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होर्मुज सभी जहाजों के लिए खुला, दिल्ली से अराघची का बड़ा बयान

नई दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिया है बड़ा बयान. अब्बास अराघची ने कहा है, ईरान होर्मुज की खाड़ी से सभी जहाजों को निकालने के लिए तैयार है. लेकिन अमेरिका या इजरायल को ये बात समझ लेनी चाहिए कि ईरान के संबंधित किसी भी मुद्दे को कोई सैन्य समाधान नहीं निकल सकता है.

अराघची का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करके होर्मुज मुद्दे पर मदद मांगी है. तो जवाब में जिनपिंग ने भी इस बात पर जोर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट खोलना चाहिए.

पूरी दुनिया इस बात पर जोर दे रही है कि मिडिल ईस्ट में शांति आनी चाहिए, ताकि एशिया से लेकर यूरोप तक महंगाई के हाहाकार से शांति मिल सके.

हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं, ईरान के साथ सैन्य जोर नहीं चल सकता: अराघची

ब्रिक्स बैठक में शामिल हुए अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में अमेरिका और होर्मुज से जुड़े हर मुद्दे पर बेबाकी से जवाब दिया है. अब्बास अराघची ने कह, “होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति इस समय बहुत जटिल है. बातचीत के जरिए समझौते के अलावा कोई और समाधान नहीं हो सकता.  हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए तैयार हैं. होर्मुज की स्थिति को सुधारने के लिए चीन जो भी कदम उठाएगा, उसका स्वागत होगा.  ईरान कूटनीति को मौका देने के लिए युद्धविराम को बरकरार रखने की कोशिश कर रहा था. लेकिन ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के सभी कारण हैं. ईरान से संबंधित किसी भी मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है. अगर आक्रामकता समाप्त हो जाए तो सबकुछ सामान्य हो जाएगा.

हम भारत की रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे: अराघची

अब्बास अराघची ने कहा, “ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं चाहे, लेकिन फिर भी बार-बार अमेरिका पर हमले किए गए.”

पश्चिम एशिया संकट पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि “हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे. अब्बास अराघची ने कहा, “मेरी प्रधानमंत्री मोदी से संक्षिप्त और अच्छी बातचीत हुई और विदेश मंत्री एस जयशंकर से लंबी बैठक हुई. हमने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी क्षेत्र की स्थिति समेत लगभग सभी मुद्दों पर चर्चा की. मुझे कहना होगा कि हम दोनों के विचार लगभग एक जैसे हैं और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में हमारी चिंताएं और हित भी समान हैं, इसलिए, हम अपने भारतीय सहयोगियों के साथ समन्वय जारी रखेंगे.”

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