चीन के साथ भले ही डिसएंगेजमेंट हो चुका है लेकिन दुश्मन पर इतनी जल्दी विश्वास नहीं किया जा सकता है. वो ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ है और टू-फ्रंट वार एक हकीकत है. ये कहना है थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का.
शनिवार को जनरल द्विवेदी राजधानी दिल्ली में एक शिखर सम्मेलन में सवालों के जवाब दे रहे थे. इसी दौरान थलसेना प्रमुख से सवाल पूछा गया कि क्या अब (डिसएंगेजमेंट समझौते के बाद) क्या चीन पर ‘भरोसा’ किया जा सकता है. जनरल द्विवेदी ने साफ तौर से कहा कि अगर आप चीन को दुश्मन मानते है कि तो बिल्कुल नहीं.
थलसेना प्रमुख ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा कि “हम पड़ोसियों (चीन और पाकिस्तान) को बदल नहीं सकते हैं. ऐसे में दुश्मन के साथ ही रहना होगा.” जनरल द्विवेदी ने बताया कि हाल के दिनों में दोनों देशों की तरफ से ऐसी कोशिशें जरूर हुई है जिससे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव जरूर कम हुआ है.
चीन-पाकिस्तान का गठजोड़, टू-फ्रंट वार हकीकत है
टू-फ्रंट यानी चीन और पाकिस्तान से साझा चुनौती पर सेनाध्यक्ष ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच में ‘गठजोड़’ है. वर्चुयल डोमेन में तो ये गठजोड़ 100 प्रतिशत है. ऐसे में, जनरल द्विवेदी ने कहा कि टू-फ्रंट वार एक ‘हकीकत’ है
कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं में कमी लेकिन पुंछ-राजौरी में बढ़ी
थलसेना प्रमुख ने बताया कि पिछले साल कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं में 83 प्रतिशत की कमी आई. साथ ही घाटी में स्थानीय आतंकियों की रिक्रूटमेंट महज 2-3 रह गई है. जनरल द्विवेदी के मुताबिक, पिछले साल कश्मीर में मारे गए आतंकियों में 60 प्रतिशत पाकिस्तानी थे.
सेनाध्यक्ष के मुताबिक, पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद में कोई कमी नहीं आई है. पुंछ-राजौरी इलाकों में आतंकी घटनाओं की जानकारी देते हुए जनरल द्विवेदी ने आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) को हटाने पर सहमति नहीं दी.
पीओके पर क्या कहा जनरल द्विवेदी ने
पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के बारे में जनरल द्विवेदी ने कहा कि 1994 के संसद प्रस्ताव में साफ लिखा है कि पीओके भी जम्मू कश्मीर का हिस्सा है. ऐसे में सरकार की तरफ से जो भी निर्देश दिया जाएगा, सेना उसके लिए हमेशा तैयार रहेगी.