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भारतीय वायुसेना के सुखोई ग्रीस रवाना, मल्टीनेशन एक्सरसाइज इनीयोकॉस-25 में लेंगे हिस्सा

भूमध्य सागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी का एहसास कराने के लिए भारतीय वायुसेना दूसरी बार ग्रीस में होने जा रही मल्टीनेशन एयर एक्सरसाइज इनीयोकॉस-25 में हिस्सा लेने जा रही है (31 मार्च-11 अप्रैल). सुखोई फाइटर जेट, आईएल-78 रिफ्यूलर और सी-17 ग्लोबमास्टर के साथ वायुसेना का एक पूरा दल हेलिनिक एयर फोर्स द्वारा आयोजित युद्धाभ्यास में शिरकत करने के लिए निकल चुका है.

अमेरिका, फ्रांस, इजरायल और यूएई सहित 15 देशों की वायुसेनाएं ले रही हैं हिस्सा

हेलेनिक वायु सेना द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास इनीयोकॉस-25  ग्रीस के एंड्राविडा एयर बेस पर आयोजित किया जा रहा है. एक्सरसाइज में अमेरिका, फ्रांस, इजरायल, इटली और यूएई सहित कुल 15 देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही है.

इंडियन एयरफोर्स के मुताबिक, इनीयोकॉस युद्धाभ्यास, हिस्सा लेने वाली विभिन्न वायु सेनाओं के लिए अपने युद्ध-कौशल को निखारने, सामरिक ज्ञान का आदान-प्रदान करने और सैन्य संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है. इस अभ्यास में वास्‍तविक युद्ध परिदृश्यों के अन्तर्गत पंद्रह देशों की कई वायु और सतही इकाइयां शामिल होंगी. इसे आधुनिक समय की हवाई युद्ध चुनौतियों का अनुसरण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. (https://x.com/PIB_India/status/1906256318891213055)

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तालमेल और अंतर-संचालन का मंच है हेलेनिक एक्सरसाइज

यह भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तालमेल और अंतर-संचालन को बढ़ाने का एक मंच है. यह अभ्यास संयुक्त वायु संचालन की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने, जटिल वायु युद्ध परिदृश्यों में रणनीति को परिष्कृत करने और परिचालन संबंधी सर्वोत्तम प्रणालियों में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा. एंड्राविडा से संचालित सभी ऑपरेशनों से भारतीय वायुसेना की भागीदारी न केवल इसकी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करेगी अपितु भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी सीखने और बेहतर समन्वय में भी योगदान देगी.

इनीयोकॉस-25 में भारतीय वायुसेना की भागीदारी वैश्विक रक्षा सहयोग और परिचालन उत्कृष्टता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है. यह अभ्यास भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा-और मित्र देशों के साथ संयुक्त अभियानों में इसकी क्षमताओं को बढ़ाएगा.

हाल के सालों में भारत और ग्रीस के बीच बढ़ा सैन्य सहयोग

हाल के सालों में भारत और ग्रीस के बीच सैन्य सहयोग काफी बढ़ा है. पिछले साल (अगस्त-सितंबर 2024) में हेलेनिक एयरफोर्स, भारतीय वायुसेना की बहु-राष्ट्रीय एक्सरसाइज तरंग-शक्ति में हिस्सा लेने के लिए जोधपुर (राजस्थान) पहुंची थी.

इसी दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी चार दिवसीय यात्रा पर ग्रीस गए थे और हेलेनिक नेशनल डिफेंस और फ्लीट कमांडरों से मुलाकात की थी. साथ ही ग्रीक नेवल बेस और जंगी जहाज का भी दौरा किया था.

इससे पहले मई के महीने में अलास्का (यूएस) में ‘रेड फ्लैग’ एक्सरसाइज से लौटते वक्त भारतीय वायुसेना के राफेल (रफाल) फाइटर जेट साझा एक्सरसाइज के लिए ग्रीस में रुके थे. वर्ष 2023 में भी वायुसेना ने इनीयोकॉस एक्सरसाइज में हिस्सा लिया था.

वर्ष 2024 के शुरुआत में ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने भी भारत का दौरा (20-24 फरवरी) किया था. उनका दौरा महज प्राचीन भारत और यूनान (आधुनिक ग्रीस) के संबंधों को एक बार फिर से जीवित करने तक सीमित नहीं था बल्कि इसके कई सामरिक मायने थे.

ग्रीस का है पाकिस्तान के परम-मित्र तुर्की से छत्तीस का आंकड़ा

दरअसल, ग्रीस का तुर्की  (तुर्किए) के साथ छत्तीस का आंकड़ा है. दोनों देशों का भूमध्य-सागर और एजियन सी में पिछले कई दशक से विवाद चल रहा है. साइप्रस को लेकर भी दोनों देशों में लंबी अदावत है.

तुर्की के खिलाफ ग्रीस को वैश्विक समर्थन चाहिए. ऐसे में ‘वर्ल्ड-लीडर’ यानी विश्वगुरु भारत से महत्वपूर्ण देश कोई नहीं हो सकता है. भारत इसलिए, क्योंकि ये वही तुर्की है जो कश्मीर के मुद्दे पर ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर पाकिस्तान का साथ देना कभी नहीं भूलता.

तुर्की संयुक्त राष्ट्र हो या ओआईसी (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज) कश्मीर के मुद्दे को उठाता रहता है. इसके अलावा भारत के पड़ोसी (और दुश्मन) देश पाकिस्तान को हथियार देने से बाज नहीं आता. पाकिस्तान को तुर्की से खतरनाक कॉम्बेट ड्रोन बायरेक्टर मिले हैं. पाकिस्तान ने इन बायरेक्टर ड्रोन को लाहौर के करीब भारत से सटी सीमा पर तैनात किए हैं.


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