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म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में Kaja का इशारा, ऑपरेशन सिंदूर पर अमेरिका के दावे पर सवाल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध-विराम कराने की वाहवाही लूटने वाले अमेरिका के दावों पर अब उसके नाटो साथी भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. ताजा मामला जर्मनी में चल रहे म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस का है, जहां यूरोपीय संघ की फोरेन पॉलिसी चीफ ने ऐसा इशारा किया कि वीडियो वायरल हो गया. 

म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) और संयुक्त राष्ट्र में राजदूत, माइक वाल्ट्ज ट्रंप प्रशासन की उपलब्धियों का बखान करने में जुटे थे. वाल्ट्ज ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में दुनियाभर में जितने भी युद्ध या संघर्ष हुए, यूएन (संयुक्त राष्ट्र) उन्हें रोकने में नाकाम साबित हुआ.

ट्रंप के राजदूत ने किया था भारत-पाकिस्तान युद्धविराम पर दावा

अमेरिकी राजदूत ने दावा किया भले कंबोडिया और थाईलैंड के बीच जंग हो या फिर आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच या फिर परमाणु शक्ति देश भारत और पाकिस्तान के बीच, सभी में अमेरिका ने आगे बढ़कर रुकवाया. 

इस संबोधन के दौरान, मंच पर एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय संघ (ईयू) की सिक्योरिटी एंड फॉरेन पॉलिसी चीफ काजा कैलस भी मौजूद थी. जैसे ही वॉल्ट्ज ने भारत-पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाने का दावा किया, काजा ने अपने मुंह में हवा भरकर गालो को फुलाना शुरु कर दिया. उनके इस इशारे से साफ था कि काजा को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध-विराम को लेकर वाल्ट्ज के दावों पर कतई यकीन नहीं है.

काजा ने अमेरिका के सुपर पावर होने पर खड़ा किया सवाल

यूक्रेन जंग को लेकर रूस के खिलाफ आक्रामक बयान करने को लेकर सुर्खियों में छाई रहने वाली काजा को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक नीतियों की आलोचक रही हैं. म्यूनिख सम्मेलन में काजा ने सार्वजनिक तौर से कह दिया था कि अगर अमेरिका आज एक सुपर पावर है तो वो यूरोप (नाटो) देशों की मदद के चलते है. काजा ने यहां तक कह दिया कि रूस की तरह अमेरिका, कभी भी अकेले युद्ध में नहीं कूदता है. अमेरिका अपने सहयोगी (नाटो) देशों के साथ जंग लड़ता है. इन युद्ध में अमेरिका के सहयोगी देशों के सैनिक भी अपनी जान न्योछावर करते हैं. (हमने अमेरिका को बनाया सुपरपावर, यूरोप ने दिखाया ट्रंप को आईना)

पिछले महीने गणतंत्र दिवस के मौके पर काजा भी यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ भारत के दौरे पर आए थीं और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी.

भारत हमेशा से इन दावों को नकारता आया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से युद्धविराम में  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अहम भूमिका थी. भारत का मानना है कि पाकिस्तान की अपील पर युद्ध-विराम किया गया था. 

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