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कर्तव्य पथ पर Hypersonic मिसाइल का प्रदर्शन, दुश्मन के जंगी बेड़े का काल

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार देश की हाइपरसोनिक मिसाइल दुनिया को दिखाई पड़ेगी. टैंक, तोप और सैनिकों की कदमताल के साथ, लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (एलआर-एएसएचएम), लॉन्चर के साथ प्रदर्शित की जा रही है.

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेश (डीआरडीओ) ने नवम्बर 2024 में हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. इस हथियार प्रणाली को भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

एलआर-एएसएचएम एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है जो स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है और इसे विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह मिसाइल स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और उच्च सटीकता सेंसर पैकेज के साथ अपनी तरह की पहली मिसाइल है.

ये हाइपरसोनिक मिसाइल मैक 10 से शुरू होने वाली हाइपरसोनिक गति के साथ एक अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती है और कई स्किप के साथ औसत मच 5.0 को बनाए रखती है. चूंकि यह मिसाइल कम ऊंचाई पर तेज गति और गतिशीलता के साथ उड़ती है, इसलिए दुश्मन के जमीन और जहाज आधारित रडार इस मिसाइल के अधिकांश प्रक्षेपवक्र के दौरान इसका पता नहीं लगा सकते हैं. माना जा रहा है कि इस मिसाइल की रेंज करीब 1500 किलोमीटर है.

 भारत पर्व में डीआरडीओ की झांकी

इस वर्ष, डीआरडीओ की झांकी कर्तव्य पथ के साथ-साथ 26 से 31 जनवरी तक लाल किले के भारत पर्व में भी प्रदर्शित की जाएगीय. झांकी का विषय ‘लड़ाकू पनडुब्बियों के लिए नौसेना प्रौद्योगिकियां’ है, जो स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकियों/प्रणालियों को प्रदर्शित करेगा जो भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों के लिए बल गुणक के रूप में कार्य करती हैं. ये प्रणालियां इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट (आईसीएस), वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो (डब्ल्यूजीएचडब्ल्यूटी) और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन हैं जो पानी के नीचे के क्षेत्र में युद्ध वर्चस्व सुनिश्चित करेंगी.

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