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विमान में स्कूली बैग-बच्चों की तस्वीरें, ईरान की भावुक पोस्ट

इस्लामाबाद में युद्धविराम पर बातचीत के बीच ईरानी स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने एक भावुक पोस्ट के जरिए अमेरिका के नरसंहार की कहानी दुनिया को एक बार फिर याद दिलाई है. गालिबफ जिस विमान से पाकिस्तान पहुंचे,  उसकी चर्चा हर ओर होने लगी. क्योंकि वो पाकिस्तान में अपने साथ उन बच्चों को लेकर आए, मिनाब स्कूल हमले में मारे गए थे.

विमान की हर सीट पर उन बच्चों की तस्वीरें थीं, जो हमले में मारे गए थे. वहीं सीट पर बच्चों के स्कूल बैग, टिफिन और जूते चप्पल रखे गए थे. गालिबफ ने जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विमान की अपनी एक तस्वीर साझा की तो पूरी दुनिया का दिल दहल गया.

28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया तो एक अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल उस स्कूल पर भी गिरी थी, जिसमें छोटे-छोटे स्कूली बच्चे थे. इन हमलों में 150 से ज्यादा मासूमों की जान गई. बच्चों की मौत के बाद तेहरान को पूरी दुनिया की ओर से सांत्वना दी गई और अमेरिकी हमलों का विरोध किया गया.

बातचीत से पहले गालिबफ ने दुनिया को किया भावुक

अमेरिकी हमलों की आग में जल चुके बच्चों की फोटो और उनके स्कूल बैग, टिफिन लेकर इस्लामाबाद पहुंचे हैं ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख है, जो युद्ध गालिबफ ने विमान के अंदर की तस्वीर पोस्ट की तो हर किसी की आंखों में आंसू आ गए. तस्वीर में गालिबफ सीटों के पीछे चिपकाई गई बच्चों की तस्वीरों को देखते हुए दिखाई दे रहे हैं.

तस्वीर में स्पीकर विमान के अंदर खड़े हैं और सीटों के पीछे चिपकाई गई छोटे-छोटे बच्चों की फोटो को गौर से देख रहे हैं. हर सीट के पीछे एक मासूम बच्चे की तस्वीर लगी हुई है. साथ ही हर सीट पर स्कूली बैग और जूते भी रखे गए हैं. ये बैग और जूते उन बच्चों के हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. अमेरिका के साथ बातचीत से पहले ये सब कुछ ईरान ने जानबूझकर किया गया है ताकि पूरी दुनिया के सामने अमेरिका-इजरायल का अत्याचार सामने लाया जाए.

इस्लामाबाद की इस उड़ान में मेरे मिनाब के साथी: गालिबफ

ईरानी स्पीकर गालिबफ ने फोटो पोस्ट में मिनाब 168 हैशटैग का इस्तेमाल किया. लिखा, “इस उड़ान में मेरे साथी मिनाब-168.”
आपको बता दें कि अमेरिका-इजरायल ने जब 28 फरवरी को ईरान के शहरों पर हमले किए तो उनके हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और दर्जनों सैन्य शीर्ष ही नहीं मारे गए थे 168 स्कूली बच्चे भी इस युद्ध की भेंट चढ़ गए थे.

ईरान युद्ध के पहले दिन ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजरह तैय्यबेह प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल हमला हुआ था. यह अटैक अमेरिका और इजरायल ने किया था. कहा जाता है कि अमेरिका ने इस हमले के लिए टॉमहॉक मिसाइल का इस्तेमाल किया था. इस हमले में 165 से ज्यादा लोग मारे गए. इनमें ज्यादातर स्कूली बच्चे थे जो क्लासरूम में पढ़ रहे थे.

सुबह-सुबह का समय था, जब छोटे छोटे बच्चे अपनी किताबें खोलकर क्लासरूम में बैठे ही थे, तभी अचानक मिसाइल आकर गिर गई. स्कूल की दीवारें ढह गईं. बच्चे चीखते-चिल्लाते दब गए. कुछ बच्चों के जूते और बैग ही बचे. वही बैग और जूते गालिबफ के विमान में हर सीट पर रखे गए.

ईरान का कहना है कि ये हमला मासूम बच्चों पर हुआ है. बच्चों की शहादत बेकार नहीं जाएगी और उन लोगों को नहीं छोड़ा जाएगा, जिन्होंने बच्चों को मारा है.

गालिबफ को अमेरिका पर नहीं है विश्वास, बातचीत से पहले क्या बोले?

शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद आए गलिबफ ने अमेरिका के इरादों पर शक जाहिर किया. उन्होंने कहा कि “अमेरिकियों के साथ बातचीत का अनुभव हमेशा बेकार और शर्तों के उल्लंघन से भरा रहा है. ईरान अच्छी नीयत के साथ बातचीत में शामिल हो रहा है, लेकिन हमें अमेरिका पर कोई भरोसा नहीं है.”

गालिबफ का इशारा कहीं ना कहीं फरवरी में हुई बातचीत की ओर था. फरवरी में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और करीबी स्टीव वेटकॉफ के साथ ईरान की सकारात्मक बातचीत की जा रही थी. लेकिन बातचीत के दौरान ही अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर अटैक कर दिया. इस हमले को तेहरान विश्वासघात के तौर पर देख रहा है. ईरान का कहना है कि शांतिवार्ता के बीच हमला धोखेबाजी की तरह थी. लेकिन ईरान ने भी 40 दिनों तक अमेरिका को टक्कर देकर हालत खराब कर दी.

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