भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री जब 46 वां स्थापना दिवस मना रही है तब 7000 किलोमीटर दूर, यूरोपीय देश लिथुआनिया से एक बुरी खबर सामने आई है. यूरोपीय देशों के साथ ‘अटलांटिक रिजोल्व’ नाम की एक्सरसाइज के दौरान अमेरिका के चार सैनिकों की मौत की खबर आई है.
लिथुआनिया में अटलांटिक एक्सरसाइज के दौरान दलदल में फंसी टेक्टिकल रिकवरी व्हीकल, चार अमेरिकी सैनिकों की मौत
चारों मृतक सैनिक, अमेरिका की एक कॉम्बेट रिकवरी व्हीकल में तैनात थे और बेलारूस से सटे इलाके में दलदल में फंसे एक टेक्टिकल व्हीकल को निकालने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान दलदल में उनका रिकवरी व्हीकल धंस गया था.
अमेरिका की यूरोप एंड अफ्रीकी कमान ने एक हफ्ते के सर्च ऑपरेशन के बाद चौथे सैनिक के शव को बरामद करने की जानकारी साझा की है. 25 मार्च को एक्सरसाइज के दौरान यूएस फोर्सेज का एक कॉम्बैट टेक्टिकल व्हीकल दलदल में फंस गया था. इस व्हीकल को निकालने के लिए अमेरिका की 1 आर्मर्ड ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की एक रिकवरी व्हीकल की गई थी, जो खुद दलदल में धंस गई थी.
बेलारूस के बॉर्डर पर एक हफ्ते तक चला सर्च ऑपरेशन
पिछले एक हफ्ते से अमेरिका, लिथुनिया, एस्टोनिया और पौलेंड जैसे देशों की सेनाएं, दलदल से रिकवरी व्हीकल निकालने की मशक्कत कर रहे थे. 31 मार्च यानी सोमवार को तीन अमेरिकी सैनिकों के शव बरामद किए गए थे. अब चौथे का शव भी बरामद कर लिया गया है. व्हाइट हाउस ने भी चौथे सैनिक की मौत की पुष्टि कर दी है. (https://x.com/onlydjole/status/1907116375400718622)
अमेरिका की यूरोपीय कमान ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं ताकि कारणों का पता लगाया जा सके. यूक्रेन युद्ध के चलते नाटो देशों की सेनाएं, बेलारूस से सटे नाटो देशों में तैनात हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध में बेलारूस न कूद जाए, ऐसे में अमेरिका की अगुवाई में यूरोपीय देश अलर्ट पर हैं. बेलारूस को रूस का सबसे करीबी देश माना जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हालांकि, रूस-यूक्रेन जंग को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन यूएस फोर्सेज, नाटो देशों के साथ एक्सरसाइज में हिस्सा लेती रहती हैं. अटलांटिक रिजोल्व भी इसी का हिस्सा है.
एक अमेरिकी नागरिक के बेलारूस में गिरफ्तार होने से मामला हुआ पेचीदा
इस बीच अमेरिकी सैनिकों को लेकर स्थानीय मीडिया में ये खबर फैल गई कि जिस चौथे सैनिक की दलदल में तलाश की जा रही थी, उसे बेलारूस ने धर-दबोचा गया है. बाद में हालांकि, साफ कर दिया गया कि पकड़ा गया व्यक्ति, अमेरिकी मूल का जरूर है लेकिन वो सैनिक नहीं है जिसकी तलाश की जा रही थी.
क्या होती है मैक-इन्फेंट्री
मैकेनाइज्ड फोर्सेज, टेक्टिकल व्हीकल में सवार रहती हैं, जिन्हें इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (आईसीवी) या फिर आर्मर्ड पर्सनल कैरियर (एपीसी). भारतीय सेना की मैक-इन्फेंट्री को 70 के दशक के आखिर में खड़ा किया गया था. लेकिन 80 के दशक में तत्कालीन थलसेना प्रमुख जनरल के सुंदरजी ने मैक-इन्फैंट्री की अहमियत को पहचाना.
मैक-इन्फेंट्री की आईसीवी, नदी-नालों से लेकर बर्फ, रेगिस्तान और दलदल जैसे इलाकों के लिए खास तौर से तैयार की जाती हैं. भारतीय सेना, रूस की मदद से बनी बीएमपी व्हीकल इस्तेमाल करती हैं. हालांकि, अमेरिका के स्ट्राइकर व्हीकल को लेकर भी चर्चाएं चलती रहती हैं. (https://x.com/adgpi/status/1907241722704531520)
रूस, अमेरिका और चीन जैसी सेनाओं में सामान्य इन्फैंट्री यानी पैदल सैनिकों की रेजिमेंट को लगभग खत्म कर दिया गया है. सैनिकों के तेज मूवमेंट के लिए, इन देशों की सेनाएं मैक-इन्फेंट्री पर ही ज्यादा निर्भर रहती हैं.