अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान को अमेरिका के लिए खतरा बताने वाली तुलसी गबार्ड के बयान पर भारत ने सहमति जताई है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा ये सच्चाई है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान का चोरी-छिपे परमाणु कार्यक्रम चलाने और आतंकवाद को पालने का पुराना इतिहास रहा है.
अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने सीनेट की एक बैठक में खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दुनिया के सामने पाकिस्तान की काली सच्चाई सामने रखी थी. तुलसी गबार्ड ने कहा था कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है. तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान के अलावा रूस,चीन और उत्तर कोरियाई मिसाइलों पर भी कई खुलासे किए थे.
पाकिस्तान का रवैया हमेशा से दुनिया के लिए चिंता का विषय: रणधीर जायसवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड के बयानों का जिक्र किया है. रणधीर जायसवाल ने कहा है कि “पाकिस्तान परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो चिंताएं जताई गई हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं है. पाकिस्तान ने हमेशा से ही पर्दे के पीछे रहकर अपने परमाणु अभियानों को अंजाम दिया है. पाकिस्तान का यह रवैया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा से ही फिक्र का विषय रहा है.”
अमेरिका तक पहुंच सकती है पाकिस्तान की मिसाइल: अमेरिकी रिपोर्ट
18 मार्च को अमेरिका के ओडीएनआई ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि “पाकिस्तान अब ऐसी खतरनाक मिसाइलों पर काम कर रहा है जो लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं. आशंका तो यह भी जताई गई है कि इस्लामाबाद ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बना रहा है, जो सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. मतलब साफ है कि पाकिस्तान अब सिर्फ अपने पड़ोसियों के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप के लिए भी खतरा है.”
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि “अमेरिका आज जिस जटिल खतरे का सामना कर रहा है, उसमें पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध है. भले ही अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे संगठन पहले के मुकाबले कमजोर हुए हों, लेकिन पाकिस्तान में पनप रहे नए गुट जैसे आईएसआईएस-के अब भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं. ये आतंकी गुट भर्ती और अपनी साजिशों के लिए पाकिस्तान इलाकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.”
तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान की पोल खोली
गबार्ड ने अमेरिका की सुरक्षा को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. तुलसी गबार्ड ने कहा है कि “पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जो अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरा हैं. पाकिस्तान-चीन, रूस-उत्तर कोरिया और ईरान ऐसे डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिनमें न्यूक्लियर और कन्वेंशनल दोनों पेलोड हैं. ये सिस्टम सीधे अमेरिका तक पहुंच सकते हैं.”
तुलसी गबार्ड ने ये भी कहा कि “अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी का आकलन है कि चीन और रूस उन्नत डिलीवरी सिस्टम बना रहे हैं, जो अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम (पैट्रिएट और थाड) को भेदने या बायपास करने में सक्षम होंगे. ये सिस्टम हाइपरसोनिक मिसाइलें, उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य आधुनिक हथियार हैं. ये हथियार पारंपरिक एयर डिफेंस को चकमा देने की क्षमता रखते हैं.”
तुलसी गबार्ड ने कहा, “परमाणु हथियारों का यह विकास न केवल अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे विश्व को अस्थिर कर सकते हैं. रूस अपनी न्यूक्लियर फोर्स को आधुनिक बना रहा है. ताकि अमेरिकी मिसाइल डिफेंस को पार कर सके, चीन अपनी न्यूक्लियर क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है और नए डिलीवरी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है. उत्तर कोरिया और ईरान भी लंबी दूरी की मिसाइलों पर काम कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान अपनी न्यूक्लियर क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है.”

