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हूतियों के साथ नाम ना घसीटें, ईरान की विदेश नीति अमेरिका तय नहीं करता

हूतियों पर की गई अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद एक बार फिर जल उठा है मिडिल ईस्ट. हूतियों के साथ-साथ ईरान को धमकाए जाने से तेहरान भड़क गया है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) चीफ ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर हमला हुआ तो कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी.

आईआरजीसी प्रमुख के मुताबिक, “हमारी जमीन पर हमला हुआ तो हम कड़ी प्रतिक्रिया देंगे. अमेरिका की सूचना भ्रामक है, हूतियों को ईरान समर्थन नहीं कर रहा है.” दरअसल अमेरिकी जहाजों को लाल सागर में हूती विद्रोही लगातार टारगेट कर रहे हैं. ऐसे में गुस्साए ट्रंप के आदेश पर यमन में हूतियों के ठिकाने पर अमेरिका ने एयरस्ट्राइक की, जिसमें 31 से ज्यादा विद्रोही मारे गए हैं. इस दौरान अमेरिका ने ईरान को भी हूतियों की मदद करने पर वॉर्निंग दी है. 

हम युद्ध नहीं छेड़ेंगे, लेकिन धमकी दी गई तो जवाब देंगे: आईआरजीसी चीफ

आईआरजीसी चीफ जनरल हुसैन सलामी ने रविवार को ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई धमकी की निंदा की है. जनरल हुसैनी ने अपने बयान में कहा, “ईरान का रुख साफ है, वह युद्ध नहीं छेड़ेगा लेकिन अगर कोई धमकी देता है तो उसका उचित और निर्णायक जवाब देगा. हूती यमन के लोगों के प्रतिनिधि हैं. ये समूह अपने रणनीतिक और दूसरे निर्णय खुद लेता है ना कि ईरान उनको गाइड करता है.”

वह समय गया, जब तेहरान की विदेश नीति अमेरिका तय करता था: विदेश मंत्री

इसके अलावा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अराघची ने कहा, “अमेरिकी सरकार को ईरानी विदेश नीति तय करने का कोई अधिकार नहीं है. वह समय गया, जब वॉशिंगटन तेहरान की विदेश नीति तय कर सकता था. साल 1979 में ही समाप्त हो गया है. 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद लोगों ने पश्चिम समर्थक शाह को सत्ता से बाहर कर दिया था.”

अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर रूसी विदेश मंत्री ने रुबियो से बात की 

रूसी विदेश मंत्रालय ने भी रविवार को यमन में हुई अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर बयान जारी किया है, रूस ने कहा कि “रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की है. इस बातचीत में लावरोव ने अमेरिका से हमले बंद करने का आग्रह किया है.” अमेरिकी एयरस्ट्राइक और ईरान को धमकी ऐसे वक्त में दी गई है, जब एक दिन पहले ही ईरान के समर्थन में चीन-रूस, बीजिंग में हुई बड़ी बैठक हुई थी. 

ईरान के साथ खड़े हैं रूस-चीन

बीजिंग में रूस, चीन और ईरान के उप विदेश मंत्रियों की बैठक हुई है. इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हुए. इस मीटिंग में ईरान के परमाणु प्रतिबंधों को लेकर बात की गई. ईरान ने चीन और रूस को बताया कि उनका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ समृद्धि के लिए है. ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंध उसके अधिकारों का उल्लंघन हैं. बैठक में चीन, रूस और ईरान ने अमेरिका के दबाव के खिलाफ रणनीति बनाई और कहा, “शांति के लिए दबाव की नीति नहीं चलेगी.”

चीन-रूस ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी करते हुए ईरान के एटमी प्रोग्राम को समर्थन देने की घोषणा की. चीन-रूस ने कहा, “हमने न्यूक्लियर प्रोग्राम के मुद्दे और प्रतिबंधों पर गंभीरता से चर्चा की. हमने सभी गैरकानूनी और एकतरफा प्रतिबंधों को खत्म करने की जरूरत पर बल दिया. हमने दोहराया कि आपसी सम्मान के जरिए कूटनीतिक विकल्प ही विश्वसनीय और व्यावहारिक तरीका है. हमें लगता है कि प्रतिबंधों को हटाना जरूरी है.”

रूस, चीन और ईरान का साझा मेरीटाइम युद्धाभ्यास

पिछले हफ्ते ही रूस, चीन और ईरान की नौसेनाओं ने अरब सागर में साझा मेरीटाइम युद्धाभ्यास किया था. इस एक्सरसाइज का नाम सिक्योरिटी-बेल्ट 2025 रखा गया है. तीनों देशों के बीच, साझा युद्धाभ्यास का ये पांचवा संस्करण था.

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