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तुलसी गबार्ड ने की डोवल से मुलाकात, रायसीना डायलॉग में सुनेगी पूरी दुनिया

रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने भारत पहुंची अमेरिकी डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (डीएनआई) तुलसी गबार्ड ने राजधानी दिल्ली पहुंचकर रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवल से मुलाकात की है. माना जा रहा है कि दोनों के बीच भारत और अमेरिका की सुरक्षा और इंटेलिजेंस से जुड़े मुद्दों पर खास चर्चा हुई.

तुलसी गबार्ड ने अमेरिका की डीएनआई बनने के बाद पहली आधिकारिक यात्रा के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के जापान और थाईलैंड के साथ भारत का चुना. इस दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति की बेहद खास सिपहसालार, तुलसी गबार्ड सालाना रायसीना डायलॉग (17-19 मार्च) में भी हिस्सा लेंगी.

जानकारी के मुताबिक, अजीत डोवल ने तुलसी गबार्ड के साथ-साथ इंग्लैंड की खुफिया एजेंसी एमआई-6 के चीफ रिचर्ड मूर और कनाडा के इंटेलिजेंस चीफ डेनियल रोजर्स से भी मुलाकात की है. साथ ही रूस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और न्यूजीलैंड सहित करीब 20 देशों के टॉप इंटेलिजेंस ऑफिसर्स ने एनएसए और भारतीय खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक की है.

बैठक में इंडो-पैसिफिक, वैश्विक आतंकवाद, गैर-कानूनी प्रवासन, नारको-टेररिज्म, टेरर फंडिंग, ग्लोबल सिक्योरिटी जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की.

सोमवार को पीएम मोदी करेंगे रायसीना डायलॉग का उद्घाटन

सोमवार से रायसीना डायलॉग शुरू हो रहा है. भारत के विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा जियो-पॉलिटिक्स से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. इस वर्ष न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सोन भी मुख्य अतिथि के तौर पर रायसीना डायलॉग में हिस्सा ले रहे हैं.

हिंदू मूल की अमेरिकी डीएनआई तुलसी गबार्ड भी रायसीना डायलॉग को संबोधित करेंगी. इसके अलावा रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और यूक्रेन के विदेश मंत्री अंद्रीला साइबिहा भी सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंच रहे हैं. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी सम्मेलन की अगवानी करने के साथ ही संबोधित भी करेंगे.

रायसीना डायलॉग का ये 10वां संस्करण है. इस वर्ष सम्मेलन का थीम रखा गया है कालचक्र—पीपुल, पीस एंड प्लनेट. तीन दिन तक चलने वाले सम्मेलन में 125 देशों के 3500 मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, मिलिट्री कमांडर्स, जर्नलिस्ट, बुद्धिजीवी, स्कॉलर्स, टेक्नोलॉजी लीडर्स और उद्योगपति हिस्सा लेंगे.

ट्रंप प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी का पहला भारत दौरा

भारत सहित इंडो-पैसिफिक देशों की यात्रा शुरू करने से पहले तुलसी ने कहा था कि “इस क्षेत्र (इंडो-पैसिफिक) में जन्म लेने के चलते मैं इस क्षेत्र को बेहद अच्छे से जानती हूं. मैं, जापान, थाईलैंड और भारत जा रही हूं और वाशिंगटन डीसी लौटते समय कुछ देर के लिए फ्रांस में रूकूंगी.”

तुलसी ने बताया कि इंडो-पैसिफिक की यात्रा में “पहला पड़ाव होनुलुलु होगा जहां मैं आईसी (इंटेलिजेंस कम्युनिटी) पार्टनर्स और इंडो-पैकोम के नेताओं (कमांडर्स) से मुलाकात करूंगी तथा वहां ट्रेनिंग ले रहे सैनिकों से भी मिलूंगी.” (https://x.com/DNIGabbard/status/1899184192656986418)

वाशिंगटन डीसी पहुंचकर मोदी ने सबसे पहले की थी तुलसी से मुलाकात

उल्लेखनीय है जब पिछले महीने पीएम मोदी वाशिंगटन डीसी के एक दिवसीय दौरे पर गए थे तो सबसे पहले तुलसी से ही मुलाकात की थी. तुलसी ने एक दिन पहले ही अमेरिका के सबसे पावरफुल पदभार (डीएनआई) में से एक संभाला था.

अमेरिका की पहली महिला कैबिनेट मंत्री हैं तुलसी, संभालती हैं सभी खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी

अमेरिका के इतिहास में पहली बार कोई हिंदू महिला राष्ट्रपति के कैबिनेट का हिस्सा बनी हैं. डीएनआई एक कैबिनेट पद है जिसके अंतर्गत अमेरिकी की सभी इंटेलिजेंस एजेंसियां काम करती हैं.

वर्ष 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने वाली तुलसी, दो साल पहले रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गई थी. ट्रंप के चुनाव के लिए तुलसी ने जी-तोड़ मेहनत की थी. 

डीप-स्टेट के खिलाफ चलाया था अभियान

चुनाव अभियान के दौरान तुलसी ने ट्रंप के खिलाफ डीप-स्टेट सक्रिय होने का आरोप लगाया था. तुलसी का आरोप था कि डीप-स्टेट, जो बाइडेन को राष्ट्रपति बनाने के फिराक में था. ट्रंप भी अमेरिका के डीप-स्टेट के खिलाफ रहे हैं और सत्ता संभालते ही डीप-स्टेट को मदद करने वाली संस्था यूएसएआईडी को बंद कर दिया है.

हाल ही में अमेरिका के पूर्व अधिकारी ने इस बात का खुलासा किया था कि यूएसएआईडी ने पीएम मोदी को चुनाव हराने के लिए विरोधियों को फंडिंग की थी. यहां तक की सोशल मीडिया पर मोदी के विरोध वाले नैरेटिव को बढ़ावा दिया था.