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मोदी और म्यांमार जनरल की मुलाकात, भूकंप की त्रासदी में फर्स्ट रिस्पॉन्डर बना है भारत

बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के टॉप जनरल मिन आंग हेलांग से मुलाकात की है. पीएम मोदी और जनरल मिन की मुलाकात ऐसे समय में आई है जब म्यांमार भूंकप की त्रासदी से जूझ रहा है और भारत ने मदद के लिए सबसे पहले हाथ उठाया है.

जनरल मिन, फरवरी 2021 में तख्तापलट कर म्यांमार की सत्ता पर काबिज हुए थे. उसके बाद यह पीएम मोदी के साथ उनकी पहली मुलाकात है. म्यांमार इन दिनों भूकंप की प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है. म्यांमार में आए भूकंप में तीन हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं और पांच हजार के करीब लोग घायल हुए हैं. वहीं 300 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. भारत, म्यांमार में आए भूकंप के बाद पहला ऐसा देश है, जिसने बिना वक्त गंवाए म्यांमार को राहत-बचाव कार्य में मदद पहुंचाई है. वायुसेना और नेवी के जहाजों ने न सिर्फ राहत सामग्री, खाना-पानी बल्कि दवाईयां, बिस्तर भी पहुंचाया है, साथ ही मलबे में जिंदगी तलाशने के लिए सेना के स्पेशलिस्ट भी म्यांमार पहुंचे. 

म्यांमार के जुंटा प्रमुख से मिले पीएम मोदी

पीएम मोदी और जुंटा प्रमुख के बीच कई मुद्दों पर बात हुई है. पीएम मोदी ने मुलाकात के बाद तस्वीर शेयर करके लिखा, “बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से इतर म्यांमार के वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की. हाल ही में आए भूकंप के कारण हुई जानमाल की हानि पर एक बार फिर संवेदना व्यक्त की. भारत इस कठिन समय में म्यांमार के अपने भाइयों और बहनों की सहायता के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. हमने भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय संबंधों, विशेष रूप से कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की.”

जनरल मिंग ने पीएम मोदी को कहा थैंक्यू

पीएम मोदी और जनरल मिंग के बीच आधे घंटे से ज्यादा समय तक मुलाकात हुई. इस दौरान  जनरल ने 28 मार्च को आए भूकंप के तुरंत बाद भारत के तेजी से मदद भेजने की भी तारीफ की. जनरल मिन आंग ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया. जनरल मिन ने गुजरात के भुज भूकंप के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के पुनर्निर्माण कार्य और नेतृत्व की भी सराहना की. 

म्यांमार की मदद के लिए भारत ने चलाया ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’

पिछले सप्ताह शुक्रवार (28 मार्च) को आए भूकंप में म्यांमार में भारी तबाही मचा गई. सैकड़ों इमारतें ध्वस्त हो गईं, सड़कें तबाह हो गईं, लोगों के घर जमींदोज हो गए. ऐसे में भारत ने बिना देरी किए ‘नेबरहुड’ ‘फर्स्ट नीति’ के तहत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरु किया.

भारत ने म्यांमार में मेंडले के पास मिलिट्री फील्ड अस्पताल बनाए हैं, जहां जरूरतमंदों का इलाज किया जा रहा है. साथ ही एनडीआरएफ के जवान भी म्यांमार में राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं. भारत ने म्यांमार की मदद के लिए टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाईजिन किट्स, सोलर लैंप, जेनरेटर सेट, जरूरी दवाएं, जैसे पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, कैनुला, सीरिंज, दस्ताने, कॉटन बैंडेज, यूरिन बैग आदि शामिल हैं.

विदेश मंत्रालय ने म्यांमार में चलाए जा रहे ऑपरेशन का नाम ‘ब्रह्मा’ रखने के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि, “ब्रह्मा सृजन के देवता हैं, ऐसे समय में जब हम म्यांमार सरकार और म्यांमार के लोगों को विनाश के बाद अपने देश के पुनर्निर्माण के लिए मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं, तो ऑपरेशन का नाम ब्रह्मा रखा गया है.”

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