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अरुणाचल में भारत-चीन कोर कमांडर बैठक, फेस-ऑफ के चलते एलएसी पर तनातनी

पिछले एक महीने से अरुणाचल प्रदेश से सटी एलएसी पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच चल रही तनातनी को सुलझाने के लिए दोनों देशों के कोर कमांडर्स की मीटिंग होने जा रही है. रविवार को किबिथू के करीब वाचा-डमई बीपीएम हट में ये बैठक होने जा रही है. अरुणाचल प्रदेश में दोनों देशों के कोर कमांडर्स की ये पहली मीटिंग है. अभी तक पूर्वी लद्दाख में विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए सीनियर मिलिट्री कमांडर्स की मीटिंग होती आई हैं. 

जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना की तरफ से तेजपुर (असम) स्थित 4 कोर (गजराज कोर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया बैठक का प्रतिनिधित्व करेंगे. चीन की तरफ से अरुणाचल प्रदेश से सटे मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के मेजर जनरल रैंक का अधिकारी, बैठक का नेतृत्व करेगा. 

कोर कमांडर बैठक को लेकर भारतीय सेना की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. माना जा रहा है कि बैठक के बाद संक्षिप्त बयान सामने आ सकता है.

अपर-सुबानसरी से सटी एलएसी पर चल रही तनातनी

गौरतलब है कि अगस्त के आखिरी महीने से अरुणाचल प्रदेश से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपर-सुबानसरी क्षेत्र में दोनों देश आमने-सामने हैं और फेस ऑफ की स्थिति बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नो-मैन्स जोन में पैट्रोलिंग के दौरान, दोनों देशों के सैनिक आमने सामने आ गए हैं. स्थानीय फोर्मेशन कमांडर्स के बीच हुई वार्ता से भी तनातनी खत्म नहीं हुई है.

अपुष्ट खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के सैनिक विवादित इलाके में टेंट गाड़ कर बैठ गए हैं. ऐसे में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. ऐसे में दोनों देशों की सेनाओं ने कोर कमांडर स्तर की बैठक आयोजित की है. अभी तक पूर्वी लद्दाख में चुशूल-मोल्डो बीपीएम हट में कोर कमांडर मीटिंग होती आई हैं.

अभी तक पूर्वी लद्दाख में होती थी बीपीएम मीटिंग

गलवान घाटी के झड़प (जून 2020) के बाद पूर्वी लद्दाख में विवाद सुलझाने के लिए कोर कमांडर स्तर की मीटिंग चुशुल-मोल्डो में होती आई हैं. वर्ष 2016 में 3488 किलोमीटर लंबी एलओसी पर चुशूल, किबिथू, नाथूलॉ (सिक्किम) और बूमला (अरुणाचल प्रदेश) में  दोनों देशों की सेनाओं ने बीपीएम हट बनाई थी ताकि बॉर्डर विवाद सुलझाने के लिए यहां बैठक आयोजित की जा सके. इसके अलावा, अपने-अपने देश के राष्ट्रीय त्योहार और पर्वों पर भी दोनों देशों के स्थानीय कमांडर यहां वार्ता आयोजित करते हैं. लेकिन गलवान घाटी की झड़प के बाद ऐसी मीटिंग बेहद कम हो गई हैं. अब ये बीपीएम हट, विवाद सुलझाने के लिए आयोजित बैठक तक सीमित होकर रह गई हैं.

भारत-चीन संबंधों में बॉर्डर स्थिति बेहद अहम: विदेश मंत्रालय

पिछले महीने, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अरुणाचल प्रदेश में चल रही तनातनी को लेकर सवाल के जवाब में कहा था कि “दोनों देशों के संबंधों में बॉर्डर की स्थिति बेहद अहम है.” पिछले हफ्ते, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवल ने बीजिंग का दौरा किया था. उस दौरान, डोवल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बॉर्डर की स्थिति को लेकर विशेष प्रतिनिधि मीटिंग की थी.

इसी हफ्ते ब्रिक्स समिट में शी जिनपिंग का दिल्ली दौरा संभव

उल्लेखनीय है कि इसी हफ्ते, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दिल्ली दौरा होने जा रहा है. मौका होगा, ब्रिक्स समिट का. इस वर्ष ब्रिक्स संगठन की अध्यक्षता भारत कर रहा है. ऐसे में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग के अलावा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का भारत दौरान लगभग पक्का है. यही वजह है कि भारत और चीन, किसी भी कीमत पर अरुणाचल प्रदेश में बॉर्डर (अपर सुबानसरी) विवाद को लंबा खींचने के पक्षधर नहीं है. यही वजह है कि रविवार को दोनों देश के कोर कमांडर किबिथू में बैठक कर विवाद को सुलझाने जा रहे हैं. 

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