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ईरान जंग पर भारत की नजर, जयशंकर बोले

सेंट्रल एशिया में अशांति और अमेरिका-इजरायल की ईरान में हुई सैन्य कार्रवाई पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में बयान दिया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने युद्ध में मारे गए लोगों पर दुख जताते हुए विपक्ष को जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं.

जयशंकर ने कहा, भारत क्षेत्र में शांति का पक्षधर है. पीएम मोदी ने खाड़ी के कई देशों से खुद बातचीत की है. खाड़ी देशों में फंसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है.

जयशंकर ने विदेशनीति पर बात करते हुए कहा कि भारत चाहता है कि संवाद और कूटनीति से ये जंग खत्म होनी चाहिए.

आपको बता दें कि 28 फरवरी यानि जिस दिन अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया, भारत शांति पर जोर दे रहा है. वो ईरान के साथ-साथ खाड़ी देशों के संपर्क में है. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कई राष्ट्राध्यक्षों से बात की है. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को भी पीएम मोदी समझा चुके हैं. लेकिन विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रही है. कांग्रेस चाहती है कि भारत का झुकाव ईरान की ओर हो. पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद सोनिया गांधी ने भी सवाल खड़े किए थे कि सरकार ने खामेनेई की मौत पर बयान क्यों नहीं दिया. हालांकि खुद विदेश सचिव विक्रम मिसरी नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में पहुंचे थे, और खामेनेई की शोक सभा में हिस्सा लेते हुए शोक संवेदना प्रकट की थी.

जंग के समर्थन में नहीं भारत, खाड़ी देशों में शांति आनी चाहिए: जयशंकर

राज्यसभा में पश्चिम एशिया के हालात पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “चल रहा संघर्ष भारत के लिए बेहद चिंता का विषय है. हम पड़ोसी इलाके में आते हैं, और पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखना हमारी साफ जिम्मेदारी है. खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं और वहां काम करते हैं. ईरान में भी, कुछ हजार भारतीय पढ़ाई या फिर नौकरी के लिए हैं.”

जयशंकर ने कहा,“यह इलाका हमारी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत जरूरी है और इसमें तेल तथा गैस के कई जरूरी सप्लायर शामिल हैं. सप्लाई चेन में गंभीर रुकावटें और अस्थिरता का माहौल हमारे लिए गंभीर मुद्दे हैं. खाड़ी क्षेत्र हमारा एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जिससे हम प्रतिवर्ष लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार करते हैं और पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र से भारत में बड़े निवेश हुए हैं.”

“संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है, और इलाके में सुरक्षा की स्थिति काफी खराब हो गई है. यह संघर्ष दूसरे देशों में भी फैल गया है और तबाही भी बढ़ रही है. इस जंग की वजह से आम जिंदगी और काम-काज पर साफ असर पड़ रहा है. भारत इस पक्ष में है कि संवाद और कूटनीतिक माध्यम से क्षेत्र में शांति आए.”

विदेश मंत्री ने अपने बयान में कहा, “हमारी सरकार ने 20 फरवरी को बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. हमारा मानना ​​है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहिए.”

मैंने खुद ईरानी विदेश मंत्री से संपर्क किया, अराघची ने युद्धपोत की मदद के लिए आभार जताया: जयशंकर

एस जयशंकर ने बताया कि “इस समय ईरान के नेताओं से संपर्क करना काफी मुश्किल है. बावजूद इसके मैंने ईरान के विदेश मंत्री से बात की है. अपने समकक्षों के संपर्क में हूं. अब्बास अराघची से कहा है कि इस इलाके में भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इजरायल के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है.

जयशंकर ने कहा, “इन सभी देशों ने आश्वासन दिया है कि भारतीय समुदाय की भलाई उनकी प्राथमिकता होगी.”

विदेश मंत्री ने सदन को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी कि “कोच्चि बंदरगाह पर एक ईरानी जहाज ‘आईआरआईएस लवन’ खड़ा है. ईरान ने 28 फरवरी को तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति मांगी थी, जिसे 1 मार्च को स्वीकार कर लिया गया. जहाज का क्रू फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है. जयशंकर ने इसे एक ‘मानवीय कदम’ बताते हुए कहा कि ईरानी विदेश मंत्री ने इसके लिए भारत का आभार व्यक्त किया है.”

भारतीय लोगों को युद्ध क्षेत्र से निकाला जा रहा है: एस जयशंकर

जयशंकर ने कहा, “भारतीय दूतावास ने तेहरान में कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर की जगहों पर शिफ्ट करने में मदद की है. ईरान में बिजनेस के सिलसिले में आए भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया पार करके भारत लौटने में मदद की गई. तेहरान में हमारा दूतावास पूरी तरह चालू है और हाई अलर्ट पर है. हम इस समय भारतीय समुदाय की मदद के लिए प्रतिबद्ध है.”

जयशंकर ने कहा, “कल तक हमारे करीब 67,000 नागरिक लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार कर चुके हैं. पश्चिम एशिया से हमारे लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है. दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे ट्रांजिट हब में फंसे यात्रियों की मदद के लिए भारतीय राजनयिक जमीन पर काम कर रहे हैं. कई मामलों में सड़क मार्ग से सीमा पार भी करवाकर भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा रहा है.”

जयशंकर ने दुख जताते हुए बताया कि “व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों में अब तक दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अभी भी लापता है. इन जहाजों के क्रू में अक्सर बड़ी संख्या में भारतीय होते हैं.स्थिति को देखते हुए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने 2 मार्च को एक ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ का गठन किया है. ये टीम प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए 24 घंटे काम कर रही है.”

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