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फ्रांस ने दिखाया ट्रंप को ठेंगा, अमेरिकी फाइटरजेट के लिए एयरस्पेस बंद

अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के चल रहे युद्ध के बीच यूरोप में भी हलचल बढ़ चुकी है. फ्रांस ने अमेरिकी सैन्य विमानों को एयरस्पेस नहीं दिया, जिसके बाद इजरायल ने फ्रांस को रक्षा उपकरणों की बिक्री रोक दी है तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को देख लेने जैसी धमकी दी है. ईरान के खिलाफ फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन जैसे देशों का अमेरिका के साथ न खड़े होने से फूट साफ नजर आने लगी है.

ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए फ्रांस को ‘गैर-सहयोगी’ बताया और कहा कि अमेरिका इस बात को याद रखेगा कि फ्रांस ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपना एयरस्पेस इस्तेमाल नहीं करने दिया था.

फ्रांस बिलकुल मददगार नहीं रहा, अमेरिका नहीं भूलेगाट्रंप

ईरान को काबू करने में नाकाम अमेरिका अब फ्रांस पर भड़क गया है. दरअसल ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी सैन्य विमानों को फ्रांस का एयरस्पेस इस्तेमाल करना था. लेकिन फ्रांस की ओर से इजाजत नहीं दी गई. इस बात से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खूब खरी खोटी सुनाई. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, “फ्रांस ने उन विमानों को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी जो इजरायल के लिए सैन्य सामग्री लेकर जा रहे थे. ईरान के कसाई के खिलाफ कार्रवाई में फ्रांस बिल्कुल मददगार नहीं रहा, जिसे सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया है. अमेरिका इसे याद रखेगा.”

इजरायल ने रोकी फ्रांस को रक्षा उपकरणों की बिक्री

फ्रांस से उचित सहयोग न मिलने के कारण भड़के इजरायल ने भी फ्रांस को रक्षा उपकरणों की बिक्री रोक दी है. इजरायल की ओर से दावा किया गया गया है कि कि यह फैसला पिछले 2 वर्षों में फ्रांस के ‘शत्रुतापूर्ण रवैये’ के कारण लिया गया है. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने औपचारिक रूप से यह आदेश दिया है, हालांकि इस फैसले के पीछे इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की मंजूरी और सहमति मानी जा रही है.

इजरायली सैन्य अधिकारी कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा अमेरिकी विमानों को इजरायल जाते समय फ्रांसीसी हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने से रोकना ‘आखिरी वजह’ साबित हुआ, जिसके बाद यह फैसला लिया गया.

इटली ने भी अमेरिका को नहीं करने दिया अपने एयरबेस का इस्तेमाल

इटली ने भी अमेरिका को अपने सिगोनेला एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो ने ये फैसला तब लिया जब उसे अमेरिकी विमानों की उड़ान भरने की योजना के बारे में पता चला, जिसमें सिगोनेला में लैंडिंग के बाद पश्चिम एशिया जाने की बात थी. बताया जा रहा है कि इटली के एयरबेस के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका ने पहले न तो कोई इजाजत मांगी गई और न ही इटली के सैन्य अधिकारियों से सलाह ली गई थी. जांच में यह भी सामने आया कि ये सामान्य या लॉजिस्टिक उड़ानें नहीं थीं, इसलिए ये इटली के साथ हुए समझौते के दायरे में नहीं आती थीं.

युद्ध के शुरुआत में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने अपने बयान में कहा था कि “ये लड़ाई हमारी नहीं है. ना हम इस युद्ध का हिस्सा है.”

स्पेन-ब्रिटेन भी कर चुका है ईरान युद्ध का विरोध

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने भी अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों का विरोध किया है. उन्होंने 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद कहा था कि “उनकी सरकार जंग के खिलाफ है. हमारे सिद्धांत और मूल्य स्पष्ट हैं, हम युद्ध के खिलाफ हैं.”

वहीं ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने भी संवाद से युद्ध सुलझाने पर जोर दिया है. ब्रिटेन की ओर से होर्मुज में मदद न मिलने से ट्रंप ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि “हम ब्रिटेन के बिना ही युद्ध जीत लेंगे.”

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