूपर का बैज लगा है. सेना (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) में जो सैनिक आसमान से पैरा-जंप लगाने में पारंगत होते हैं, उन्हें ये बेहद ही खास बैज दिया जाता है. ऐसे में माना जा सकता है कि विकास यादव भी एआरसी का हिस्सा था. (https://x.com/neeraj_rajput/status/1847913696510484847)

विकास यादव एक रौग-एजेंट था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2023 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (एंटी टेरर स्क्वाड) ने विकास यादव के खिलाफ राजधानी के रोहिणी इलाके के एक आईटी कंपनी के मालिक से उगाही और डराने-धमकाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया था. (बम धमाके से दहला CRPF स्कूल, एजेंट विकास से कनेक्शन ?)

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर विकास यादव इस आईटी कंपनी को प्रताड़ित कर रहा था.

नवंबर यानी गिरफ्तारी से कुछ दिनों पहले ही विकास यादव ने कैट में अपनी एक अपील दर्ज की थी. इस कॉपी को देखकर ऐसा लगता है कि विकास यादव इस बात से नाखुश था कि रॉ से से वापस सीआरपीएफ वापस भेजा जा रहा था.

गिरफ्तार होने के बाद सीआरपीएफ ने विकास यादव को महकमे से बर्खास्त कर दिया था. हालांकि, स्पेशल सेल की चार्जशीट दायर होने के बाद विकास यादव को कोर्ट से जमानत मिल गई थी और उसके बाद से उसके बारे में कुछ ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है.

अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने 10 अक्टूबर को  विकास यादव को मोस्ट-वांटेड घोषित किया था. हालांकि, एफबीआई ने भारत से विकास यादव के प्रत्यर्पण की मांग नहीं की है लेकिन अगर ऐसी मांग आती भी है तो इसमें कानूनी पचड़ा पड़ सकता है. क्योंकि जब तक भारत में चल रहा मामला कोर्ट में लंबित है ऐसा होना मुश्किल है.

एफबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, विकास यादव ने ही चेक गणराज्य में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या करने का आदेश दिया था. पन्नू की हत्या को व्रिकम यादव ने प्राथमिकता करार दिया था.

विक्रम ने ही निखिल गुप्ता को पन्नू के न्यूयॉर्क के घर का पता दिया था. पिछले साल जून (2023) में अमेरिका के टिप-ऑफ पर यूरोपीय देश चेक गणराज्य ने निखिल गुप्ता उर्फ निक को पन्नू की हत्या की कोशिश की सुपारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

अमेरिका का दावा है कि जिस शख्स को निखिल गुप्ता ने पन्नू की सुपारी दी थी वो और कोई नहीं यूएस ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी (डीएई) का ही एक सोर्स था. इस सोर्स ने डीएई के एक अधिकारी को हिटमैन के तौर पर निखिल गुप्ता से मुलाकात कराई थी. एफबीआई के पास इस लेनदेन का स्टिंग ऑपरेशन भी है. (विकास यादव: Most-Wanted या देश का हीरो)

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