ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदले समीकरण के चलते देश के रक्षा बजट में दोगुनी वृद्धि होने जा रही है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, आगामी रक्षा बजट में 20 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है. पिछले कई वर्षों से रक्षा बजट में हर वर्ष करीब 10 प्रतिशत की बढोत्तरी होती रही है.
फिक्की के एक कार्यक्रम में रक्षा सचिव ने कहा कि जिस तरह के हमारे पड़ोस में हालत हैं, उसे देखते हुए रक्षा बजट बढ़ाए जाने की जरूरत है. इस वर्ष (2025-26) देश का रक्षा बजट करीब 6.81 लाख करोड़ था, जो 2024-25 के मुकाबले 9.53 प्रतिशत ज्यादा था. इसमें से 1.80 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्च यानी सशस्त्र सेनाओं के हथियार और आधुनिकीकरण के लिए रखा गया था. इसमें से 75 प्रतिशत यानी 1.05 करोड़ स्वदेशी हथियारों के लिए निर्धारित किए गए थे. (https://x.com/ANI/status/1994358958782312661?s=20)
इस वर्ष 50 प्रतिशत रक्षा बजट हो चुका खर्च
माना जा रहा है कि पूंजीगत खर्च को आगामी डिफेंस बजट में 20 प्रतिशत किया जा सकता है. दरअसल,ऑपरेशन सिंदूर के महज पांच महीने के भीतर रक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष के डिफेंस बजट का 50 प्रतिशत से भी ज्यादा हथियारों और दूसरे सैन्य उपकरणों पर खर्च कर लिया है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सितंबर महीने तक करीब 93 हजार करोड़ (92,211,768.40) उपयोग हो चुके हैं.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 50 प्रतिशत से अधिक पूंजीगत परिव्यय के उपयोग से आगामी वर्ष में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक एयरक्राफ्ट, युद्धपोत, पनडुब्बी, हथियार प्रणाली आदि जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी. अधिकांश व्यय विमानों और हवाई इंजनों पर हुआ है. इसके बाद थल सेना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण, आयुध और प्रक्षेपास्त्रों पर व्यय किया गया है.
2024-25 में पूंजीगत व्यय का 100 प्रतिशत हुआ था खर्च
पिछले वित्त वर्ष में रक्षा मंत्रालय ने 1.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का 100 प्रतिशत उपयोग किया था.
रक्षा क्षेत्र के लिए पूंजीगत व्यय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नई परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, अनुसंधान एवं विकास, और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक विकास के लिए धन मुहैया कराता है, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं. इसके अलावा, पूंजीगत व्यय का आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर गुणात्मक प्रभाव पड़ता है.
पिछले कई वर्षों में सेना के तीनों अंगों के लिए पूंजीगत परिव्यय के अंतर्गत आवंटन में वृद्धि का रुझान रहा है. पिछले पांच वर्षों के दौरान इसमें लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

