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अचानक रुके चिली के राष्ट्रपति, मोदी ने समझाया अशोक चक्र का महत्व

हैदराबाद हाउस में मुलाकात के दौरान चिली के राष्ट्रपति की एक तस्वीर ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा. इस तस्वीर में चिली के राष्ट्रपति ग्रेबियल बोरिक फॉन्ट तिरंगे को छू रहे हैं और अशोक चक्र को बेहद ध्यान से देखते दिखे. उन्होंने पीएम मोदी से रुक कर अशोक चक्र के बारे में बेहद ही रोमांचक तरीके से पूछा.

इस दौरान पीएम मोदी, चिली के राष्ट्रपति को अशोक चक्र का मतलब समझाते दिखे. भारत दौरे पर पहुंचे चिली के राष्ट्रपति ग्रेबियल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की साथ ही भारत-चिली के संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया. 

हैदराबाद हाउस में जब भारतीय ध्वज के करीब अचानक रुक गए चिली के राष्ट्रपति

1 से 5 अप्रैल तक राजकीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं चिली के राष्ट्रपति ग्रेबियल बोरिक फॉन्ट. द्विपक्षीय वार्ता के लिए हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ चिली के राष्ट्रपति की एक वार्ता का वीडियो चर्चा का विषय है. हैदराबाद हाउस के कॉरिडोर में पीएम मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ग्रेबियल अचानक से एक तिरंगे के पास रुक गए और आश्चर्यचकित होते हुए तिरंगे पर बने अशोक चक्र को छूने लगे. इस दौरान ग्रेबियल ने पीएम मोदी से अशोक चक्र का महत्व समझा. 

क्या आप जानते हैं तिरंगे और अशोक चक्र का महत्व?

भारत के राष्ट्रीय ध्वज के बीचों-बीच बने अशोक चक्र का अपना एक महत्व है. भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज में तीन रंग की क्षैतिज पट्टियां हैं. इसमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद ओर नीचे गहरे हरे रंग की प‍ट्टी और ये तीनों समानुपात में हैं. इसके बीचों-बीच गहरे नीले रंग का एक चक्र है. यह चक्र अशोक की राजधानी के सारनाथ के शेर के स्‍तंभ पर बना हुआ है. और इसमें 24 तीलियां है. 24 तीलियां मनुष्य के गुणों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ चहुंमुखी विकास,प्रगति,निरंतरता और कर्तव्य का संदेश देती है.

24 तीलियां 24 घंटे और 24 ऋषियों को भी प्रदर्शित करती हैं. ये 24 तीलियां 24 सिद्धांतों की तरह है, जिनका नागरिकों को पालन करना चाहिए. रंग, रूप, जाति और धर्म के अंतरों को भुलाकर देश को एकता के धागे में पिरोने के लिए प्रेरित करती हैं. अशोक चक्र को कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है. चक्र धर्म चक्र का प्रतीक है. सम्राट अशोक के कई शिलालेखों पर अशोक चक्र बना हुआ है. 

भारत-चिली के बीच किन मुद्दों पर बनी सहमति?

चिली के राष्ट्रपति ग्रेबियल बोरिक के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया हुआ है. जिसमें मंत्री, संसद सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, व्यापार संघ, मीडिया और भारत-चिली सांस्कृतिक संबंधों से जुड़े प्रमुख चिलीवासी शामिल हैं. पीएम मोदी के मुलाकात में दोनों नेताओं ने आर्थिक, कमर्शियल और सामाजिक क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के उद्देश्य से चर्चा की. बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, खनन और खनिज संसाधन, कृषि और खाद्य सुरक्षा, हरित ऊर्जा, आईसीटी, डिजिटलीकरण, नवाचार, आपदा प्रबंधन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की व्यापक समीक्षा की. (https://x.com/narendramodi/status/1907073138669846835)

भारत और चिली के बीच कैसे संबंध हैं?

चिली वो देश है, जिसने यूएनएससी में भारत की सीट के लिए लगातार प्रयास किया है.  चिली दक्षिण अमेरिका का पहला देश था जिसने 1956 में भारत के साथ व्यापार समझौता किया था. इसके बाद दोनों देशों ने अपने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं. चिली खनिज संसाधनों के मामले में बेहद समृद्ध देश है. इसके पास कॉपर, लिथियम, मोलिब्डेनम, सोना, चांदी, लौह अयस्क, आयोडीन और नाइट्रेट के विशाल भंडार हैं.

भारत, चिली से तांबा, लोहा, लिथियम और इस्पात जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का आयात करता है, जो भारत के घरेलू उद्योगों के लिए आवश्यक हैं. तो भारत से चिली वाहन और उनके पुर्जे, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, रसायन और इंजीनियरिंग सामान ज्‍यादा खरीदता है. वहीं, चिली से भारत तांबा, लिथियम, फल और वाइन ज्‍यादा खरीदता है. चिली में भारतीय कंपनियों का अनुमानित निवेश 620 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है.

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