स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए-तेजस में हो रही देरी का नतीजा ये हुआ है कि सरकारी एविएशन कंपनी एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) को स्टील्थ फाइटर जेट एमका से हाथ धोना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका) के लिए रक्षा मंत्रालय ने तीन प्राइवेट कंपनियों को चुना है.
जानकारी के मुताबिक, एमका प्रोजेक्ट के एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के लिए रक्षा मंत्रालय ने जिन तीन प्राइवेट कंपनियों को चुना है, वे हैं टाटा एडवांस सिस्टम लिमिटेड (टीएएसएल), एलएंडटी और भारत फोर्ज (कल्याणी ग्रुप). एमका प्रोजेक्ट के लिए एलएंडटी ने डिफेंस पीएसयू बीईएल (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) से हाथ मिलाया है. जबकि भारत फोर्ज ने दूसरे डिफेंस पीएसयू बीईएमएल (भारत अर्थ एंड मूवर्स लिमिटेड) से.
माना जा रहा है कि एमका प्रोजेक्ट के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर सकता है, जो किसी भी डिफेंस टेंडर के लिए पहला चरण होता है. आरएफपी के बाद, रक्षा मंत्रालय इन तीन प्राइवेट कंपनियों में से किसी एक को एमका बनाने के लिए चुनेगा.
ऐसे में एचएएल के बाद, देश में दूसरी एविएशन कंपनी होगी, जो लड़ाकू विमान बना सकेगी.
प्रोजेक्ट से बाहर होने से एचएएल अनभिज्ञ
एचएएल ने हालांकि, ऐसी खबरों से अनभिज्ञता जाहिर की है. एचएएल ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा कि एमका प्रोजेक्ट से बाहर किए जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. उल्लेखनीय है कि, एचएएल की ऑर्डर-बुक 2032 तक भरी हुई है. एलसीए-तेजस के एडवांस वर्जन मार्क-1ए और मार्क-2 के अलावा आईएमआरएच (इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर)और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (कैट्स) जैसे प्रोग्राम, एचएएल के पास हैं. साथ में एचएएल ने सिविल एविएशन में भी कदम रख दिया है.
हाल में हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया प्रदर्शनी में एचएएल ने रशिया के साथ मिलकर बनाए जाने वाले एसजे-100 यात्री विमान को प्रदर्शित किया. साथ में हिंदुस्तान-228 (16 यात्रियों वाला विमान) और ध्रुव-एनजी (कॉर्मशियल) हेलीकॉप्टर भी प्रदर्शित किया था.
एमका प्रोजेक्ट से बाहर रखने के लिए ये भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है कि एचएएल की ऑर्डर-बुक पूरी तरह फुल है. ऐसे में एमका प्रोजेक्ट के लिए एचएएल को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. हाल में, एचएएल के सीएमडी ने मीडिया को बताया था कि एमका के प्रोटो वर्जन के लिए अमेरिका की जीई कंपनी से एफ-414 एविएशन इंजन को लेकर समझौते पर चर्चा चल रही है.
एमका का फुल मॉडल तैयार
पिछले साल फरवरी में बेंगलुरु में आयोजित एयरो-इंडिया प्रदर्शनी में डीआरडीओ की मातहत एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने एमका का फुल-स्केल मॉडल प्रदर्शित किया था. इस मॉडल को ही असल एमका में परिवर्तित किया जाएगा.
स्वदेशी एमका के बारे में जानिए
एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका), एक मध्यम वजन का मल्टी रोल, टू-इन यानी दो इंजन वाला विमान होगा, जिसे डीआरडीओ की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने डिजाइन किया है. करीब 25 टन के इस पांचवे श्रेणी के लड़ाकू विमान के प्रोजेक्ट के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने 15 हजार करोड़ आवंटित किए हैं.
शुरूआत में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर एडीए स्वदेशी एमका को बनाने की तैयारी कर रहा था. लेकिन इसे बनने में करीब एक दशक का समय लग सकता है. यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय ने अब इसमें प्राईवेट कंपनियों को शामिल किया है. ताकि इनोवेशन के साथ-साथ भारत को बेहतर एमका मिले.
एआई से युक्त एमका…
भविष्य के लिए घातक लड़ाकू विमानडीआरडीओ का दावा है कि एमका जब बनकर तैयार हो जाएगा, तब अपने श्रेणी के सबसे आधुनिक और घातक स्टील्थ फाइटर जेट में से एक होगा. माना जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की पावर से युक्त इलेक्ट्रोनिक पायलट, नेटसेंट्रिक वारफेयर सिस्टम, इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट और इंटरनल-बे के साथ ये दुश्मन के लिए बेहद घातक साबित होगा.एआई-पावर इलेक्ट्रोनिक पायलट में मल्टी सेंसर डाटा फ्यूजन है ताकि आसपास की स्थिति पर पूरी तरह नजर रखी जा सके. साथ ही पायलट भी तुरंत कार्रवाई कर सके और टारगेट भी सटीक लगाया जाए. बेहद कम विजिविलटी में एमका से ऑपरेशन किया जा सकेंगे.
अमेरिका और रूस ने दिया है फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का ऑफर
एयरो-इंडिया में रूस का सु-57 स्टील्थ फाइटर जेट और अमेरिका का फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट, एफ-35 लाइटनिंग ने हिस्सा लिया था. रूस और अमेरिका दोनों भारत के साथ सौदा करना चाहते हैं. स्वदेशी एमका को भारतीय वायुसेना में शामिल होने में अभी पूरा एक दशक लग सकता है. लिहाजा माना जा रहा है कि भारत दोनों में से कोई एक लड़ाकू विमान वायुसेना में शामिल कर सकता है. रूस ने भारत को ये भी ऑफर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो मेक इन इंडिया के तहत भी सु-57 का निर्माण भारत में किया जा सकता है.
एयरोस्पेस सेक्टर में पाकिस्तान के मित्र देशों चीन-तुर्किए से है भारत की कड़ी प्रतिस्पर्धा
पिछले वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर में मिली करारी हार के बाद पाकिस्तान को चीन ने जल्द पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट जे-35 देने का वादा किया था्. करार के तहत पाकिस्तान को चीन से 40 जे-35 फाइटर जेट मिलने जा रहे हैं और जल्द डिलीवरी शुरु हो सकती है.
वर्ष 2024 में चीन ने दुनिया के सामने अपने दूसरे स्टील्थ फाइटर जेट जे-35 ‘शेनयांग’ को पेश किया था. फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट -35 को चीन ने ‘ज़ुहाई एयर शो’ में आधिकारिक तौर से लोगों के सामने लेकर आया था. जे 35 को अमेरिका के एफ 35 के टक्कर का माना जाता है.
पाकिस्तानी वायुसेना पहले से ही चीन के जेएफ-17 और जे-10 फाइटर जेट इस्तेमाल करती है. जे-35 के शामिल होने से पाकिस्तानी वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, जो भारत के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.
तुर्किए ने भी फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट कान (केएएएन) बनाने का दावा किया है.भारत-पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान चीन और तुर्किए ने पाकिस्तान का साथ देकर अपनी मंशा साफ कर दी है.

