ऑपरेशन सिंदूर का असर डिफेंस बजट पर भी दिखा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी करते हुए इस वर्ष (2026-27) रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ कर दिया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है. सेना के हथियारों और आधुनिकीकरण के लिए कैपिटल बजट (पूंजीगत व्यय) भी 22 परसेंट बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ करने की घोषणा की गई है.
पिछले कुछ वर्षों की भांति, इस बार भी संसद में पेश किए गए बजट के दौरान, वित्त मंत्री ने डिफेंस बजट का जिक्र नहीं किया. लेकिन बजट में रक्षा मंत्रालय को कुल 7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया. पूरे बजट में रक्षा बजट का कुल हिस्सा करीब 13 प्रतिशत है.
22 प्रतिशत बढ़ा कैपिटल बजट, खरीदें जाएंगे आधुनिक हथियारों और सैन्य साजो सामान
पिछले वर्ष (2025-26 में) रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ था. बीते एक दशक से रक्षा बजट में हर वर्ष 9.10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी जा रही थी. लेकिन, इस वर्ष रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद, सेनाओं (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) के हथियारों और दूसरे सैन्य उपकरणों के खर्चों में बढ़ावा हुआ है. ऐसे में कैपिटल बजट में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी जरूरी है. यही वजह है कि वित्त मंत्री ने पूंजीगत व्यय में करीब 22 परसेंट की बढ़ोतरी की है.
पिछले वर्ष, कैपिटल बजट करीब 1.80 लाख करोड़ था. यानी इस वर्ष सेनाओं को हथियारों और दूसरे सैन्य साजो सामान के लिए करीब 40 हजार करोड़ अतिरिक्त दिए गए हैं. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस कैपिटल बजट से सेनाओं के लिए आधुनिक और घातक हथियार, नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट, युद्धपोत, पनडुब्बियों और ड्रोन इत्यादि खरीदे जाएंगे.
उल्लेखनीय है कि हाल में रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए फ्रांस की मदद से देश में बनने वाले 114 मेक इन इंडिया रफाल (राफेल) फाइटर जेट को मंजूरी दी है. साथ में, नौसेना के लिए जर्मनी की मदद से छह स्वदेशी स्टील्थ पनडुब्बियों को भी हरी झंडी मिल सकती है.
स्वदेशी हथियारों के लिए रखे गए 2.61 लाख करोड़
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कैपिटल बजट 2.61 लाख करोड़ में से 1.39 लाख करोड़ यानी करीब 75 प्रतिशत, स्वदेशी हथियारों (और कंपनियों) के लिए रिजर्व रखे गए हैं. (https://x.com/SpokespersonMoD/status/2017874621094035508?s=20)
रिसर्च एंड डेवलपमेंट और राजस्व खर्च भी बढ़ाया
रक्षा बजट में कैपिटल बजट के अलावा रेवेन्यू बजट (राजस्व बजट), पूर्व फौजियों की पेंशन, बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) इत्यादि के लिए भी अलग से आवंटन किया गया है.
राजस्व बजट: 3.66 लाख करोड़ (कुल बजट का 45.76 प्रतिशत) जिसमें, सैनिकों की सैलरी, राशन, तेल और हथियारों का रखरखाव शामिल है.
डिफेंस पेंशन: 1.71 लाख करोड़
सिविल डिफेंस: 28 हजार करोड़
डिफेंस आरएंडडी: 29 हजार करोड़
बीआरओ का कैपिटल बजट—-7394 करोड़ (सीमावर्ती इलाकों में सड़क, ब्रिज, टनल और दूसरे डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए)

