Breaking News Middle East War

स्विट्जरलैंड में ईरान का मान-मनौव्वल, झेंप गया अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के ऐतिहासिक किले वर्साय से ईरान के साथ हुए जिस एमओयू को दुनिया को दिखाया था, उस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को पूरा करने में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के हाथ-पांव फूल गए हैं. स्विट्जरलैंड में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को ईरान के साथ बातचीत के दौरान कई बार झेंपना पड़ा. कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही बातचीत के बीच वेंस को उस वक्त अपमान सहना पड़ा जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरानी स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने वार्ता स्थल का वॉकआउट कर दिया.

दरअसल इस वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को धमकी देते हुए कहा था कि अगर शर्तों से ईरान हटा तो प्रतिनिधिमंडल वापस अपने देश नहीं जा पाएगा.

जैसे-तैसे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को मनाया गया और फिर बातचीत की गई. वेंस ने बैठक को ऐतिहासिक करार दिया है. और कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ रिश्तों में नई शुरुआत और पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष विराम के लिए प्रतिबद्ध हैं.

अमेरिका-ईरानी प्रतिनिधिमंडल में तनावपूर्ण माहौल में एमओयू पर हुई बातचीत

स्विट्जरलैंड की ल्यूसर्न झील के किनारे बने लग्जरी बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच तनावपूर्ण माहौल में बातचीत हुई है. 17 जून को दोनों पक्षों के बीच 14-सूत्रीय एमओयू पर सहमति के बाद पहली वार्ता है. पाकिस्तान और कतर इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर कर रहे हैं. वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसदीय स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ के साथ सेंट्रल बैंक और तेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच हुई वार्ता का पहला राउंड तनाव से भरा रहा. ट्रंप की तेहरान पर हमले की धमकियों के बाद ईरान ने वार्ता से वॉकआउट कर दिया. ईरानी डेलीगेशन गुस्से में कमरे से बाहर निकल गया. ईरानी डेलीगेशन का गुस्सा सातवें आसमान में था जिसे देखकर मध्यस्थता के लिए उछल रहे पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर की हवाईयां उड़ गईं.

ईरानी अधिकारियों के वार्ता से वॉकआउट करने का एक वीडियो भी सामने आया है. ईरानी डेलीगेशन के वॉकआउट करने के बाद माहौल टेंशन वाला हो जाता है. शहबाज और असीम मुनीर के वेंस के साथ खुसर-फुसर भी कैमरे में कैद हुई.

बताया जा रहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले अमेरिका-ईरान दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और ज्वाइंट फोटो सेशन का प्लान था. लेकिन अराघची और गालिबाफ ने इस सेशन में हिस्सा लेने से मना कर दिया.

ईरान खूब मान-मनौव्वल के बाद वार्ता के लिए तैयार हुआ और बहुत देर बाद दोनों पक्षों में बातचीत शुरु हो सकी.

ईरान-अमेरिका की वार्ता का पहला दौर पूरा, किन-किन बातों पर सहमति

वार्ता के पहले दौर में कई अहम मुद्दों पर प्रगति हुई है. दोनों पक्षों ने 60 दिनों में अंतिम समझौते तक पहुंचने का रोडमैप तैयार किया है. परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और लेबनान में युद्धविराम लागू कराने के लिए नई कमेटी और सिस्टम बनाने पर सहमति बनाई गई है.

एक हाई लेवल कमेटी बनाने का फैसला किया गया है. यह समिति पूरी वार्ता प्रक्रिया की निगरानी करेगी और राजनीतिक स्तर पर दिशा तय करेगी. अमेरिका और ईरान के मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस कमेटी को बातचीत की प्रगति की जानकारी देंगे. इसी के आधार पर आगे की बातचीत निर्भर करेगी.

पाकिस्तान और कतर ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि “वे वार्ता को सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहेंगे, ताकि अंततः किसी व्यापक और अंतिम समझौते तक पहुंचा जा सके.”

तेल निर्यात पर छूट, फ्रीज संपत्ति जारी: अराघची

सोशल मीडिया पर जारी बयान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि “तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर छूट दी गई है, नाकेबंदी हटाई गई है और कुछ फ्रीज हुए वित्तीय संसाधन भी जारी किए गए हैं. इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए एक बड़ी योजना शुरू की गई है. इस समझौते की वास्तविक परीक्षा ‘लेबनान डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ होगी, जिससे यह तय होगा कि संघर्षविराम और समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है या नहीं.”

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा है कि “स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का काम पूरा हो चुका है. अब समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने से जुड़े मुद्दों पर तकनीकी टीमें आगे की बातचीत करेंगी. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि तकनीकी विशेषज्ञ आवश्यक विषयों पर काम जारी रखेंगे.”

ईरान ने दावा किया है कि स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता शुरू होने से पहले उसकी प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लिया गया है. एमओयू के अनुच्छेद 1, 10 और 11 को लागू किए बिना तकनीकी वार्ता आगे नहीं बढ़ेंगी.

ट्रंप की धमकियां असरदार नहीं, हमारी आर्मी तैयार: गालिबाफ

स्विट्जरलैंड में वार्ता से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, ”अगर ईरान ने हिजबुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका उस पर पिछले हफ्ते से भी ज्यादा बड़ा हमला करेगा.”

ट्रंप की इस धमकी पर ईरान की तरफ से फौरन जवाब दिया गया. वार्ताकार गालिबाफ ने लिखा, ”अगर अमेरिकी धमकियां असरदार होतीं, तो वॉशिंगटन आज जिस स्थिति में है, वहां नहीं पहुंचता. अमेरिकी नेताओं को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए. वे चाहे कुछ भी कहें, कार्रवाई हम ही करेंगे हमारी सेना उन्हें अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है.”

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *